भारत के ग्रामीण इलाकों में बिजली की समस्या अभी तक गंभीर बनी हुई है. किसानों को बिजली की परेशानी से दो चार होना पड़ता है और भारी नुकसान झेलना पड़ता है. ऐसे में सरकार की तरफ से पीएम कुसुम योजना (PM Kusum Scheme) चलाई जा रही है. इस योजना के तहत सरकार भारत में किसानों के लिए खेती और अन्य कार्यों के लिए सोलर पैनल से बिजली उपल्बध कराती है. इसके अलावा सरकार गैर-जीवाश्म-ईंधन स्रोतों से बिजली की स्थापित क्षमता को 2030 तक 40% तक बढ़ाने के लक्ष्य पर भी काम कर रही है.
क्या है पीएम-कुसुम योजना
PM Kusum योजना 2019 में 3 महत्वपूर्ण घटकों के साथ शुरू की गई थी. किसान अपनी जमीन को सोलर पैनल के लिए आसानी से उपयोग कर सके और अधिक से अधिक लाभ उठाए इसके लिए सरकार की तरफ से इस पर सब्सिडी दी जाती है. कई राज्यों में किसान अपनी जमीन का उपयोग सोलर पैलन लगाने के लिए करें, इसके लिए 30 से 40 प्रतिशत तक का अनुदान भी दिया जाता है. इसके प्रमुख 3 घटक हैं.....
घटक (A): इस घटक के तहत किसान 500 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता के अक्षय ऊर्जा आधारित बिजली संयंत्र अपनी भूमि पर लगा सकता है. इसके अलावा किसान फसल वाली भूमि पर भी इसका लाभ ले सकते हैं. ट्रांसमिशन लाइनों की उच्च लागत से बचने और ट्रांसमिशन घाटे को कम करने के लिए सब-स्टेशनों के पांच किमी के दायरे में अक्षय ऊर्जा बिजली परियोजना स्थापित की जाती है.
इस कदम के पीछे उद्देश्य ये है कि किसानों के द्वारा उत्पादित बिजली स्थानीय डिस्कॉम (विद्युत वितरण कंपनी) द्वारा पूर्व-निर्धारित टैरिफ पर खरीदी जा सके. सरकार के इस कदम से किसानों खुद के लिए भी बिजली उत्पादित कर सकता है, साथ ही बेचने में भी सक्षम होता है. इस योजना के माध्यम से सरकार का उद्देश्य बंजर भूमि पर 10,000 मेगावाट विकेंद्रीकृत ग्रिड से जुड़े नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना करना है.
घटक (B): सरकार 17.50 लाख स्टैंड-अलोन सौर कृषि पंपों की स्थापना के लिए इस घटक के माध्यम से अलग-अलग किसानों को ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों में मौजूदा डीजल कृषि पंपों / सिंचाई प्रणालियों के प्रतिस्थापन के लिए 7.5 एचपी तक की क्षमता के स्टैंडअलोन सौर कृषि पंप स्थापित करने में सहायता करती है .
घटक (C): सरकार का आने वाले समय में 10 लाख ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों के सोलराइजेशन का लक्ष्य है. इस घटक के तहत, ग्रिड से जुड़े कृषि पंप वाले व्यक्तिगत किसानों को पंपों को सोलराइज करने के लिए सहायता दी जाएगी. किसान सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्पन्न सौर ऊर्जा का उपयोग करने में सक्षम होगा और अतिरिक्त सौर ऊर्जा को पूर्व निर्धारित टैरिफ पर DISCOM को बेच भी सकता है.
कैसे करें आवेदन?
प्रधानमंत्री-कुसुम योजना को राज्य सरकार के विभागों द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है. ऐसे में पीएम कुसुम योजना को लेकर राज्य सरकारों की तरफ से जारी अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आप अप्लाई कर सकते हैं. इच्छुक किसान अपने राज्य के विद्युत वितरण निगम विभाग के वेबसाइट पर रजिट्रेशन कराकर इस योजना का लाभ ले सकते हैं.
इस योजना की खास बातें
इस योजना की खास बात ये है कि एक बार सोलर पैनल लगवाने के बाद अगले 25 साल तक विद्युत वितरण कंपनी को अतिरिक्त उत्पादित बिजली बेच सकते हैं. साथ ही बताया इस योजना में किसानों को राज्य और केंद्र सरकार की तरफ से अनुदान भी दिया जाता है. इसके अलावा किसानों को बैंक से 30 प्रतिशत कर्ज भी देने का प्रावधान है.
प्रधानमंत्री-कुसुम योजना के नाम पर धोखाधड़ी करने वाली वेबसाइटों से सावधान
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि कई फर्जी वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन आवेदकों से प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (प्रधानमंत्री-कुसुम योजना) के नाम पर किसानों से सोलर पम्प लगाने हेतु ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने के साथ पंजीकरण शुल्क तथा पंप की कीमत का ऑनलाइन भुगतान करने को कह रहे हैं.
इनमें से कुछ फर्जी वेबसाइट डोमेन नाम * .org, * .in, * .com में पंजीकृत हैं जैसे www.kusumyojanaonline.in.net, www.pmkisankusumyojana.co.in, www.onlinekusamyojana.org.in, www.pmkisankusumyojana.com और इसी तरह की कई अन्य वेबसाइट्स हैं. सरकार ने फर्जी वेबसाइट्स से बचने के लिए अलर्ट जारी किया है. आधिकारिक वेबसाइट पर जाने ही एक नोटिस के माध्यम से धोखाधड़ी से बचने की सलाह दी जा रही है. मंत्रालय की तरफ से किसानों को सलाह दी गई है धोखाधड़ी करने वाली वेबसाइटों पर न जाएं तथा कोई भी भुगतान न करें.
योजना की अधिक जानकारी के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की आधिकारिक वेबसाइट (https://www.mnre.gov.in/ ) पर विजिट करें अथवा टोल फ्री नंबर 1800-180-3333 डायल करें.