पंजाब के कपूरथला जिले में सरकारी आदेशों के चलते एक किसान को 6 कनाल क्षेत्र पर रोपी गई अपनी धान की अगेती फसल को खुद नष्ट करने के लिए मजबूर होना पड़ा. दरअसल, कपूरथला के मच्छीजोआ गांव में राज्य के कृषि विभाग के अधिकारियों ने सुरेंद्र सिंह नामक किसान को धान की अगेती फसल की पौधे लगाते पकड़ा था. जब तक अधिकारी वहां पर पहुंचे किसान 6 कनाल क्षेत्र पर धान की पौध रोप चुका था.
किसान ने अपनी फसल पर क्यों चलाया ट्रैक्टर?
कृषि विभाग के अधिकारी रविंद्र कुमार ने कहा कि धान की अगेती फसल को समय से पहले रोपाई करने वाले किसानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी. इसी कड़ी में किसान सुरेंद्र सिंह ने कृषि विभाग के निर्देशों के मुताबिक, खुद ही धान के खेतों पर ट्रैक्टर चलाकर फसल नष्ट कर दी ताकि कार्रवाई से बचा जा सके.
पंजाब में 19 जून से धान की बुवाई शुरू कर सकते हैं किसान
दरअसल, पंजाब सरकार ने धान की सीधी बिजाई शुरू करने के लिए 19 जून का समय निर्धारित किया है. ऐसे किसानों को 1500 रुपये प्रति प्रोत्साहन देने की घोषणा भी की गई है. हालांकि, किसान सुरेंद्र सिंह ने सरकार द्वारा तय गई तारीख से पहले ही धान की फसल लगा दी जो पंजाब प्रिवेंशन ऑफ सब्स्वाइल वॉटर एक्ट 2009 का उल्लंघन है.
पंजाब में तेजी से घट रहा है भूजल स्तर
पंजाब में गुर्जर का स्तर लगातार कम होता जा रहा है. राज्य के संगरूर पटियाला पठानकोट मोहाली मोगा जालंधर होशियारपुर फतेहगढ़ साहिब बठिंडा बरनाला आदि जिलों में भूजल स्तर प्रतिवर्ष 0.49 मीटर की दर से नीचे जा रहा है. इन जिलों में भूजल स्तर 150 से 200 मीटर तक नीचे चला गया है. केंद्रीय भूजल बोर्ड के मुताबिक, अगर पंजाब में भूजल स्तर इस तरह से गिरता रहा तो साल 2039 तक वह 300 मीटर तक नीचे चला जाएगा. भूजल बोर्ड ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर पंजाब में पानी का अत्यधिक दोहन नहीं रोका गया तो पानी की कमी के चलते खाद्य सुरक्षा को बड़ा खतरा हो सकता है.
एक किलो धान उगाने पर 4000 लीटर पानी की खपत
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किए गए अनुसंधान के मुताबिक एक किलो धान उगाने के लिए 3600 लीटर से 4125 लीटर के बीच में पानी की जरूरत पड़ती है. देरी से पकने वाली धान की फसलों को ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है. इसलिए राज्य सरकार अब फसलों के विविधीकरण और जल्दी पकने वाली फसलों को प्राथमिकता दे रही है. केंद्र सरकार ने देश की खाद्य सुरक्षा के मद्देनजर पंजाब के किसानों को गेहूं और धान उगाने के लिए प्रेरित किया जिसकी वजह से पानी का अत्यधिक दोहन होने लगा.