
एक समय था जब भारत में कार खरीदार कीमत और माइलेज को ज्यादा तरजीह देता था. गाहें-बगाहें लोग पूछ ही लेते थें कि... कितना देती है. इस सवाल से उनका मतलब माइलेज से होता था. लेकिन पिछले कुछ सालों में इंडियन कार बायर्स के बीच कार खरीदारी के व्यवहार में बदलाव देखा गया है, लोगों ने सेफ्टी पर भी फोकस करना शुरू कर दिया है. ग्राहकों के इस रूझान को देखते हुए वाहन निर्माता कंपनियों के बीच भी बेहतर सेफ्टी फीचर्स देने की होड़ मची हुई है. अब आम कार खरीदार यात्रा के दौरान सेफ्टी, क्रैश टेस्ट और रेटिंग्स की बात कर रहा है. ये बदलाव अच्छा है और इसके कई फायदे भी हैं.
जब आप कार में सफर करते हैं तो थोड़ी देर के लिए (जितनी देर यात्रा कर रहे हैं) ही सही, लेकिन मेटल की वो बंद बॉडी आपके लिए सड़क पर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है. जिसका मजबूत... बेहद मजबूत होना बहुत जरूरी है. इसका ताजा प्रमाण हाल ही में एक सड़क हादसे में देखने को मिलता है.
कैसे हुआ हादसा:
बीते कल ग्रेटर नोएडा के दनकौर थाना क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेस-वे पर बड़ा हादसा हो गया. जहां ईंट से भरे ओवरलोड ट्राले से Hyundai Creta कार टकरा गई. इस हादसे में कार के आगे का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें बैठी सवारियां अंदर ही फंस गईं. काफी देर तक कार में फंसी मां-बेटी चीखती-चिल्लाती रहीं. बहुत ही मुश्किल से उन्हें बाहर निकाला जा सका. बताया जा रहा है कि समय रहते एयरबैग खुल गया था इसलिए मां-बेटी की जान बच गई. इस हादसे का एक वीडियो भी सामने आया है. जिसमें आप देख सकते हैं कि मैरून कलर की क्रेटा कार के आगे के हिस्सा कितनी बुरी तरह से डैमेज हुआ है.
कार का बोनट, इंजन कंपार्टमेंट, विंडशील्ड, A-पिलर सहित छत का भी कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है. गनिमत ये रहा कि, कार का एयरबैग समय रहते डिप्लॉय हो गया जिससे कार में सवार यात्रियों की जान बच सकी. बताया जा रहा है कि, ईंट से लदा ओवरलोडेड ट्राला आगे चल रहा था और पीछे से क्रेटा कार उससे जा भिड़ी. इसमें ट्राला चालक को भी चोटें आई हैं.
बहरहाल, इस हादसे का ये वीडियो इतना बताने के लिए काफी है कि, कार में एयरबैग कितना जरूरी होता है. आमतौर पर भारत में बिकने वाली कारों में डुअल-एयरबैग अनिवार्य है. हालांकि सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में कारों में 6 एयरबैग को अनिवार्य करने की योजना बनाई थी. लेकिन कुछ कार निर्माताओं ने छोटी कारों की कीमत में इजाफा होने और हैचबैक सेग्मेंट के हाशिए पर जाने का हवाला देते हुए इस नियम को फिलहाल लागू न करने के लिए सरकार पर दबाव बनाया. हालांकि हुंडई, किआ इंडिया जैसे कुछ कार निर्माताओं ने अपने वाहनों में 6 एयरबैग को बतौर स्टैंडर्ड शामिल कर दिया है. यानी ये सभी वेरिएंट्स में मिलेगा.
AIRBAG ने बचाई कई जिंदगी, आंकड़े हैं गवाह
दुनिया भर में एयरबैग और सीट-बेल्ट को सबसे बेहतर सेफ्टी फीचर के तौर पर माना जाता है. यूएस नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन ((NHTSA) द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि 1960 के बाद से सीट बेल्ट, एयर बैग, चाइल्ड सेफ्टी सीटें और इलेक्ट्रॉनिक स्टैबिलिटी कंट्रोल (ESC) जैस फीचर्स ने तकरीबन 613,501 लोगों की जान बचाई है.
वहीं भारत की बात करें तो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मार्च 2022 में राज्य सभा में बोलते हुए कहा था कि, "यदि कारों में फंक्शनल एयरबैग का इस्तेमाल किया गया होता तो साल 2020 में देश भर में 13,022 लोगों की जान बचाई जा सकती थी. जिनकी मौत सड़क हादसों में एयरबैग न होने के वजह से हो गई. उन्होनें आगे कहा था कि, तकरीबन 8,598 लोगों की मौत एक्सीडेंट के दौरान सिर में चोट लगने से हुई. यदि एयरबैग होता तो ये जानें बचाई जा सकती थीं."
क्या होता है एयरबैग:
सबसे पहले यह समझ लें कि, आखिर 'AIRBAG' क्या होता है? टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल लिमिटेड के चीफ प्रोडक्शन ऑफिसर, मोहन सावरकर का कहना है कि, एयरबैग आमतौर पर पॉलिएस्टर की तरह की मजबूत टेक्सटाइल या कपड़े से बना एक गुब्बारे जैसा कवर होता है. इसे ख़ास मैटेरियल से टेनेसिल स्ट्रेंथ (कपड़े की मजबूती) के लिए डिज़ाइन किया जाता है ताकि दुर्घटना के समय यात्रियों को सुरक्षित रखा जा सके. ये कार में किसी सेफ्टी कुशन की तरह काम करता है, जैसे ही वाहन से कोई इम्पैक्ट या टक्कर होती है ये सिस्टम एक्टिव हो जाता है.
सीट बेल्ट का इस्तेमाल:
रफ्तार के समय यात्रियों को चोट न लगे और उनकी सुरक्षा हो सके, ऐसे मौके पर ही सीट-बेल्ट काम आता है. मोहन सावरकर बताते हैं कि, " जैसे ही सेंसर्स को पता चलता है कि, एक्सीडेंट होने वाला है, तो बेल्ट में जितना भी ढ़ीलापन होता है वो पूरी तरह से खीच जाता है और पैसेंजर की बॉडी बिल्कुल भी आगे नहीं जाती है, जिससे सेफ्टी और भी बढ़ जाती है." यानी कि, ये बेल्ट एक्सीडेंट होने से पहले ही सेंसर्स की मदद से एक्टिव जाते हैं."
एयरबैग और सीट-बेल्ट कनेक्शन:
मोहन सावरकर कहते हैं कि, "सीट-बेल्ट लगे होने के बावजूद पैसेंजर की बॉडी आगे डैशबोर्ड की तरफ जाएगी, तो वो ज्यादा न जा पाए और डैशबोर्ड से न टकराए इसके लिए एयरबैग की जरूरत होती है. यही कारण हैं कि, सीट-बेल्ट को हमेशा प्राइमरी रिस्ट्रेंट सिस्टम (Primary Restraint System) कहा जाता है और 'एयरबैग' को हमेशा सप्लीमेंट्री रिस्ट्रेंट सिस्टम (Supplementary Restraint System) कहा जाता है."
कैसे काम करता है एयरबैग:
मोहन सावरकर सप्लीमेंट्री रिस्ट्रेंट सिस्टम यानी कि एयबैग की कार्यप्रणाली बताते हुए कहते हैं कि, "पहले आपने देखा कि, सीट-बेल्ट अपना काम करता है और अब बारी आती है एयरबैग की. जैसे की दुर्घटना होती है, SRS सिस्टम में पहले से ही इंस्टॉल किया गया नाइट्रोजन गैस एयरबैग में भर जाता है. ये पूरी प्रक्रिया पलक झपकते यानी कि कुछ मिली सेकंड में होती है. इसके बाद एयरबैग फूल जाता है और यात्री को एक बेहतर कुशनिंग के साथ सेफ्टी प्रदान करता है. एयरबैग में होल्स यानी कि छेद दिए जाते हैं जो कि डिप्लॉय होने के बाद गैस को बाहर निकाल देता है."
इन सारी प्रक्रिया के बीच गाड़ी की बॉडी की मजबूती का भी ख्याल रखा जाता है. ताकि किसी भी क्रैश के समय कार के भीतर बैठे व्यक्ति को ज्यादा नुकसान न हो और ज्यादा से ज्यादा इंपेक्ट एनर्जी गाड़ी ही झेल जाए, इसके लिए कार की बॉडी को मजबूत मेटल से तैयार किया जाता है.
क्या सीट-बेल्ट न लगाने पर एयरबैग डिप्लॉय नहीं होगा?
जब हमने मोहन सावरकर से पूछा कि, क्या अगर सीट-बेल्ट न लगाने पर एयरबैग डिप्लॉय नहीं होगा, तो वो बताते हैं कि, "नहीं ऐसा नहीं है, एयरबैग डिप्लॉय होगा लेकिन इससे यात्री को ज्यादा चोट आएगी. लेकिन यदि सीट-बेल्ट का इस्तेमाल किया गया है और क्रैश के दौरान एयरबैग डिप्लॉय होता है तो यात्री को कम से कम चोट लगने की संभावना रहती है."
कब और कितनी स्पीड पर खुला है एयरबैग:
सावरकर बताते हैं कि, "बहुत ही लो-स्पीड पर एयरबैग डिप्लॉय नहीं होता है, इसके लिए सिस्टम में एक स्पीड निश्चित की गई होती है, यानी कि एयरबैग तभी खुलेगा जिस स्पीड पर टक्कर होने पर यात्री को चोट पहुंच सकती है. ये ऐसे ही रोड पर चलते हुए अचानक से लगने वाले छोटे-मोटे इम्पैक्ट पर डिप्लॉय नहीं होता है." एयरबैग के डिप्लायेंट के लिए सामान्यत: कितनी स्पीड की जरूरत होती है. इसके बारे में वो कहते हैं कि, "यदि मैं गलत नहीं हूं तो आमतौर कार की स्पीड 30 किलोमीटर प्रतिघंटा से ज्यादा होनी चाहिए, हालांकि ये एकदम एक्जेक्ट फीगर नहीं है."