IMD Weather Prediction System: मौसम के पूर्वानुमान का सीधा कनेक्शन खेती से है. मौसम खेती को प्रभावित करने वाला सबसे अहम कारक माना जाता है. वर्तमान में जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों को अचानक बदलने वाले मौसमी सिस्टम का सामना करना पड़ता है और इससे उन्हें बड़ी मात्रा में नुकसान का सामना करना पड़ता है. ऐसी स्थिति में लोगों को, खासकर किसान वर्ग के लिए मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी काफी लाभकारी होती है.
मौसम के बदलने की जानकारी पहले से हो तो उसके आधार पर किसान अपनी फसल को बचाने के लिए पहले ही उचित व्यवस्था कर सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि मौसम क्या होता है और उसका पूर्वानुमान कैसे लगाया जाता है?
किसी क्षेत्र विशेष के तापमान, आर्द्रता, वायुमण्डलीय दाब, वर्षा, बादलों की स्थिति, धूप की अवधि जैसे तत्वों के आधार पर तैयार स्थिति को जलवायु कहा जाता है. साथ ही इन तत्वों के स्थान और समय विशेष की तात्कालिक परिस्थितियों को मौसम कहा जाता है. अलग-अलग जगहों पर बनने वाली मौसमी सिस्टम के आधार पर ही वहां उगने वाले फसलों के प्रकार भी तय किए जाते हैं और उनकी बुवाई व कटाई का समय निर्धारित किया जाता है.
फसल पर पाला पड़ने, कोहरा, बाढ़ आदि की जानकारी अगर मौसम के पूर्वानुमान में लग जाए तो खेती को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि पूर्वानुमान या मौसम की भविष्यवाणी विश्वनीय हो.
किसानों को मौसम की कुछ जानकारियां समय पर मिल जाएं तो खेती को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है. ये हैं....
> खेती की जगह की जलवायु और उसकी विभिन्नताओं के बारे में
> स्थान विशेष पर यानी खेती की जगह पर मौसम में होने वाले परिवर्तन के बारे में
> मौसम का पूर्वानुमान
> मौसमी कीड़े-मकौड़े की जानकारी आदि.
मौसम के पूर्वानुमान के प्रकार
मौसम संबंधी पूर्वानुमान मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं...
> तत्कालिक (Nowcasting)- 24 घंटे तक
> अल्प अवधि (Short Duration)- 1 से 3 दिन तक
> मध्यम अवधि (Medium Duration)- 4 से 10 दिन तक
> विस्तृत अवधि (Extended Range)- 10 दिन से अधिक
इन चारों भविष्यवाणियों में से मध्यम अवधि वाला पूर्वानुमान सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है जिसकी वैधता 4 से 10 दिन होती है. साथ ही इसके सच होने की संभावना 70 फीसदी तक होती है.
किस आधार पर होती है मौसम भी भविष्यवाणी?
वर्षा, वायु गति एवं दिशा, अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान, आर्द्रता, बादलों की स्थिति संबंधी सात मौसम पैमानों की 5 दिनों की अग्रिम स्थिति का आंकलन कर भविष्यवाणी की जाती है.
मौसम पूर्वानुमान की पंचस्तरीय प्रक्रिया इस प्रकार है...
लेवल 1- सबसे ऊपर पॉलिसी के आयोजन के लिए निकाय (Apex Policy Organizing Body) होता है
लेवल 2- राष्ट्रीय कृषि मौसम परामर्श मुख्यालय (National Agricultural Weather Advisory Headquarters)
लेवल 3- राज्य स्तरीय कृषि मौसम परामर्श केंद्र (State Level Agricultural Weather Advisory Center)
लेवल 4- जिला स्तरीय कृषि मौसम परामर्श का प्रचार-प्रसार एवं प्रशिक्षण (Training of district level agricultural weather advisories)
लेवल 5- मौसम विज्ञान कृषि परामर्श केंद्र (Meteorological Agriculture Advisory Center)
मौसम के पूर्वानुमान के लिए आवश्यक मौसमी तत्व
किसी भी समय मौसम की भविष्यवाणी करने के लिए अधिकतम व न्यूनतम तापमान, हवा में नमी, हवा की गति और दिशा, एवापोरेशन रेट (वाष्पीकरण की दर), सोलर ऑप्टिकल पीरियड (सौर प्रकाशीय अवधि), बादलों की स्थिति, ओस की मात्रा और बारिश का आंकलन करना होता है.
इन सभी तत्वों के आंकलन के लिए मौसम विभाग अलग-अलग तकनीक वाले मशीनों का इस्तेमाल करता है, जैसे बारिश के लिए वर्षामापी यंत्र, हवा की गति मापने के लिए एनीमोमीटर, हवा की दिशा के लिए विंडवेन, वाष्पीकरण की दर को मापने के लिए पेन-इवेपोरीमीटर, सनसाइन रिकॉर्डर, ओस के लिए ड्यूगेज, जमीन का तापमान नापने के लिए थर्मामीटर का यूज किया जाता है.
मौसम विभाग द्वारा मौसम के पूर्वानुमान के लिए मौसमी तत्वों को सुबह 7.38 बजे और दोपहर में 2.38 बजे मापा जाता है. इसके अलावा ऑटोमेटिक मौसम केंद्र द्वारा हर आधे घंटे पर भी मैसमी तत्वों को मापा जाता है. साथ ही मौसमी केंद्र ऑब्जर्वेटरी, रडार और एयर बैलून के आधार पर भी मौसम के पूर्वानुमान या उसकी भविष्यवाणी करते हैं.