Bundelkhand Garlic Production: सूखे की मार के लिए चर्चित और बरसात पानी-पानी हो जाने वाले उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में एक जिला ऐसा भी है जो इस समय सफेद चांदी के नाम से जानी जाने वाली लहसुन की खेती से चर्चा में है. यहां बात हो रही है बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले के बारे में जहां के किसानों को लहसुन की खेती खूब रास आ रही है. यही कारण है कि बीते वर्ष लहसुन व प्याज का उत्पादन कर यहां के किसान अपनी आमदनी को दोगुनी करने में सफल रहे हैं. पूरे बुंदेलखंड में हमीरपुर जिला लहसुन व प्याज उत्पादन में अव्वल रहा है.
यहां के करीब 300 किसानों ने लगभग 160 हेक्टेयर में लहसुन की खेती की थी, जिसमें करीब 24 हजार क्विंटल लहसुन का उत्पादन हुआ है. किसानों की इस मेहनत को देखते हुए सरकार एमआईडीएस परियोजना के तहत कृषि विश्व विद्यालय बांदा एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से लहसुन उत्पादन में लगे किसानों को मुफ्त में बीज उपलब्ध करा रही है. साथ ही समय-समय पर किसानों को कृषि तकनीक व फसल से कैसे अधिक उत्पादन निकल सके, उसके गुण भी सिखाए जा रहे हैं. उम्मीद की जा रही है कि इस वित्तीय वर्ष करीब 500 हेक्टेयर में किसान लहसुन व प्याज की खेती कर सकेंगे.
जानवरों का कोई डर नहीं
लहसुन की खेती से किसानों में फसल को नुकसान पहुंचाने वाले जानवरों का डर भी खत्म हो गया है. क्योंकि लहसुन को कोई भी मवेशी व जंगली सूअर खाना पसंद नहीं करते. यही कारण है कि किसान लहसुन की खेती जमकर कर रहे हैं. इन फसलों को धरातल में लाने में कृषि विश्वविद्यालय के प्रोजेक्ट इंचार्ज डां भानु प्रसाद मिश्रा एवं विज्ञान केंद्र कुरारा के को पीआई डां प्रशांत की अहम भूमिका रही है. इनसे किसानों को समय-समय पर तकनीकी जानकारी मिलती रही है. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों का खेती के प्रति विश्वास जगाया है. यही कारण है कि 60 हजार क्विंटल लहसुन व प्याज का उत्पादन कर हमीरपुर के किसान पूरे बुंदेलखंड में टॉप पर हैं.
कृषि वैज्ञानिक डां प्रशांत सिंह ने कहा कि बांदा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित परियोजना के अन्तर्गत किसानों को गतवर्ष करीब 170 किलो बीज निशुल्क वितरित किया गया. जिसमें करीब 24 हजार क्विंटल लहसुन का उत्पादन किसानों ने किया है. उन्होंने बताया कि प्रति हेक्टेयर 150-160 क्विंटल लहसुन का उत्पादन होता है. लहसुन की मुख्य प्रजातियों में शुमार यमुना सफेद, जी 5, जी 11 आदि हैं.
खरीफ सीजन में प्याज भी मुनाफे की खेती
प्रशांत सिंह ने कहा कि खरीफ के सीजन में प्याज की खेती भी किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. बीते वर्ष किसानों ने करीब 150 हेक्टेयर में प्याज की खेती की थी, जिसमें करीब 35 हजार क्विंटल प्याज का उत्पादन हुआ था. इस कामयाबी को देखते हुए इस बार दोगुने क्षेत्रफल में प्याज लगाए जा रहे हैं.
प्रशांत ने बताया कि सबसे पहले लहसुन की नर्सरी तैयार कराई जाती है. जो जुलाई के आखिरी पखवाड़े एवं अगस्त के पहले सप्ताह तक लगाई जाती है. इसके बाद अक्टूबर एवं नवंबर महीने तक फसल तैयार हो जाती है. इसमें प्रति हेक्टेयर 250-300 क्विंटल तक उत्पादन किया जा सकता है. इससे किसानों की आमदनी भी अच्छी हो रही है.
एक बीघे में 21 क्विंटल लहसुन की पैदावार
विकासखंड सुमेरपुर के पत्योरा गांव निवासी किसान ब्रजराज सिंह बताते हैं कि अभी तक वह पारंपरिक खेती करते थे, जिसमें साल भर के खाने के अलावा कुछ भी नहीं बचता था. इस बीच पिछले वर्ष केवीके वैज्ञानिक डां चंचल से मुलाकात हुई. जिन्होंने लहसुन व प्याज की खेती करने की सलाह दी. उन्हीं की प्रेरणा से गतवर्ष एक बीघे में एक क्विंटल 'जी 11' बीज लाकर लगवाया. इसमें करीब 20 से 25 हजार रुपये की लागत आई होगी.
हालांकि, फसल तैयार होने के बाद करीब 21 क्विंटल लहसुन का उत्पादन हुआ, जो इस समय 70 से 80 रुपये किलो के भाव में बिक रही है. उन्होंने बताया कि ये फसल किसानों के लिए बिल्कुल सुरक्षित फसल है. मवेशियों से त्रस्त किसानों के लिए लहसुन व प्याज की खेती करना बिल्कुल सही साबित हुआ है. जमीन के अंदर पैदा होने के कारण दैवीय आपदा से बिल्कुल सुरक्षित है. उन्होंने बताया कि इस बार वो दो बीघे में लहसुन की खेती करेंगे.
वहीं महिला किसान फूला देवी ने बताया कि गतवर्ष उद्यान विभाग से 16 किलो लहसुन का बीज निशुल्क मिला था, जिसमें करीब 4 क्विंटल लहसुन का उत्पादन हुआ है. उन्होंने बताया कि बिना किसी रखवाली व मेहनत के ये फसल तैयार हो गई. अबकी बार अधिक क्षेत्रफल में इसकी खेती कराउंगी.