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इंजीनियरिंग छात्र ने महाराष्ट्र में उगाया 1000 रुपये प्रति किलो बिकने वाला केसर, अपनाया ये तरीका

नंदुरबार के हर्ष मनीष पाटिल नाम के एक इंजीनियरिंग छात्र ने इस फार्म की शुरुआत की है. भारत का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की ठंडी हवा वाले क्षेत्र और जलवायु से उत्पन्न होने वाली यह फसल अब महाराष्ट्र जैसे गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में भी उगने लगी है. कृषि क्षेत्र में यह अनोखा प्रयोग व्यापक रूप से देखा गया है.

Kesar ki kheti Kesar ki kheti
aajtak.in
  • नंदुरबार ,
  • 17 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 6:46 PM IST

अब तक केसर की खेती के लिए सिर्फ कश्मीर ही जाना जाता है. हालांकि, इसकी खेती अब महाराष्ट्र जैसे गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में भी होने लगी है. महाराष्ट्र के नंदुरबार जैसे गर्म वातावरण वाले इलाके में एक कंप्यूटर इंजीनियरिग के छात्र ने टेक्नोलॉजी के सहारे केसर उगाने में सफलता हासिल की है. 

केसर की खेती के लिए टेक्नोलॉजी का लिया सहारा

महाराष्ट्र के नंदुरबार के रहने वाले हर्ष मनीष पाटिल एक इंजीनियरिंग छात्र हैं. वह डी.वाई पाटिल कॉलेज में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहे हैं .उन्होंने कृषि को अपने पिता की पारंपरिक खेती से अलग पैसा कमाने के विकल्प के तौर पर विकसित करने को सोचा. उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया. इसके लिए उन्होंने टेक्नोलॉजी का सहारा लिया.

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15 बाय 15 के कमरे में केसर की खेती

केसर की खेती के लिए ठंडी जलवायु आवश्यक है. इसके लिए इस युवा किसान ने लगभग 15 बाय 15 के कमरे में अपना सेटअप तैयार किया. कमरे में एसी की व्यवस्था की. फिर कश्मीर के पंपोर से मोगरा किस्म का केसर लेकर आएं. केसर की खेती के अनुकुल वातावरण बनाने के लिए उन्होंने पूरे कमरे में थर्माकोल चिपका दिया. इससे मोगरा केसर के उगने के लिए एक पूरक वातावरण तैयार हुआ. बता दें मोगरा केसर लगभग 1000 रुपये प्रति किलो है.

प्रथम चरण में तीन सौ ग्राम केसर

इस सारे प्रयोग को करने में हर्ष ने करीब पांच लाख रुपये खर्च किए. बता दें कि एक केसर का बीज बोया जाता है तो उसमें तीन से चार केसर पैदा होते हैं. इसका एक कंद लगभग आठ से दस साल तक पैदा किया जा सकता है. यह प्रयोग करीब ढाई से तीन माह से सफलतापूर्वक चल रहा है, फिलहाल बीज में फूल आ गया है और केसर खिल गया है. पहले चरण में तीन सौ ग्राम केसर का उत्पादन  होने की संभावना है.

रिपोर्ट: रोहिणी विशाल ठाकुर

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