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Success Story: मशीनों से नहीं... कोल्हू से तेल निकालता है ये किसान, विदेश से भी मिल रहे ऑर्डर

करनाल के गांव खानपुर के रहने वाले पुष्पिंदर ने अपनी प्राचीन धरोहर को संभालते हुए एक नया आयाम स्थापित किया. पुष्पिंदर कोल्हू लगाकर अपने ही खेतों में विभिन्न प्रकार के तेल तैयार कर पूरे भारत समेत कई देशों में बेच रहे हैं.

Farmer extracting oil by crusher Farmer extracting oil by crusher
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क
  • करनाल,
  • 30 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 8:33 AM IST

आधुनिकता के इस दौर में जहां आज का युवा अपनी प्राचीन धरोहर व विरासत को भूलता जा रहा है और विदेशों की ओर रुख कर रहा है. वहीं करनाल के गांव खानपुर के एक युवा ने अपनी इस प्राचीन धरोहर को संजोकर रखा और एक मिसाल कायम कर दी. खानपुर निवासी पुषपिंदर ने कच्ची घानी के चार कोल्हू लगाकर अपने ही खेतों में विभिन्न प्रकार के तेल बनाने का एक कुटीर उद्योग स्थापित किया है. आज उनके उत्पाद के केवल भारत में ही नहीं बल्कि कई देशों में भी ग्राहक बन गए हैं. उनके उद्योग में प्राचीन विधि से तेल को तैयार किया जाता है.

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चार साल पहले शुरू किया तेल उत्पादन

इस बारे में जानकारी देते हुए पुषपिंदर ने बताया कि लगभग चार साल पहले उन्होंने इस तेल उत्पादन के काम को शुरू किया था. शुरुआत एक कोल्हू से की गई थी और आज चार कोल्हू हो गए हैं. उन्होंने बताया कि वो भारत की प्राचीन धरोहर को संभाले हुए हैं और असली कच्ची घानी की विधि से तेल को तैयार करते हैं. वो सरसों, अलसी, मूंगफली, बादाम व कुसुम इत्यादि कई प्रकार के तेल इस विधि से तैयार करते हैं. उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में जैसे बैलों की मदद से कोल्हू को चलाया जाता था और तेल निकाला जाता था, बिल्कुल उसी विधि से इन तेलों को तैयार किया जा रहा है. 

एक दिन में पांच से सात लीटर तेल का उत्पादन

एक दिन में पांच से सात लीटर तेल ही बनता है. इससे वो लाखों रुपये का मुनाफा भी कमा रहे हैं. इन तेलों की कीमत 500 रुपये लीटर सरसों के तेल से लेकर ₹3000 किलो बादाम के तेल तक है. इस विधि से तैयार तेल बिलकुल शुद्ध होता है. नीम व कीकर की लकड़ी से तैयार कोल्हू मशीन में तैयार होने वाला तेल बूंद बूंद कर बाहर निकलता है, जिससे इसमें नीम व कीकर के गुण भी शामिल हो जाते हैं. हमारे पुराने बुजुर्ग इसी विधि से तैयार तेल का प्रयोग करते थे और स्वस्थ रहते थे.

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केवल कांच की बोतल में ही पैक होता है तेल

उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में बाजार में कच्ची घानी का केवल नाम ही लिया जाता है जबकि वो तेल मशीनों में ही तैयार हो रहा है. हम कच्ची घानी से तैयार तेल को छानकर कुछ दिनों के लिए खुले बर्तन में रखते हैं और दो तीन दिनों के बाद उसको अच्छी तरह से छानकर ही बोतलों में पैक करते हैं. उन्होंने बताया कि हम केवल कांच की बोतल में ही तेल को पैक करते हैं. पर्यावरण का ख्याल रखते हुए प्लास्टिक का कोई प्रयोग नहीं करते हैं. पुषपिंदर ने बताया कि शुरूआत में उनको काफी दिक्क्तें आईं लेकिन आज उनके तेल की बाजार में बहुत मांग है और उनके पास ऑनलाइन आर्डर आते रहते हैं.

उन्होंने कहा कि यदि नेक नीयत से किसी भी सामान को तैयार किया जाए तो उसकी बाजार में बिक्री करने में कोई दिक्कत नहीं होती है. उन्होंने कहा कि अब तक कई लोग उनसे इस विधि की पूरी जानकारी लेकर अपना काम कर रहे हैं. यदि कोई भी युवा कुछ नया करना चाहता है और मेरे इस काम को करना चाहता है तो वो उसकी पूरी मदद करेंगे. पुषपिंदर ने कहा कि आने वाले समय में वो अपने खेतों में एक गौशाला भी बनाने जा रहे हैं.

इनपुट-कमलदीप

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