गर्मी आ गई है. इसके बाद बरसात का मौसम आ जाएगा. इस दौरान डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी कई बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगेगा. गंबूसिया नाम की मछली पालकर इन बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है. इस मछली की एक खासियत होती है कि यह पानी में पैदा होने वाले मच्छर के लार्वा को खा जाती है.
मच्छरों के लार्वा को चट कर जाती है ये मछली
गंबूसिया मच्छरों के लार्वा को चट कर जाती है, मच्छरों का लार्वा पानी के ऊपर तैरता रहता है, इस मछली का मुंह ऊपर की तरफ होता है, जिससे ये लार्वा को खा जाती है. गंबूसिया मछली अंडे नहीं देती, बल्कि बच्चे देती है, जबकि ज्यादातर मछलियां अंडे देती हैं. ये 80-120 बच्चे देती हैं और 24 घंटे में अपने भार का 40 गुना लार्वा खा जाती हैं.
कहीं भी कर सकते हैं पालन
गंबूसिया मछली की सबसे खास बात ये होती है इसे कहीं भी डाल सकते हैं. जबकि दूसरे एक्वेरियम की मछलियों के लिए ऑक्सीजन लगानी होती है, लेकिन इसे किसी भी ड्रम या टब में डाल सकते हैं और जैसे-जैसे इसके बच्चे बढ़ते जाएं इन्हें दूसरी जगह पर डालते जाएं.
नई परिस्थितियों को जल्दी अपनाती है
गंबूसिया लगभग 4-7 सेंटीमीटर लंबाई की छोटी मछलियां होती हैं जो ताजे पानी में पाए जाने वाले विभिन्न जीवों जैसे ज़ोप्लांकटन (पानी के पिस्सू, सतह के कीड़े को खाती हैं. मछलियां नए वातावरण और जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल होने में अच्छी होती है.
ऐसे भी बढ़ाती है आय
बता दें गंबूसिया मछली को लोग बड़े चाव से खाते भी हैं. इस वजह से इसकी बाजार में मांग है ही, साथ ही मच्छरों के खिलाफ प्रभावी होने की वजह से अब इसकी मांग दोगुनी हो गई है. इस मछली के उत्पादन से किसान भाई अपना मुनाफा काफी आसानी से दोगुना कर सकते हैं.