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Hyundai-Mahindra सहित इन 8 कार कंपनियों पर लग सकता है 7,300 करोड़ का जुर्माना! जानें क्या है मामला

वित्तीय वर्ष 2022-23 में आठ दिग्गज कार कंपनियों के कारों में इमिशन लेवल अधिक पाया गया है. जिसके चलते इन कंपनियों पर तकरीबन 7,300 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. सबसे ज्यादा तकरीबन 2800 कारोड़ रुपये की पेनाल्टी कोरियन कार निर्माता हुंडई पर लग सकती है.

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aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 28 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 11:02 AM IST

ऐसे समय में जब देश के कई बड़े शहर प्रदूषण की मार झेल रहे हैं, केंद्र सरकार ने पाया है कि महिंद्रा, हुंडई और होंडा सहित 8 कंपनियों की कारों में उत्सर्जन का स्तर (Emission Levels) स्टैंडर्ड से ज्यादा है. जिसके चलते इन कंपनियों पर कड़ा जुर्माना लगाया जा सकता है, जो तकरीबन 7,300 करोड़ रुपये के आसपास होगा.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2022-23 में इन दिग्गज कार कंपनियों के कारों के बेड़े में इमिशन लेवल अधिक पाया गया है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि, सबसे ज्यादा तकरीबन 2800 कारोड़ रुपये का जुर्माना कोरियन कार निर्माता हुंडई पर लगाई जा सकता है. वहीं महिंद्रा और किआ इंडिया पर जुर्माने की राशि क्रमश: 1800 करोड़ और 1300 करोड़ रुपये होगी.

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क्या है नियम:

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के अन्तर्गत आने वाले ब्यूरो ऑफ एनर्जी इफिसिएन्सी ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में बेचे जाने गई सभी कारों के कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इफिसिएन्सी (CAFE) मानदंडों को पूरा करना जरूरी बताया था. इसका मतलब यह था कि किसी भी कार के लिए प्रति 100 किमी पर ईंधन की खपत 4.78 लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन प्रति किमी 113 ग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए.

इंडस्ट्री और सरकार के बीच विवाद:

वित्तीय वर्ष 2022-23 की शुरुआत में जब CAFE मानदंडों को सख्त कर दिया गया था. उस वक्त से ही जुर्माने की राशि को लेकर केंद्र सरकार और ऑटो इंडस्ट्री के बीच विवाद शुरू हो गया था. उस वक्त कार कंपनियों ने दलील दी थी कि, नए मानदंड 1 जनवरी, 2023 से ही लागू होंगे, और इसलिए पूरे फाइनेंशियल ईयर में बेची गई कारों के आधार पर जुर्माना लगाना उचित नहीं होगा.

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बता दें कि 1 जनवरी, 2023 से पहले, यानी 2017-18 से, BEE के तहत वाहनों के लिए यह जरूरी था कि वो प्रति 100 किलोमीटर पर 5.5 लीटर से कम ईंधन की खपत करें. साथ ही औसत कार्बन उत्सर्जन को प्रति किलोमीटर 130 ग्राम तक सीमित किया गया था. अब नए मानदंडों में इस नियम को और भी सख्त कर दिया गया है, ताकि कार्बन उत्सर्जन पर लगाम लगाई जा सके.

किन कंपनियों पर कितनी पेनाल्टी:

कंपनी पेनाल्टी (करोड़ रुपये में)
हुंडई  2,837.8 
महिंद्रा 1,788.4 
किआ 1,346.2
होंडा 457.7
रेनॉल्ट 438.3 
स्कोडा 248.3 
निसान 172.3 
फोर्स मोटर 1.8 

आंकड़े साभार: इंडियन एक्सप्रेस

चली जाएगी हुंडई की आधी कमाई:

बता दें कि, हुंडई कार्स इंडिया ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में कुल 7.27 लाख कारों का प्रोडक्शन किया था. इस दौरान घरेलू बाजार में कंपनी ने कुल 5.67 लाख कारों की बिक्री की थी. इसके अलावा 1.53 लाख कारों को दूसरे देशों में एक्सपोर्ट किया था. इस वित्त वर्ष में कंपनी ने 4,709 करोड़ रुपये के नेट प्रॉफिट का ऐलान किया था. इस लिहाज से यदि कंपनी पर तकरीबन 2,837 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाता है तो ये कुल लाभ का लगभग 60 प्रतिशत होगा. यानी कंपनी की आधे से ज्यादा कमाई जुर्माने में चली जाएगी.

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क्या होता है CAFE: 

कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इफिसिएन्सी जिसे संक्षिप्त रूप में (CAFE) भी कहा जाता है. ये एक सरकारी नियम है जो एक न्यूनतम औसत ईंधन दक्षता स्तर निर्धारित करता है. जिसे कार निर्माता द्वारा बेचे जाने वाले सभी वाहनों को पूरा करना होता है. आसान भाषा में समझें तो यह कार के माइलेज को तय करने का एक मानक है. यह नियम कंपनियों को अपने बेचे जाने वाले सभी मॉडलों की फ्यूल इकोनॉमी का औसत निकालकर हाई इफिसिएंसी वाली कारों का निर्माण करने में मदद करता है.

CAFÉ स्टैंडर्ड पहली बार सरकार द्वारा ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत 2017 में जारी किए गए थें, ताकि ईंधन की खपत को कम करके कार्बन (CO₂) उत्सर्जन को कम किया जा सके. इसका उद्देश्य फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता और वायु प्रदूषण को कम करना है. इसका पहला फेज साल 2017-18 से शुरू हुआ था. जिसके तहत सभी निर्माताओं के लिए कारों का औसत वजन 1037 किलोग्राम और ईंधन खपत औसतन 5.49 लीटर/100 किमी से कम होना चाहिए.

वहीं दूसरे फेज को 2022-23 से शुरू माना जाता है. इस फेज में सरकार मानकों को और सख्त किया है. जिसके तहत कारों का औसत वजन 1,082 किग्रा और ईंधन की खपत 4.78 लीटर/100 किमी से कम होना चाहिए. इसके अलावा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन प्रति किमी 113 ग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए. सरकार का मनना है कि इन मानकों के कारण 2025 तक ईंधन की खपत में 22.97 मिलियन टन की कमी आएगी.

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