Jackfruit cultivation: कटहल को दुनिया का सबसे बड़े फलों में गिना जाता है.. इसोफ्लेवोंस और सैपोनिन जैसे फाइटोन्यूट्रिएंट्स जैसे पोषक तत्व के होने से यह फल कैंसर जैसी बीमारियों के खिलाफ बेहद प्रभावी होते हैं. आमतौर पर कटहल का उपयोग लोग सब्जी, अचार इत्यादि बनाने के लिए करते हैं. ऐसे में बाजार में भी कटहल की कीमतें ठीक-ठाक बनी रहती हैं.
कटहल की खेती के लिए किसानों द्वारा ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं पड़ती है. बिना किसी खास निगरानी के इसे उगाया जा सकता है. यह फल तकरीबन 8-10 माह में बंडिंग/ग्रैफ्टिंग योग्य तैयार हो जाते है. एक बार फसल लगाने के बाद किसान कई साल तक इस पौधे से मुनाफा हासिल कर सकते हैं.
कटहल की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु
कटहल की खेती के लिए शुष्क प्रकार की जलवायु उपयुक्त मानी जाती है. इसे कहीं भी उगाया जा सकता है. पहाड़ और पठाड़ जैसी जगह भी इस फल की खेती की जा सकती है. हल्की देख-रेख में यह पौधा कुछ ही वक्त में किसानों को मालामाल करना शुरू कर देता है.
कटहल की खेती के लिए सिंचाई प्रक्रिया
कटहल की खेती के लिए सिंचाई की बेहद आवश्यकता पड़ती है. बुवाई की शुरुआत से ही इसके पौधों को पानी देना जरूरी हो जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी और सर्दी के मौसम में हर 15 दिन के अन्तराल पर इस पौधे को पानी की आवश्यकता पड़ती है.
कटहल के फलों को विकास के साथ कई प्रकार से उपयोग में लाया जाता है. मध्यम उम्र के फल, जिसे सब्जी के लिए प्रयोग किया जाता है, को उस समय तोड़ना चाहिए जब उसके डंठल का रंग गहरा हरा, गूदा कठोर और कोर मलायम हो. इसके अलावा अगर आप कटहल के पके फलों का सेवन करना चाहते हैं तो इसे फल लगने के तकरीबन 100-120 दिनों बाद तोड़ना चाहिए. बता दें कि अगर कटहल की खेती बड़े स्तर पर की जाए तो किसान आराम से सालाना 8 से 10 लाख तक मुनाफा हासिल कर सकते हैं.