
किसान अब पारंपरिक खेती के अलावा नई फसलों की खेती कर रहे हैं. लैवेंडर के फूलों की बाजार में अच्छी मांग है, साथ ही इन्हें अच्छे मुनाफे पर बेचा जा रहा है. लैवेंडर (Lavender Crop) की खुशबू मन को तो सुकून देती ही है साथ ही लैवेंडर औषधीय और कॉस्मेटिक उत्पादों में भी इस्तेमाल किया जाता है. कश्मीर की महिला शाहीन शादाब ने दक्षिण कश्मीर के पुलवामा गांव में एक सेब के बाग में लैवेंडर के फूल उगाने का नया तरीका खोजा है.
दरअसल, महिला के पास लगभग 50 एकड़ सेब का बाग है और महिला ने सेब के पौधों के बीच की खाली जगह में लैवेंडर की फसल की खेती शुरू की है. ये जगह वैसे भी किसान खाली छोड़ देते हैं. इस जगह का इस्तेमाल कर महिला ने यहां लैवेंडर की खेती शुरू कर दी है. बता दें कि शाहीन वर्ष 2014 से लैवेंडर की खेती कर रही हैं. अपने इस तरीके से महिला संतुष्ट होने के साथ ही कई गुना अधिक कमाई भी कर रही हैं. अब इस क्षेत्र के बाकी किसान भी अपनी आय बढ़ाने के लिए खेती की उसी तकनीक को अपना रहे हैं.
बता दें कि केंद्र सरकार की संस्था CSIR एरोमा मिशन के तहत लैवेंडर की खेती को बढ़ावा दे रही है. इसकी खेती का तरीका वैसा ही है, जैसा लेमनग्रास के लिए इस्तेमाल किया जाता है. मध्य गर्म वातावरण में इसे लगाया जाता है. इसे लगाने के पांच से छह महीने बाद इसकी कटाई की जाती है.
इसकी खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी की जरूरत होती है. साथ ही इस मिट्टी का पीएच 5.8 और 8.3 के बीच का होना चाहिए. गौरतलब है कि लेमनग्रास की ही तरह लैवेंडर का भी तेल निकाला जाता है. इसलिए यह बाजार भी आपको आसानी से मिल जाता है.