पंजाब में धान की पराली को आग लगना शुरू हो चुका है जिसके चलते पंजाब की आबो हवा जहरीली हो रही है. हालांकि, यह आंकड़ा पिछले सालों के मुकाबले कम नजर आ रहा है. बात संगरूर की करें तो यहां पर सबसे ज्यादा धान की खेती होती है और पिछले कई सालों से यहां आग भी सबसे ज्यादा लगाई जाती थी, लेकिन इस बार ज्यादातर किसान बेलर मशीन के साथ खेत में से धान की पराली की बेल्स बनाकर उठा रहे हैं. फिर सुपर सीडर स्मार्ट सीडर मशीन के साथ गेहूं की बजाई कर रहे हैं. वहीं, कुछ किसान खेत से पराली को सूखा चारा बनाने वाली मशीन के साथ ट्रॉली में भरकर अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं. ऐसे में किसानों को पैसा भी मिल रहा है और खेत से पराली भी उठ रही है.
पराली से बना रहे सूखा चारा
आजतक संवाददाता ने संगरूर में वंगवाली गांव में जाकर जायजा लिया जहां पर किसान खेत से धान की पराली को सूखे चारे में इस्तेमाल कर रहे थे. संगरूर कृषि विभाग के अधिकारी डॉक्टर हरबंस सिंह ने मौके पर पहुंचकर किसानों का हौसला भी बढ़ाया और उन्होंने हमारे साथ बातचीत करते हुए बताया कि आज संगरूर में ज्यादातर किसान पराली को आग नहीं लग रहे. वो बेलर मशीन के साथ वेल्स बनाकर बायोगैस बनाने वाली कंपनी को दे रहे हैं और सुपर सीडर स्मार्ट सीडर मशीन के साथ गेहूं की बिजाई कर रहे हैं.
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12 से 15 हजार की कमाई
आजतक संवाददाता जिस खेत में पहुंचे वहां किसान पराली को सूखे चारे के तौर पर बनाकर बेच रहे हैं और अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं. एग्रीकल्चर चीफ ने बताया कि धान की परली से सूखे चारे की एक ट्राली किसान 1700 में बेच रहा है और उसकी एक दिन की कमाई 12000 से लेकर 15000 रुपये है. उन्होंने बताया कि पिछले साल संगरूर जिले में आग लगने के 5300 से ज्यादा मामले सामने आए थे, लेकिन इस बार उन्होंने बड़े स्तर पर सब्सिडी पर किसानों को मशीनें दी गई हैं. इस बार यह मामले आधे से भी कम रहने का अनुमान है.
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दूसरी ओर किसानों का भी कहना है कि उन्होंने यह मशीन कृषि विभाग से सब्सिडी पर 2 साल पहले ली थी. इस मशीन का इस्तेमाल गेहूं के सीजन में सूखे चारे बनाने के लिए होता है, लेकिन हमने 1 साल पहले इस मशीन से धान की पराली से सूखा चारा बनकर देखा तो हमारी 1700 रुपये में पर ट्राली बिकी. हम 12000 से लेकर 15000 तक कमा लेते हैं और उसके बाद गेहूं की बिजाई करते हैं, हमें अच्छा मुनाफा भी होता है और आगे गेहूं की फसल भी अच्छी हो जाती है.
आपको बता दें कि पंजाब में आने वाले 10 से 15 दिन धान की पराली को खेत से हटाकर गेहूं की बिजाई का समय है. इन दिनों में आग लगने के मामले और बढ़ सकते हैं लेकिन कृषि विभाग का दावा है कि वह पहले के मुकाबले आधे सामने आएंगे क्योंकि इस बार बड़े स्तर पर किसानों को सब्सिडी पर मशीनें उपलब्ध करवाई गई हैं.