scorecardresearch
 

SKM ने किसान नेता गुरनाम सिंह को किया सस्पेंड, मनोहर लाल खट्टर को बताया था पाकिस्तानी

ये फैसला किसान मोर्चा की मीटिंग में लिया गया. इस बात पर नाराजगी जाहिर की गई कि पिछले कुछ दिनों से लगातार गुरनाम सिंह द्वारा राजनीतिक बयान दिए जा रहे थे.

Advertisement
X
किसान नेता गुरनाम सिंह को किया गया सस्पेंड ( पीटीआई)
किसान नेता गुरनाम सिंह को किया गया सस्पेंड ( पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे किसान
  • पंजाब चुनाव को लेकर बड़ा बयान

किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने सात दिन के लिए सस्पेंड कर दिया है. ये फैसला किसान मोर्चा की मीटिंग में लिया गया. इस बात पर नाराजगी जाहिर की गई कि पिछले कुछ दिनों से लगातार गुरनाम सिंह द्वारा राजनीतिक बयान दिए जा रहे थे. किसान मोर्चा ने अपनी तरफ से साफ कर दिया कि किसानों का काम सिर्फ आंदोलन करना है, चुनाव से उनका कोई वास्ता नहीं.

Advertisement

बता दें कि गुरनाम सिंह की तरफ से कई मौकों पर विवादित बयान दिए गए थे. हाल ही में उन्होंने हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर को पाकिस्तानी बता दिया था. उनके उस बयान पर जमकर बवाल काटा गया था. कई संगठनों ने तो बकायदा गुरनाम सिंह के पुतले जलाए थे.

हरियाणा सरकार में गृह मंत्री अनिल विज ने भी इस बयान को शर्मनाक बता दिया था और किसानों के आंदोलन को हिंसक करार दिया था. इसके अलावा गुरनाम सिंह पर कई दूसरे किसान नेताओं को उकसाने के भी आरोप लगे हैं. उन्हीं गतिविधियों को देखते हुए अब उन्हें सात दिन के लिए सस्पेंड कर दिया गया है.

दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे किसान

अब क्योंकि गुरनाम को सस्पेंड कर दिया गया है, ऐसे में वे किसान मोर्चे के मंच का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे, वे किसान आंदोलन से जुड़े किसी मुद्दे पर कोई बयान भी नहीं दे पाएंगे. सात दिनों के लिए उन पर तमाम तरह की पाबंदियां लगा दी गई हैं. अब एक तरफ तो गुरनाम सिंह पर एक्शन लिया गया तो वहीं दूसरी तरफ किसानों ने अपने आंदोलन को और ज्यादा तेज करने की बात कही. जानकारी दी गई कि 22 जुलाई को तमाम किसान दिल्ली का रुख करने जा रहे हैं. कुल 200 किसान देश की राजधानी में विरोध प्रदर्शन करेंगे.

Advertisement

पंजाब चुनाव को लेकर बड़ा बयान

लेकिन इस बार जितने भी किसान दिल्ली जाएंगे, उनके आधार पहले से ही इकट्ठा किए जा रहे हैं. कोशिश की जा रही है कि तमाम किसानों का पूरा रिकॉर्ड मोर्चे के पास उपलब्ध रहे. वहीं पंजाब की 32 जत्थेबंदियों ने भी बड़ा फैसला लेते हुए साफ कर दिया है कि चुनाव के दौरान कोई भी किसान नेता पंजाब नहीं जाएगा, बल्कि बॉर्डरों पर रहकर आंदोलन को मजबूत किया जाएगा. किसानों की तरफ से तमाम विपक्षी दलों के नेताओं से भी खास अपील की गई है. कहा गया है कि तमाम सांसद संसद में किसानों का मुद्दा उठाएं, लेकिन वॉकआउट ना करें. सदन में रहकर उनके लिए लड़ाई लड़ी जाए.

Advertisement
Advertisement