Blue Oyster Mushroom: देश में मशरूम की कई ऐसी प्रजातियां आ गई हैं, जिनकी खेती सालभर की जा सकती है. इससे किसानों में मशरूम खेती को लेकर लोकप्रियता भी बेहद तेजी से बढ़ी है. किसान कम लागत में इसकी खेती कर बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं. इसकी खेती के लिए किसानों को ज्यादा बड़ी जगह की भी जरूरत नहीं होती है. एक बंद कमरे में भी मशरूम की खेती की जा सकती है.
बता दें कि पहले मशरूम की खेती के लिए पहाड़ी क्षेत्रों का ही मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता था. लेकिन अब मैदानी क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर ऑयस्टर और मिल्की मशरूम जैसी प्रजातियों की खेती होने लगी है. ऐसी ही प्रजाति है ब्लू ऑयस्टर मशरूम जो किसानों के बीच काफी तेजी से लोकप्रिय हो रही है.
ब्लू ऑयस्टर मशरूम के सेवन के ये हैं फायदे
ब्लू ऑयस्टर मशरूम दिखने में सीप की तरह होता है. यह अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों के खिलाफ इसका सेवन काफी फायदेमंद माना जाता है. ब्लू ऑयस्टर मशरूम प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, फाइबर का अच्छा स्रोत है.स्वाद के मामले में भी यह अन्य मशरूमों से अलग होता है.
ऐसे उगाया जाता है ये मशरूम
ब्लू ऑयस्टर मशरूम की खेती में ज्यादा लागत नहीं आती है. इसे भी अन्य मशरूमों की तरह ही उगाया जाता है. इसे सोयाबीन की खोई, गेहूं के भूसे, धान के पुआल, मक्का के डंठल, अरहर, तिल, बाजरा, गन्ने की खोई, सरसों के पुआल, कागज के कचरे, कार्डबोर्ड, लकड़ी के बुरादे जैसे कृषि अपशिष्टों पर आसानी से उगाया जा सकता है. फिर पुआल को पॉलीथिन बैग में भरकर बिजाई (स्पॉनिंग) की जाती है और बैग का मुंह बांध कर उसमें 10-15 छेद किए जाता है. फिर उसे अंधेरे कमरे में छोड़ दिया जाता है.
बन सकते हैं करोड़पति
विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक बैग में 15-17 दिनों बाद कवक जाल पूरी तरह से फैल जाता है. तकरीबन 23-24 दिन बाद मशरूम तोड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं. ये मशरूम बाजार में 150-200 रुपये प्रति किलो किलों के आसपास बिकते हैं. ऐसे में जितना बड़ा आपका मशरूम उत्पादन का यूनिट होगा आपका मुनाफा भी उतना ही बढ़ता जाएगा. बड़े पैमाने पर इसकी खेती कर किसान करोड़पति भी बन सकते हैं.