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Strawberry Farming: किसान ने सूखे इलाके में की स्ट्रॉबेरी की खेती, हर महीने कमा रहे 2 लाख

कृषि विभाग के सहयोग से पहले इन लोगों ने मिट्टी का टेस्ट करवाया तो पाया कि यहां की मिट्टी भुरभुरी है और जानकारों के अनुसार इसमें स्ट्रॉबेरी की खेती हो सकती है. इन दोनों ने स्ट्रॉबेरी के 1400 पेड़ लगाए और फिर देखते-देखते पेड़ बड़ा होता गया.

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Strawberry Farming
Strawberry Farming

झारखंड के जमशेदपुर के पटमदा गाँव के किसान ने यहां पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती की है. यह इलाका अमूमन धान की खेती और सभी प्रकार की सब्जी उत्पादन का केंद्र रहा है. कृषि विभाग की तरफ से यहां के युवा मलय महतो और युधिष्ठिर महतो को स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए प्रोत्साहाहित किया गया. इन युवा लड़कों ने भी कुछ अलग करने की सोचा. 

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कृषि विभाग के सहयोग से पहले इन लोगों ने मिट्टी का टेस्ट करवाया तो पाया कि यहां की मिट्टी भुरभुरी है और जानकारों के अनुसार इसमें स्ट्रॉबेरी की खेती हो सकती है. इन दोनों ने स्ट्रॉबेरी के 1400 पेड़ लगाए और फिर देखते-देखते पेड़ बड़ा होता गया. फिर फल भी आ गया फल काफी बड़ा और स्वदिस्ट है. पहली बार जब फल तोड़े गए तो करीबन 5 किलो स्ट्रॉबेरी निकली लेकिन बाद में हर दिन 15 से 20 किलो स्ट्रॉबेरी आने लगी.

अब ये लोग हर एक दिन के बाद स्ट्रॉबेरी को तोड़ रहे हैं और महीने के 2 लाख की कमाई कर रहे हैं. बाजार में यहां की स्ट्रॉबेरी की काफ़ी मांग है. अब ये लोग पैकेजिंग भी सीख रहे हैं. इन किसानों का कहना है कि अगर यह स्ट्रॉबेरी हम सितम्बर महीने में लगाते हैं तो हमारा मुनाफा काफ़ी अच्छा होगा क्योंकि ठण्ड में इसकी माँग काफ़ी होती है.

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मलय महतो ने बताया कि हम पटमदा गाँव में रहते हैं. हमारा इलाका सब्जी की खेती के लिए जाना जाता है. हम लोगों के यहां अधिकतर धान और सब्जी की खेती होती है लेकिन कृषि विभाग ने पहली बार हमको स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए कहा. हमने सारी प्रक्रिया पूरी कर स्ट्रॉबेरी की खेती की है. ये काफी सफल रहा. हम करीबन 2 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं. सबसे ज़्यादा दिक्कत फसल को बचाने में हो रही है. खुले में खेत हैं और चिड़िया इसको खाने आती हैं और हम इसे उनसे बचाते हैं.

वहीं युधिष्ठिर महतो का कहना है कि हम लोग पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं. इससे हमें बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है. हमें लगता है कि अब हमें अधिक से अधिक स्ट्रॉबेरी की खेती करनी चाहिए, जिससे यहां के किसानों को अधिक से अधिक मुनाफा मिले और इसके लिए हमने पहल शुरू कर दी है. यह पहला मौका है, जब इस इलाके में स्ट्रॉबेरी की खेती की जा रही है.

जिला उद्यान पदाधिकारी ने कहा कि ऐसा पहली बार हमने अपने इलाके की तीन जगहों पर किया. इसमें पटमदा, घातसीला और ढालभुमगढ़ शामिल हैं. सभी जगह के किसान काफ़ी ख़ुश हैं. उनको काफ़ी अच्छा मुनाफा हो रहा है. अगली बार हमारा विभाग और भी जगहों पर स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए किसानों को जागरूक करेगा और हमारी कोशिश होगी कि किसान अपनी अच्छी भागीदारी दें ताकि उनको अच्छा मुनाफा हो सके.

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