मछली पालन में नई-नई तकनीकें आ गई हैं. किसानों के बीच मछली पालन की बायोफ्लॉक काफी लोकप्रिय हो रही है. इसके जरिए मछली पालकों को बढ़िया मुनाफा हासिल कर रहे हैं.
इस तकनीक में बायोफ्लॉक नामक एक बैक्टीरिया का इस्तेमाल होता है. सबसे पहले मछलियों को बड़े-बड़े टैंक में डाला जाता है. फिर मछलियों को खाना दिया जाता है.
इस तकनीक के माध्यम से मछलियों के मल को बायोफ्लॉक बैक्टीरिया प्रोटीन में बदलने का काम किया जाता है. इसे मछलियां खा जाती हैं. इससे मछलियां बेहद तेजी से विकास करती हैं.
बायोफ्लॉक बैक्टीरिया के चलते टैंक का पानी भी हमेसा साफ रहता है. मछलियों को किसी तरह की बीमारी भी नहीं होती है. पानी ज्यादातर समय साफ रहने के चलते पानी भी नहीं बदलता पड़ता है. इससे मछली पालकों को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है. साथ ही मछलियों के प्रोटीन पर मछली पालकों को अलग से खर्च नहीं करना पड़ता है.
बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन करना बेहद सस्ता है. यही वजह है कृषि विशेषज्ञ मछली पालकों को अक्सर बायोफ्लॉक तकनीक अपनाने की सलाह देते हैं.