Soil Health Card Scheme: देश में खेतिहर जमीनों की संख्या बेहद तेजी से घट रही है. इसका व्यापक असर फसलों के उत्पादन पर पड़ रहा है. खेती के लिए उपजाऊ जमीन की पहचान के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री सॉयल हेल्थ कार्ड योजना की शुरुआत की थी ताकि खेत की जरूरत के अनुसार उसे पोषक तत्व फसलों का उत्पादन बढ़ाया जा सके.
विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर हमें पहले से पता रहे कि मिट्टी को किन पोषक तत्वों की जरूरत है तो हम उसी हिसाब से फसल की देखभाल का प्लान करेंगे. इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी. बता दें कि पौधे के विकास के लिए कुल 17 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है. अधिक पैदावार और लाभ लेने के लिए उर्वरको का संतुलित मात्रा में प्रयोग करना बेहद जरूरी है. ऐसा ना करने पर खेती में नुकसान झेलना पड़ सकता है.
मिट्टी को कितने पोषक तत्वों की जरूरत
मिट्टी कि जांच से पता चलता है कि जमीन में कौन सा पोषक तत्त्व उचित, अधिक या कम मात्रा में है .यदि आप बिना मिट्टी जांच कराये पोषक डालते हैं तो संभव है कि खेत में आवश्यकता से अधिक या कम खाद डाल दी जाए. आवश्यकता से कम खाद डालने पर कम उपज मिलेगी तथा अधिक खाद डालने पर खाद का गलत उपयोग होगा और पैसा भी बेकार जायेगा साथ ही जमीन की उत्पादकता पर भी अगली बार से असर पड़ेगा. ऐसे में हर बार मिट्टी का नमूना फसल की बुवाई या रोपाई के एक महीने पहले ले लें.
नमूना लेते समय ये सावधानियां बरते
> खेत में ऊंची नीची जगह से नमूना डालें.
>मेढ़ , पानी की नाली एवम् कम्पोस्ट के ढेर के नजदीक से नमूना न लें.
>पेड़ की जड़ के पास से नमूना न लें.
> मिट्टी का नमूना खाद के बोरे या खाद की थैली में कभी न रखें.
> खड़ी फसल से नमूना न लें.
> ऐसे खेत जहा हाल ही में उर्वेरक का प्रयोग किया हो वहा से नमूना न लें.
मिट्टी का नमूना कहा भेजें ?
मिट्टी का नमूना लेने के बाद उसकी जांच हेतु आप स्थानीय कृषि पर्यवेक्षक या नजदीकी कृषि विभाग के दफ्तर में जमा करवा सकते हैं. आप भी अपने निकटतम मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में नमूना ले जाकर दे सकते हैं जहां इसकी जांच मुफ्त की जाती है. अतः किसान मिट्टी का परीक्षण जरूर करवायें और उसी के अनुसार उर्वरकों का संतुलित तरीके से प्रयोग करें.