मुंबई ट्रैफिक पुलिस (Mumbai Traffic Polic) ने शुक्रवार को मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के आधार पर एक आदेश जारी किया है. आदेश में कहा गया है कि एक नवंबर से कार में बैठने वाले सभी पैसेंजर को सीट बेल्ट लगाना जरूरी होगा. मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने इस नियम को अनिवार्य कर दिया है. इसका मतलब ये है कि कार की पीछे वाली सीट पर भी पैसेंजर को सीट बेल्ट लगानी होगी.
पिछले महीने एक सड़क दुर्घटना में टाटा संस के पूर्व अध्यक्ष साइरस मिस्त्री की हुई मौत के बाद से ही सीट बेल्ट के इस्तेमाल को लेकर चर्चा चल रही थी. इस सड़क दुर्घटना ने सीट बेल्ट की अहमियत पर सभी का ध्यान खींचा था. मिस्त्री कार की पिछली सीट पर बैठे थे और उन्होंने सीट बेल्ट नहीं लगा रखी थी.
मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने कहा है कि एक नवंबर के बाद से उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी, जिनके वाहनों में आगे और पीछे की सीटों पर सीट बेल्ट मौजूद नहीं हैं. दरअसल सेफ कार की यात्रा का पहला अहम पड़ाव ही सीट बेल्ट है. आपको ये जानकर भी हैरानी हो सकती है कि सीट बेल्ट का पहला डिजाइन कारों के लिए तैयार ही नहीं हुआ था.
सीट बेल्ट के अविष्कार का श्रेय जाता है सर जॉर्ज कैली (Sir George Cayley) को. उन्होंने 1800 के आस-पास अपने ग्लाइडर (Glider) के लिए सीट बेल्ट का डिजाइन किया था. कारों के लिए पहला सीट बेल्ट अमेरिकी अविष्कारक एडवर्ड क्लैगहॉर्न (Edward Claghorn) ने तैयार किया था. उन्होंने 1885 में इसका डिजाइन तैयार किया और न्यूयॉर्क की टैक्सियों में इसके इस्तेमाल की शुरुआत हुई.
सीट बेल्ट के शुरुआती डिजाइन बहुत ज्यादा सेफ्टी नहीं प्रदान कर पाते थे. इस दिशा में बड़ी सफलता हाथ लगी साल 1946 में, जब डॉ. सी हंटर शेलडन (Dr. C Hunter Shelden) ने रीट्रैक्टेबल सीट बेल्ट (Retractable Seat Belt) तैयार किया. इसके बाद सीट बेल्टों की लोकप्रियता बढ़ी और 1950 के आस-पास लगभग सभी रेसिंग कारों में इसका इस्तेमाल होने लगा.
1950 के दशक में ही पहली बार कार कंपनियों ने अपनी ओर से सीट बेल्ट लगाकर देने की शुरुआत की. इस सिलसिले में नैश (Nash) और फोर्ड (Ford) अव्वल निकलीं. ये दोनों कंपनियां ऑप्शनल सीट बेल्ट देने लगीं, जिसके लिए ग्राहकों को अतिरिक्त पैसे देने पड़ते थे. हालांकि ज्यादातर लोग बिना सीट बेल्ट वाला ऑप्शन ही सलेक्ट करने होते थे.
आधुनिक सीट बेल्ट का डिजाइन साल 1955 में तैयार हुआ. इसे अमेरिका के रोजर डब्ल्यू ग्रिसवोल्ड (Roger W Griswold) और ह्यूग डीहैवेन (Hugh DeHaven) डिजाइन किया था. इसमें स्वीडन के नील्स बोहलिन ने सुधार किया. उन्हें वॉल्वो (Volvo) ने अपना चीफ सेफ्टी इंजीनियर बना लिया था. वॉल्वो के तत्कालीन सीईओ के एक रिश्तेदार की मौत सड़क दुर्घटना में हो गई थी. उस घटना के बाद वॉल्वो ने अपनी कारों में सीट बेल्ट को अनिवार्य बना दिया.