संयुक्त किसान मोर्चा ने शुक्रवार को योगेंद्र यादव को एक महीने के लिए सस्पेंड कर दिया था. मृतक बीजेपी कार्यकर्ता शुभम मिश्रा के परिजनों से मुलाकात की वजह से उनके खिलाफ ये एक्शन लिया गया था. अब योगेंद्र यादव ने भी उस सस्पेंशन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अपनी मुलाकात को इंसानियत से जोड़ते हुए सही बताया है.
सस्पेंशन पर योगेंद्र यादव
उनकी नजरों में किसी मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना दिखाना गलत नहीं है और ये हमेशा से ही भारत की संस्कृति का हिस्सा रहा है. वे ये भी मानते हैं कि उनकी मुलाकात की वजह से ये किसान आंदोलन और ज्यादा मजबूत हुआ था.
लखीमपुर खीरी में चार शहीद किसानों और एक पत्रकार की श्रद्धांजलि सभा में भाग लेने के बाद मैं उसी घटना में मृतक बीजेपी कार्यकर्ता शुभम मिश्रा के घर गया था, उनकी शान में नहीं बल्कि उनके परिवार से शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए. अपने विरोधियों के भी दुख में शरीक होना इंसानियत और भारतीय संस्कृति के अनुरूप है. मेरी यह समझ रही है कि मानवीय संवेदना की सार्वजनिक अभिव्यक्ति से कोई भी आंदोलन कमजोर नहीं बल्कि मजबूत होता है. जाहिर है आंदोलन में हर साथी इस राय से सहमत नहीं हो सकता और मेरी उम्मीद है कि इस सवाल पर एक सार्थक संवाद शुरू हो सकेगा.
योगेंद्र ने क्या सफाई पेश की?
इस सब के अलावा योगेंद्र यादव ने इस बात को स्वीकार किया कि उन्हें अपनी मुलाकात के बारे में किसान नेताओं को पहले बताना चाहिए. अब क्योंकि उन्होंने ऐसा नहीं किया, ऐसे में उन्होंने अपने सस्पेंशन को भी खुले दिल से स्वीकार कर लिया है. उनका कहना है कि किसी भी आंदोलन में व्यक्तिगत समझ से ऊपर होती है सामूहिक राय. मुझे खेद है कि यह निर्णय लेने से पहले मैंने संयुक्त किसान मोर्चा के अन्य साथियों से बात नहीं की. मुझे इस बात का भी दुख और खेद है कि इस खबर से किसान आंदोलन में जुड़े अनेक साथियों को ठेस पहुंची. मैं संयुक्त किसान मोर्चा की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का सम्मान करता हूं और इस प्रक्रिया के तहत दी गई सजा को सहर्ष स्वीकार करता हूं. इस ऐतिहासिक किसान आंदोलन की सफलता के लिए मैं पहले से भी ज्यादा लगन से काम करता रहूंगा.