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पशु मेले के मिल्किंग कॉम्पिटिशन में होगा गाय-भैंस का डोप टेस्ट, जानें कहां और कैसे करवाएं

प्रोग्रेसिव डेयरी फार्मर एसोसिएशन (PDFA) की तरफ से लुधियाना के गुरु अंगद देव वेटरनरी और एनीमल साइंस यूनिवर्सिटी (Gadvasu) में गाय-भैंस का डोप टेस्ट किया जाएगा. वहीं, टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने वाले पशुओं को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया जाएगा.

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आजतक एग्रीकल्चर डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 20 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 2:07 PM IST

ओलंपिक और खेल प्रतियोगिताओं में आपने डोप टेस्ट के बारे में सुना होगा. दरअसल, हर प्रतियोगिता से पहले खिलाड़ियों का डोप टेस्ट किया जाता है. उनका ब्लड सैम्पल लेकर ये देखा जाता है कि खि‍लाड़ी ने कोई शक्तिवर्धक दवाई तो नहीं ली है. लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि अब गाय-भैंस का भी डोप टेस्ट किया जाएगा और ये डोप टेस्ट गाय-भैंस के मिल्किंकग कॉम्पिटिशन में किया जाएगा. 

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प्रोग्रेसिव डेयरी फार्मर एसोसिएशन (PDFA) ने डोप टेस्ट की शुरुआत की है. बीते साल भी कुछ पशुओं का डोप टेस्ट कराया गया था. ऐसा आरोप है कि कुछ पशुपालक गाय-भैंस से ज्यादा दूध लेने के लिए कुछ ऐसी दवाई देते हैं जो देश में बैन हैं और पशुओं के लिए नुकसानदायक भी है. देश में ये टेस्ट गुरु अंगद देव वेटरनरी और एनीमल साइंस यूनिवर्सिटी (GADVASU), लुधियाना में हो रहा है. एथलीट की तरह से यहां भी पशु का ब्लड सैम्पल लिया जाता है. 

बता दें कि पीडीएफए की ओर से हर साल लुधियाना-फिरोजपुर हाइवे पर जगरांव में पशु मेला आयोजित किया जाता है. मेले के दौरान 50 लीटर तक दूध देने वाली गाय से लेकर 28 लीटर दूध देने वाली भैंस मिल्किंलग कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने आती हैं. 

डोप टेस्ट में क्या किया जाता है

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गडवासु के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. इंद्रजीत सिंह ने बताया कि कुछ पशुपालक प्रतियोगिताओं के दौरान या उससे पहले गाय-भैंस को सिंथेटिक ग्रोथ हॉर्मोन का टीका लगवाते हैं. टीका लगवाने के बाद होता ये है कि जो गाय-भैंस 20 लीटर दूध दे रही है वो टीके के बाद 30 से 35 लीटर तक दूध देने लगती है. इसी की जांच करने के लिए ये डोप टेस्ट शुरू किया गया है. टेस्टिंग के लिए पशु का ब्लड और दूध का सैम्पल लिया जाता है. गडवासु के बॉयो टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट ने इसकी जांच का तरीका खोजा है. 2023 में पीडीएफए के प्रेसिडेंट की डिमांड पर पहली बार ये टेस्ट किया गया था. 

भारत में बैन है डोप टेस्ट

डॉ. इन्द्रजीत सिंह ने बताया कि अमेरिका, कनाडा, ब्राजील और पाकिस्ता‍न में ज्यादा दूध लेने के लिए धड़ल्ले से पशुओं को ये टीका दिया जा रहा है. लेकिन हमारे देश में इसकी मंजूरी नहीं है. भारत में भी साल 2010 से 2013 के बीच इसका टेस्ट किया गया था. मैंने खुद कुछ भैंसों पर इसका ट्रॉयल किया था, लेकिन भारत सरकार ने इसकी मंजूरी नहीं दी थी. तब से कुछ लोग चोरी-छिपे इसे देश में लाते हैं और पशु पालकों को बेचते हैं.

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