Gerbera Flower Farming: खेती-किसानी को लेकर किसान पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं. अब परंपरागत खेती से इतर वह नई फसलों को की खेती करने लगे हैं. सरकार की भी तरफ से किसानों को मुनाफे वाली फसलों की खेती के लिए समय-समय पर प्रोत्साहित किया जाता है.
जरबेरा के फूलों का उपयोग शादी समारोह में सजावट के लिए किया जाता है. इसके अलावा पत्तो का इस्तेमाल आयुर्वेदक औषिधियों में भी किया जाता है. यही वजह है बाजार में इस फूल की कीमतें ठीक-ठाक बनी रहती है. ऐसे में इसकी खेती कर किसान कुछ ही वक्त में लखपति बन सकता है.
जरबेरा के फूल की बुवाई शरद ऋतु, वसंत ऋतु और बरसात के मौसम में की जा सकती है. बीज दो सप्ताह में अंकुरित हो जाते हैं. इसका रोपण कटिंग विधि से भी किया जा सकता है.
इस फूल के लिए हल्की बलुई दोमट मिट्टी जिसमे जल निकासी अच्छी रहती है. ध्यान रखने की बात है कि जिस खेत में इस फूल के पौधों को लगाया जाना है, उसकी जलनिकासी की व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए.
जरबेरा के पौधों 6-8 घंटे सूरज की रोशनी की जरूरत होती है, इसे ऐसी जगह रखें जहां इसे भरपूर धूप मिले. धूप ना मिलने पर प्लांट की ग्रोथ पर इफेक्ट होता है. और पौधे में फूल आना कम हो जाता है. ऐसे में किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
जरबेरा के पौधों से पुराने फुलों को पोधो से काट कर अलग करते रहें. इस से प्लांट में नई ग्रोथ लगतार आती रहती है. किसान का मुनाफा दोगुना हो जाएगा.