
कभी-कभी दो लोगों के बीच हुई एक छोटी सी मुलाकात और बातचीत न केवल व्यक्तिगत जिंदगी बल्कि पूरे समाज को बदलने का मद्दा रखती है. कई बार तो मुलाकातों के दौरान लिए गए फैसले इतने बड़े साबित होते हैं कि एक नए 'दिग्गज़' का जन्म भी होता है. ऐसा कहा जाता है कि, कुछ ऐसी ही बातचीत 1960 के दशक की शुरुआत में (संभवत: 1962) उत्तरी इटली के मरानेल्लो (Maranello) कस्बे में ऑटो सेक्टर के दो दिग्गज़ फेरुशियो लेम्बोर्गिनी और एंजो फेरारी के बीच भी हुई थी. कार के क्लच सिस्टम में आई ख़राबी को लेकर हुए इस वार्तालाप का नतीजा ये रहा कि, उस वक्त ट्रैक्टर बनाने वाली ब्रांड लेम्बोर्गिनी ने अचानक स्पोर्ट कार बनाने का फैसला ले लिया.
दरअसल, मशहूर कार ब्रांड लेम्बोर्गिनी के फाउंडर फेरुशियो लेम्बोर्गिनी (Ferruccio Lamborghini) 1960 के दशक से पहले ट्रैक्टरों के निर्माण के लिए जाने जाते थें. व्हीकल इंडस्ट्री में होने के साथ-साथ उन्हें पावरफुल स्पोर्ट कारों का भी खूब शौक था. उस दौर में दुनिया भर में फेरारी की स्पोर्ट कारों का खूब चलन था और फेरारी की कारें अपने पावरफुल इंजन, स्पीड और फरफॉर्मेंस के लिए जानी जाती थी. फेरुशियो भी फेरारी की चमक के फैन थें और उनके पास फेरारी की दो कारें थीं.
आपको फेरारी चलानी नहीं आती:
कहा जाता है कि, फेरुशियो अपनी फेरारी कारों के परफॉर्मेंस से खुश नहीं थें और इस बात से उन्हें परेशानी थी. इसी बात को लेकर उन्होनें फेरारी के फाउंडर एंजो फेरारी (Enzo Ferrari) से मिलने का मन बनाया. बताया जाता है कि, जब दोनों की मुलाकात हुई तो फेरुशियो ने एंजो से उनकी कार के क्लच में आने वाली खराबी के बारे में बताया. उन्होनें कहा कि, "क्लच में बदलाव की जरूरत है." इस बारे में फेरुशियो के बेटे टोनिनो लेम्बोर्गिनी कहते हैं कि, इस बात से एंजो फेरारी नाराज हो गएं और उन्होनें गुस्से में कहा कि, "आप मेरी कार नहीं चला सकते हैं, आप अपने ट्रैक्टर ही चलाएं" वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया जाता है कि, फेरारी ने फेरुशियो से कहा था कि, "समस्या क्लच में नहीं है बल्कि समस्या ये है कि, आप फेरारी कार चलाना नहीं जानते और आप क्लच तोड़ देते हैं. बेहतर होगा आप ट्रैक्टर चलाएं और मुझे कार बनाने दें."
एंज़ो की इस बात के जवाब में फेरुशियो ने जो कुछ भी कहा वो न केवल सहज था बल्कि फेरारी के लिए किसी चुनौती से भी कम नहीं था. फेरुशियो ने जवाब देते हुए कहा कि, "मैं फिर कभी आपकी कार नहीं खरीदूंगा. अब से मैं अपनी खुद की कारें बनाऊंगा, फिर मुझे यकीन हो जाएगा कि वे वैसे ही काम करती हैं जैसे मैं चाहता हूं." कहा जाता है कि, इस बातचीत के ठीक एक साल बाद फेरुशियो ने सेंट अगाटा बोलोग्नीज़ में लेम्बोर्गिनी कंपनी की स्थापना की, और अब तक इटली की खेतों में दौड़ने वाली लेम्बोर्गिनी अब स्पोर्ट कार मार्केट में एंट्री करने को तैयार थी.
फेरुशियो ने देर न करते हुए तुरंत अपनी योजनाओं पर काम करना शुरू कर दिया. केवल चार महीनों के भीतर ही सेंट अगाटा बोलोग्नीज़ में एक छोटा कारखाना बनाया गया जिसमें लेम्बोर्गिनी ने अपनी पहली कार का मॉडल तैयार किया. इस कार को 1964 में ट्यूरिन के वार्षिक कार शो में प्रस्तुत किया गया था और इसे लेम्बोर्गिनी 350 जीटी (Lamborghini 350 GT) नाम दिया गया.
4 महीने में कैसे बनी कार:
जब कुछ बड़ा होने वाला होता है तो उसकी प्रक्रिया काफी पहले शुरू हो जाती है और लेम्बोर्गिनी के साथ भी ऐसा ही हो रहा था. इसके लिए आपको थोड़ा फ़्लैशबैक में जाने की जरूरत है, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब फेरुशियो ने अपनी पहली कार बनाने का फैसला किया उसके तकरीबन दो साल पहले मरानेल्लो स्थित फेरारी के ऑफिस में एक बड़ी घटना हुई थी. एंज़ो फेरारी अपने ऑफिस में थें और उस दिन पांच सज्जनों ने उनके दफ्तर में कदम रखा, जिनमें मशहूर चीफ इंजीनियर कार्लो चिती, लिजेंडरी ऑटोमोबाइल इंजीनियर और कार डिज़ाइनर गियोटो बिज़ारिनी (Giotto Bizzarrini) शामिल थें.
बताया जाता है कि, ये सभी लोग एंज़ो फेरारी की पत्नी लौरा फेरारी से नाखुश थें, क्योंकि वो फैक्ट्री फ्लोर पर बड़े फैसले ले रही थीं. वो चाहते थें कि, लौरा को ऐसा करने से रोका जाए और उन्हें प्रोडक्शन के मामलों में हस्तक्षेप न करने की सलाह दी जाए. इस बात ये एंज़ो नाराज हो गए और उन्होनें अपनी पत्नी को कुछ कहने के बजाय इन पाचों व्यक्तियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निकाल दिया. एंज़ो के इस फैसले के बाद इन पांचों ने बोलोग्ना में रेसिंग और स्पोर्ट्स कारों के लिए एक डिजाइन एजेंसी ATS नामक एक नई कंपनी की शुरुआत की.
जब फेरारी ने लेम्बोर्गिनी से कहा था कि वह ट्रैक्टरों का ही निर्माण करें और उन्हें फेरारी कारों को बेहतर बनाने के बारे में कोई सुझाव देने की कोशिश न करे, तो फेरुशियो लेम्बोर्गिनी ने इन पांच सज्जनों से संपर्क किया. अब समय तेजी से करवट ले रहा था और फेरारी के पांच पूर्व प्रमुख लोग, बहुत जल्द ही लेम्बोर्गिनी के लिए एक नई स्पोर्ट कार बनाने जा रहे थें.
फेरुशियो ने इन इंजीनियर्स अपने पहली कार के बारे में दिशा निर्देश दिएं. दरअसल, फेरुशियो एक ऐसी कार बनाना चाहते थें जो पावर और परफॉर्मेंस में फेरारी से बेहतर हो और उन्होनें वैसी ही कार बनाने की तैयारी शुरू की. हालांकि कार निर्माण की प्रक्रिया इतनी आसान भी नहीं थी, जब इस कार के मॉडल को ट्यूरिन कार शो में पेश किया गया था, उस वक्त कंपनी ने केवल कार का चेचिस और इसके सेंटर में इंजन को दिखाया था. जिसके बाद मशहूर कार डिज़ाइन न्युसियो बर्टोन (Nuccio Bertone) ने इस कार के बॉडी को डिज़ाइन करने की मंशा जाहिर की. इसके लिए न्युसियो ने फेरुशियो से मुलाकात की और कहा कि, "वो इस कार को ड्रेस करना चाहते हैं." और फेरुशियो ने उन्हें अनुमति दे दी.
ग्राहकों तक कभी नहीं पहुंची पहली कार:
आपको ये जानकार थोड़ी हैरानी होगी कि लेम्बोर्गिनी ने जो अपनी पहली कार बनाई थी, वो कभी ग्राहकों तक पहुंच ही नहीं सकी थी. दरअसल, 350 GT कंपनी की पहली कार नहीं थी, बल्कि इस सम्मान का हक 350 GTV के पास सुरक्षित है. ये एक प्रोटोटाइप था जो कि प्रोडक्शन लेवल तक नहीं पहुंचा और जिस 350 जीटी को कंपनी ने पेश किया वो इसी पर बेस्ड थी. साल 1964 के मई महीने में कंपनी ने अपने असेंबली लाइन से पहली लेम्बोर्गिनी 350 जीटी को रोल आउट किया. बताया जाता है कि, इस कार के लॉन्च होते ही 13 ग्राहकों ने इसे तत्काल खरीद लिया था. हालांकि साल 1966 तक आते-आते कंपनी ने इस कार के केवल 120 यूनिट्स का ही निर्माण किया, बाद में इसे 400 GT ने रिप्लेस किया था.
फेरारी को लगा झटका:
लेम्बोर्गिनी 350 जीटी एक धीमी और सहज शुरुआत थी, हालांकि इस कार ने फेरारी पर कोई ख़ास असर नहीं डाला. लेकिन साल 1965 में फिर से ट्यूरिन में लेम्बोर्गिनी ने एक नई कार पेश की, अब चीजें बिल्कुल अलग हो गईं थीं. इस शो में उस कार को पेश किया गया जिसने उस दौर की दिग्गज़ स्पोर्ट कार कंपनियों फेरारी और मासेराती (Maserati) के माथे पर बल ला दिया.
फार्मूला वन (F1) से प्रेरित इस कार के इंजन पोजिशन पर इंजीनियरों ने एक बड़ा बदलाव करते हुए इसे ड्राइवर के पीछे कर दिया. ये पहली ऐसी स्पोर्ट कार थी, जिसमें इंजन को कार के बीच में रखा गया था और इसे कंपनी ने Lamborghini Miura नाम दिया. ट्यूरिन शो में पेश होते ही इस कार ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं और इस कार ने सही मायनो में लेम्बोर्गिनी को एक बेहतर स्पोर्ट कार निर्माता के तौर पर स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई. आखिरकार, फेरुशियो ने उस कार का निर्माण कर लिया था, जो फेरारी को टक्कर देने जा रही थी. ये फेरुशियो की जिद ही थी, जिसने तेज रफ़्तार घोड़े (फेरारी का लोगो) को पछाड़ने के लिए रेसिंग बुल (लेम्बोर्गिनी का लोगो) को मैदान में उतारा था.