प्याज की खेती करने वाले किसान घटती कीमतों से बेहाल हैं. लगातर गिर रहा प्याज का रेट अब दो रुपये प्रति किलो से भी नीचे पहुंच चुका है. ऐसे में मजबूरी में किसानों को अपनी फसल सड़क पर फेंकनी या मवेशियों को खिलानी पड़ रही है. हिम्मत करके अगर कोई किसान अपनी उपज लेकर मंडी तक पहुंच भी रहा है तो मुनाफा कमाना तो दूर उसे अपनी जेब से पैसे चुकाने पड़ रहे हैं.
मुनाफा तो छोड़िए, किसान को प्याज बेचने पर खुद के जेब से देने पड़े 986 रुपये
ताजा मामला महाराष्ट्र का है. जहां एक किसान को 60 बोरी (तकरीबन 3 टन) प्याज बेचने के बाद भी खुद की तरफ से अलग से 986 रुपये चुकाने पड़े. फूलचंद सिंघान डेढ़ एकड़ खेत के मालिक हैं. इसी डेढ़ एकड़ खेत पर सहारे वह अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. इस बार फसल अच्छी आई थी, लेकिन मंडी पहुंचते ही मुनाफा कमाने की उनकी उम्मीदें दम तोड़ गई. मुनाफा तो मिलना दूर, उन्हें खुद 986 रुपये अलग से चुकाने पड़े. ऐसे में हैरान परेशान किसान ने मुख्यमंत्री से दिल तोड़ने वाला सवाल पूछा है. किसान ने कहा कि "आप ही बताइए, मुख्यमंत्री जी, हम जाग जाएं या मर जाएं?''
डेढ़ की एकड़ की खेती में 67 हजार की लागत
डेढ़ एकड़ में प्याज की खेती के दौरान किसान फूलचंद सिंघान को जुताई में 2 हजार, बुवाई में 1 हजार, बैल पालन में 1 हजार, 7 हजार का बीज, निड़ाई में 9 हजार, कीटनाशकों के छिड़काव में 10 हजार रुपये, कटाई के लिए 30 हजार , खाद के लिए 7 हजार 225 रुपये खर्च हुए. कुल मिलाकर प्याज डेढ़ एकड़ की फसल पर किसान को 67 हजार से ज्यादा का खर्च आया. फसल बढ़िया होने के चलते किसान को उम्मीद थी कि इस बार अच्छा मुनाफा कमा लेंगे. हालांकि, 60 बोरी प्याज बेचने के बाद भी वह नुकसान में हैं. उन्हें अपनी जेब से 986 रुपये चुकाने पड़े.
60 बोरियां प्याज पर मिले सिर्फ 2 हजार 871 रुपये
किसानों को पहले 25 बोरियों पर प्रति किलो प्याज पर डेढ़ रुपये मिले. अगले 25 बोरियों पर 50 पैसे, अंतिम 10 बोरियों पर 1 रुपये. तकरीबन 3 टन बेचने पर किसान को सिर्फ 2 हजार 871 रुपये मिले. किसान को प्याज ढुलाई करने वाले वाहन का किराया 3 हजार 400 रुपये देना पड़ा, हम्माली के लिए 230 रुपये, तुलाई के लिए 137 रुपये, हजरी के लिए 90 रुपये देने पड़े. किसान का कुल खर्च आया 3 हजार 857 रुपये. ऐसे में किसान को अलग से अपनी जेब से 986 रुपये देने पड़े.
किसान का सरकार से सवाल
किसान फूलचंद सिंघान बताया कि उन्होंने एक बच्चे की तरह इस प्याज की खेती की. फसल अच्छी आई थी. उम्मीद थी की अच्छा मुनाफा होगा, लेकिन प्रति किलो प्याज पर 50 पैसे दिए जा रहे हैं. उल्टे खुद उस अपनी जेब से दुकानदार को नौ सौ रुपये देने पड़े. अब मुख्यमंत्री जी बताएं कि हम कैसे जिएंगे? वही बताए कि हमें कैसे जीना है? आज हमारे मरने का समय है... तो मेरे बाप सरकार अब आप ही बताओ हम जिएं या मरें?
घर पर पहुंच रहे हैं साहूकार
फूलचंद सिंघान की पत्नी ने बताया कि इस प्याज खेती के दौरान हम सुबह 9 बजे ही खेत चले जाते थे. खेती के लिए कर्ज लिया. अपने पोते के हाथ पर भी एक रुपये नहीं रखा. पूरी पूंजी प्याज की खेती में लगा दी है. अब प्रति किलो प्याज पर सिर्फ 50 पैसे मिल रहे हैं. अब साहूकार दरवाजे पर आ रहे हैं, कह रहे हैं पैसा दो...जब हमें मुनाफा एक रुपये का नहीं हुआ तो हम पैसे कहां से दें.
किसानों का सरकार पर आरोप
युवा किसान अशोक फूलचंद सिंघान ने कहा कि हमारे पास डेढ़ एकड़ खेत है. इस साल प्याज लगाया था. साहूकार से उधार लिया. हमें प्याज पर इतना कम रेट दिया गया कि खुद के पास से 986 रुपये चुकाने पड़े. सरकार सिर्फ घोषणा करती है. यहां किसान मौत के शिकार हो रहे हैं.
(बीड से रोहिदास हातागले की रिपोर्ट)