तालाबों में उगने वाली सिंघाड़े की फसल को मिट्टी के खेतों में भी उन्नत कृषि तकनीक अपनाकर मुनाफा कमाया जा सकता है. निचले खेतों में पानी का भराव करके सिंघाड़े की खेती की जाती है. पानी की वजह से सिंघाड़े की फसल को आवारा मवेशियों द्वारा नुकसान पहुंचाने का खतरा भी कम होता है. ऐसे में सिंघाड़े की खेती से किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं.
सिंघाड़ा जून से दिसंबर के मध्य की फसल है. इसकी खेती के लिए लगभग एक से दो फीट तक पानी की आवश्यकता होती है. निचले खेतों में पानी का भराव करके सिंघाड़े की फसल आसानी से उगाई जा सकती है. जून में पौधे की रोपाई की जाती है और सिंघाड़े की पहली तुड़ाई सिंतबर के महीने में कर सकते हैं.
सिंघाड़े की बुवाई का सही समय
मॉनसून की बारिश के साथ ही सिघाड़े की बुवाई शुरू होती है. बरसात का मौसम शुरू होते ही जून-जुलाई में सिंघाड़ा बोया जाता है. आमतौर पर छोटे तालाबों, पोखरों में सिंघाड़े का बीच बोया जाता है लेकिन मिट्टी के खेतों में गड्ढे बनाकर उसमें पानी भरके भी पौधों की रोपाई की जाती है. जून से दिसंबर यानी 6 महीने की सिंघाड़े की फसल से बढ़िया मुनाफा कमाया जा सकता है.
1-2 फीट पानी में होती है सिघाड़े की खेती
उत्तर-प्रदेश के सहारनपुर जिले के नंदी फिरोजपुर गांव में रहने वाले किसान सेठपाल सिंह खेत में सिंघाड़े उगाते हैं. उनका कहना है कि सिंघाड़े की खेती ऐसी जगह पर की जाती है जहां कम से कम 1-2 फीट पानी जमा हो. सेठपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने तालाब की जगह अपने खेतों में सिंघाड़े की खेती की है, जो उनके लिए बड़ी उपलब्धि है, इससे उन्होंने अच्छा मुनाफा भी कमाया है.
सिंघाड़े की किस्में
सिंघाड़े की कई किस्में होती हैं. जिसमें लाल चिकनी गुलरी, लाल गठुआ, हरीरा गठुआ, कटीला किस्मों की पहली तुड़ाई पौधे की रोपाई के 120-130 दिन में होती है. जबकि करिया हरीरा की पहली तुड़ाई पौधे की रोपाई के कम से कम 150 दिन बाद होती है.
खेतों में कैसे उगाए जाते हैं सिंघाड़े?
सेठपाल सिंह ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने अपनी 1 एकड़ ज़मीन को सिंघाड़े की खेती के लिए तैयार किया. जिसनें खेत के चारों तरफ 2 से 3 फीट तक ऊंची मेंढ़ बनाई और फिर इसमें 1 फीट की ऊंचाई तक पानी भर दिया. जून के महीने में सिंघाड़े की रोपाई की और पौधों के बीच में 2 मीटर की दूरी रखी जिससे सिंघाड़े की बेल को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिले.
बाजार में सिंघाड़े की डिमांग
नवरात्रि शुरू होते ही सिंघाड़े की डिमांड तेजी से बढ़ती है. दरअसल, व्रतधारी सिंघाड़े का सेवन करने के साथ इसके आटे से बनने वाली कई चीजे खाते हैं. सिंघाड़े में प्रोटीन, शर्करा, कैल्शियम, फास्फोरस, मैगनीज, पोटेशियम, विटामिन सी, जिंक, कॉपर और आयरन उपलब्ध मात्रा में होते हैं.