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रणथंभौर नेशनल पार्क के चलते टाइगर सिटी नाम से पहचाने जाने वाले सवाई माधोपुर अब फूलों की महक से महकने लगा है. राज्य के उद्यान विभाग द्वारा जिले में विभिन्न प्रजाति के फूलों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके लिए किसानों को बकायदा ट्रेनिंग भी दी जा रही है.
पहले गुलाब की खेती के लिए प्रसिद्ध था सवाई माधोपुर
उद्यान विभाग फूल उत्कृष्टता केंद्र में देसी और विदेशी किस्म फूल की खेती की जा रही है. बताते चलें कि सवाई माधोपुर में पहले गुलाब के फूलों की खेती होती थी. कहते हैं कि अभिनेत्री आशा पारीक को यहां के गुलाब का बाग भी खास पसंद था. वक्त के साथ गुलाब की खेती तकरीबन बंद हो गई है.
फूलों की खेती से किसानों की आमदनी बढ़ाने का प्रयास
राज्य सरकार की पहल से एक बार फिर सवाई माधोपुर फूलों की महक से महकने लगा है. उद्यान विभाग के उप निदेशक लखपत लाल मीणा ने बताया कि फूल उत्कृष्टता केंद्र में देसी विदेशी सैकड़ों प्रजाति के पौधे तैयार किए जा रहे हैं. इसके साथ ही जिले के किसानों को भी फूलों की खेती करने का प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि फूलों की खेती के माध्यम से किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकें.
कई तरह के फूलों की होती है खेती
फूल उत्कृष्टता केंद्र में रजनीगंधा, गुलाब, हजारा, गुलदाउदी, ऑर्किड, डच रोज, रजनीगंधा, जरदरा जैसे विभिन्न प्रकार के फूलों की खेती की जा रही है. उद्यान विभाग के उपनिदेशक लखपत लाल मीणा ने बताया कि फूल उत्कृष्टता केंद्र पर दो किस्म के फूलों की खेती की जा रही है एक तो जो खुले में तैयार होते हैं, जिनमें गुलाब रजनीगंधा, डच रोज, गुलदावरी जैसे फूल शामिल है. वहीं, दूसरे जिन्हें टनल एवं शेडनेट के साथ तैयार किया जाता है. इसके चलते कई विदेशी फूलों की भी खेती यहां होने लगी है.
गुलाब के फूलों की 5 किस्मों की होती है खेती
उद्यान विभाग के उपनिदेशक लखपत लाल मीणा ने आगे बताया कि गुलाब के फूलों की लगभग 5 किस्म यहां पर तैयार की जा रही हैं और फूल उत्कृष्टता केंद्र में तैयार फूलों को लोकल मार्केट में ही बेचा जा रहा है. रणथंभौर आने वाले देसी विदेशी पर्यटकों को खुशनुमा माहौल देने के लिए यहां के होटल संचालक लगातार रजनीगंधा ऑर्कि़ड जैसे फूलों को होटलों के कमरे में सजाने के लिए ले जाते हैं.
मिल रहा बढ़िया मुनाफा
उद्यान विभाग के उप निदेशक लखपत लाल मीणा के मुताबिक फूल उत्कृष्टता केंद्र जीरो रेवेन्यू से शुरू था. यह अब करीब 10 लाख के रेवेन्यू तक पहुंच चुका है. उपनिदेशक लखपत मीणा ने बताया कि पिछले साल लगभग 6 लाख का रेवेन्यू मिला था. इस साल 9 लाख से भी अधिक का रेवेन्यू मिल चुका है. फूलों की बिक्री के साथ-साथ लोग यहां से विभिन्न प्रकार के फूलों के पौधे भी ले जाते हैं.
फूलों से तैयार किए जा रहे ये प्रोडक्ट
फूल उत्पादन के साथ ही यह फूलों से गुलाब जल, गुलकंद, शर्बत, इत्र आदि उत्पाद भी तैयार किये जा रहे हैं. इन्हें बाजार में बेचा जा रहा है. फूलों को पोषण देने के लिए यहां पर केंचुए से जैविक खाद तैयार की जाती है जो सभी फूलों को तैयार करने में काम आती है. इन सभी प्रयासों के चलते किसानों की आमदनी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है.
(सवाई माधोपुर से सुनील जोशी की रिपोर्ट)