पिछले दो महीने यानी सितंबर और अक्टूबर के दौरान वाहनों की बिक्री में सुधार देखने को मिला है, जिससे ऑटो सेक्टर के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद जगी है. भारतीय ऑटो इंडस्ट्रीज में इस समय वी-आकार का सुधार दिख रहा है. वहीं सितंबर महीने में यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री भी सालाना आधार पर 9.81 प्रतिशत बढ़कर 1,95,665 यूनिट्स पर पहुंच गई.
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स असोसिएशन के मुताबिक इस साल सितंबर में कुल 1,95,665 यात्री वाहनों की बिक्री हुई. जबकि एक साल पहले यानी सितंबर- 2019 में कुल 1,78,189 यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री हुई थी. हालांकि कुल वाहनों की बिक्री सितंबर में 10.24 फीसदी गिरकर 13,44,866 यूनिट्स पर आ गई. साल भर पहले समान माह में कुल 14,98,283 वाहनों की बिक्री हुई थी.
होंडा कार्स इंडिया लिमिटेड (एचसीआईएल) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और निदेशक (विपणन और बिक्री) राजेश गोयल ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते लोग निजी वाहन को तरजीह दे रहे हैं. इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में मांग बढ़ने से ऑटो क्षेत्र में कुछ सुधार देखने को मिला है, लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या यह रुझान लंबे समय तक चलेगा.
राजेश गोयल का कहना है कि भारतीय ऑटो उद्योग में इस समय वी-आकार का सुधार दिख रहा है, लेकिन इसकी स्थिरता अक्टूबर और नवंबर के बिक्री आंकड़ों पर निर्भर करेगी. V-Shape से रिकवरी का मतलब होता है कि अर्थव्यवस्था एकदम से किसी आपदा के कारण नीचे जाती है. उसके बाद उतनी ही तेजी से वापस उभरती है.
उन्होंने कहा कि ऑटो उद्योग में कई लोगों ने 'सतर्क आशावाद' शब्द का इस्तेमाल किया है, जिससे मैं सहमत हूं. अगर आप वक्र देखें तो भारतीय ऑटो उद्योग ने वी-आकार का सुधार दिख रहा है. उन्होंने कहा कि अक्टूबर और नवंबर के आंकड़ों पर निर्भर करेगा कि यह टिकने वाला है या नहीं.
गोयल ने कहा कि सितंबर में थोक मांग तो तेजी से बढ़ी है, लेकिन खुदरा मांग में उस अनुपात में बढ़ोतरी नहीं देखी गई और ऑटो उद्योग ने त्योहारी मौसम में मांग को पूरा करने के लिए स्टॉक किया है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी पैकेज के साथ ही अच्छे मानसून और रबी की अच्छी फसल के चलते मांग में सुधार हुआ है.