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प्याज के गिरते रेट से परेशान था किसान, मुफ्त में लोगों के बीच बांट दी अपनी उपज

मध्य प्रदेश में प्याज के गिरते रेट से किसान परेशान हैं. मंडियों में किसानों को कोई भी व्यापारी प्रति किलो प्याज पर 2 रुपये भी देने को तैयार नहीं है. ऐसे में परेशान होकर खरगोन जिले के एक किसान ने अपनी फसल फ्री में ही लोगों की बीच बांट दी.

प्याज के गिरते रेट से परेशान किसान प्याज के गिरते रेट से परेशान किसान
जय नागड़ा
  • नई दिल्ली,
  • 24 मई 2023,
  • अपडेटेड 6:00 PM IST

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में बड़े पैमाने पर प्याज की खेती की जाती है. इस बार भी यहां प्याज की बढ़िया फसल हुई थी. हालांकि, प्याज के रेट मार्केट में इस कदर गिरे हैं कि किसान लागत तो दूर मजदूरी भी नहीं निकाल पा रहे हैं. राज्य के कई मंडियों में प्याज सिर्फ 2 से 3 रुपये किलो ही बिक रहा है. 

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मुफ्त में बांट दी पूरी उपज

पिछले दिनों जिले के भेरूखेड़ा गांव से प्याज की फसल लेकर मंडी आए थे. रेट सुनकर ही उनका मन बेचैन हो गया. मंडी में दो से तीन रूपये किलो से ज्यादा में कोई प्याज खरीदने को कोई तैयार नहीं था. ऐसे में उन्होंने अपनी पूरी उपज को खरगोन नगर निगम के चौराहे पर रखकर मुफ्त में बांट दिया.

बाकी बचे प्याज को भी फ्री में बांटने का किया ऐलान

किसान घनश्याम ने बताया कि 82 कट्टे प्याज मंडी में लेकर आया था, पूरी उपज पर सिर्फ 100 रुपये ही मिल रहे थे. ऐसे में मैंने 25 कट्टा प्याज ऐसे ही बांट दिया. बाकी प्याज भी फ्री में ही लोगों के बीच बांट दूंगा. एक एकड़ के प्याज की खेती में 70 से 80 हजार रुपये की लागत आई थी. अभी तक एक भी रुपये का प्याज नहीं बेच पाया हूं.  

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जानवरों के सामने डाल दी प्याज की फसल

हाल ही में खरगोन जिले से ही कई किसानों ने प्याज के गिरते हुए रेट से परेशान होकर अपनी फसल जानवरों के सामने डाल दी. वहीं, धार जिले में एक किसान ने अपनी कई एकड़ फसल पर ट्रैक्टर चला दिया है. किसानों का कहना है प्याज को मंडी में ले जाने पर उनकी लागत में और इजाफा हो रहा है. ऐसे में फसल को नष्ट कर देना ही उनके पास आखिरी उपाय बचा हुआ है.

प्याज उत्पादक किसानों पर पड़ी थी मौसम की मार

किसानों का कहना है कि बेमौसम बारिश के कारण प्याज को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था. ऐसे में वे लगातार सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे थे. हालांकि, अभी तक सरकार की तरफ से किसानों को कोई राहत नहीं मिली है. फिलहाल बर्बाद फसल पर मुआवजा मिलना चाहिए थे, बीमा कंपनियां भी कहीं नजर नहीं आ रही हैं.

 

 

 

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