Indoor Saffron Farming: केसर की खेती के बारे में सोचते ही दिमाग में सबसे पहला नाम कश्मीर का आता है. केसर के उत्पादन में कश्मीर का स्थान सबसे ऊपर है. हालांकि, अब धीरे-धीरे केसर की खेती अन्य प्रदेशों के किसानों ने भी करनी शुरू कर दी है. इसकी खेती के लिए जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर सबसे उपयुक्त माना जाता है.
केसर की फसल को तैयार होने में 3 से 4 महीने ही लगता है. अच्छी-खासी धूप में इसके फसल का विकास अच्छे से होता है. इसकी खेती में अम्लीय से तटस्थ, बजरी, दोमट और रेतीली मिट्टी का उपयोग किया जा सकता है. हालांकि, अब तमाम झंझटों और खर्चों से छुटकारा पाने के लिए किसानों ने केसर की इंडोर फार्मिंग तकनीक से खेती करनी शुरू कर दी है.
ऐसे करें केसर की इंडोर फार्मिंग
केसर की इंडोर फार्मिंग के लिए एक अंधेरे बंद कमरे की जरूरत होती है. कमरे में रोशनी बिल्कुल भी नहीं पहुंचनी चाहिए, रोशनी पहुंचने से केसर के खराब होने की संभावनाएं ज्यादा बनी रहती है. इंडोर फार्मिंग के लिए केसर के कार्म को लगभग 3 माह तक बंद अंधेरे कमरे में रखा जाता है. फिर केसर कटाई के लिए तैयार हो जाती है. इसके लिए कमरे का तापमान तकरीबन 20 डिग्री रखें.
इंडोर फार्मिंग कैसे फायदेमंद
केसर की इंडोर फार्मिंग किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है. एक कमरे में अगर आप केसर की खेती कर रहे हैं तो समय, श्रम और पैसे तीनों की बचत होगी. साथ ही फसल पर मौसम की मार भी नहीं पड़ेगी. ऐसे में किसान का मुनाफा अपने लागत के मुकाबले कई गुना ज्यादा हो जाएगा. केसर की शुष्क कुक्षियों को केसर कुंकुम, जाफरान अथवा सैफ्रन कहते हैं.
मार्केट में एक किलो केसर 3 लाख रुपये तक बिक रही है. ऐसे में अगर आप प्रत्येक माह 2 किलो केसर बेचें तो भी आप महीने में आराम से 6 लाख रुपये तक कमा सकते. इसे आप किसी भी नजदीकी मंडी में या ऑनलाइन भी बेच सकते हैं.