बढ़िया मुनाफे के चलते किसानों के बीच औषधीय पौधों की खेती करने की ललक बढ़ी है. हालांकि, कम जानकारी के चलते किसान अभी भी बड़े पैमाने पर औषधीय पौधों की खेती नहीं करते हैं. ऐसे सरकार किसानों को मेडिसिनिलन प्लांट्स को लेकर जागरूक करने के लिए कई सारे कार्यक्रम भी चला रही है.
औषधीय पौधों को दवा बनाने के साथ-साथ अन्य कई जरूरी कार्यों में उपयोग किया जाता है. इनकी मांग देश-दुनिया में बरकरार रहती है. यही वजह है कि किसान इन पौधों की खेती की तरफ बहुत तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. यहां हम आपको ऐसे 5 पौधों के बारे में बताने जा रहे हैं.
अश्वगंधा एक झाड़ीदार पौधा होता है. इसके फल, बीज और छाल के उपयोग से कई दवाइयां बनाई जाती हैं. इसके उपयोग से तनाव और चिंता को दूर किया जा सकता है.
लेमनग्रास की फसल को रोपाई के बाद सिर्फ एक बार निराई करने की जरूरत पड़ती है. इसके फसल को सिंचाई की खास आवश्यकता नहीं है. एक बार फसल लगाने के बाद 4-5 साल तक लगातार इस फसल से मुनाफा हासिल किया जा सकता है.
आयुर्वेद की दवाओं को बनाने में अकरकरा के डंठल का उपयोग बड़े स्तर पर किया जाता है. इसके बीज डंठल की मांग हमेशा बनी रहती है. ऐसे में बाजार में इसकी एक किलो लकड़ी तकरीबन 300-400 रुपये तक में बिक जाती है.
सहजन उपयोग सब्जी और दवा बनाने में होता है. इसका पौधा एक बार लगाने पर कई सालों तक मुनाफा कमाया जा सकता है.