
भारत की अव्वल ऑटो कंपनियों में शुमार Mahindra & Mahindra को एक सौदा बहुत भारी पड़ गया है. कभी इस सौदे को किस्मत पटलने वाला माना जा रहा था, लेकिन यह पैसे डूबोने वाला साबित हो गया. 12 साल पहले की गई इस खरीदारी को महिंद्रा समूह काफी समय से बेचने के प्रयास में लगा हुआ था. अब जाकर सौदा तो हो गया, लेकिन महिंद्रा को इसमें एक भी रुपया नहीं मिलने वाला है.
12 साल पुराना है मामला
यह मामला है 2010 में हुए एक सौदे का, जिसमें Mahindra & Mahindra ने तब 2,100 करोड़ रुपये (उस समय के रेट के हिसाब से 462 मिलियन डॉलर) में दक्षिण कोरिया की ऑटो कंपनी SsangYong Motor को खरीदा था. महिंद्रा समूह इस कंपनी को बेचने का काफी समय से प्रयास कर रहा था, लेकिन कोई खरीदार नहीं मिल रहा था. अब अंतत: दक्षिण कोरिया की कुछ कंपनियों के एक गठजोड़ ने इसे खरीदने की सहमति दे दी है.
कंपनी तो बिकेगी, पर पैसा नहीं मिलेगा
कई महीनों से कोर्ट के चक्कर के बाद Edison Motors की अगुआई में लोकल कंपनियों के एक गठजोड़ ने SsangYang Motor को 305 बिलियन वॉन (Won) यानी करीब 254.56 मिलियन डॉलर में खरीदने का ऑफर दिया है. यह मामला दिसंबर 2020 से कोर्ट में है. अब इसका समाधान तो निकल आया है, लेकिन इस ऑफर में महिंद्रा को एक भी पैसे नहीं मिलने वाले हैं.
साल भर से बेचने में लगी है महिंद्रा
लोकल कंपनियों के इस ऑफर में SsangYong Motor की 95 फीसदी हिस्सेदारी के बदले 254.56 मिलियन डॉलर देने का प्रस्ताव है. SsangYong Motor में अभी महिंद्रा का 74.65 फीसदी हिस्सा है. SsangYong Motor से उम्मीद के हिसाब से परिणाम नहीं मिलने पर महिंद्रा ने फरवरी 2021 में इसे सेल के लिए डाल दिया था. इसके साथ ही महिंद्रा ने करीब 2000 करोड़ रुपये के अपने इन्वेस्टमेंट को राइट ऑफ कर दिया था.
महिंद्रा ने और पैसे लगाने से किया था इनकार
साल 2020 के समाप्त होने से पहले ही SsangYang Motor को 100 बिलियन वॉन के कर्ज के चलते बैंकरप्सी केस फाइल करने की जरूरत पड़ गई थी. कोरोना वायरस के चलते SsangYang Motor के लिए परिस्थितियां और बिगड़ गईं. कंपनी ने महिंद्रा से फ्रेश कैपिटल की मांग की लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया. महिंद्रा एंड महिंद्रा ने SsangYong Motor का अधिग्रहण करने के बाद एसयूवी और इलेक्ट्रिक व्हीकल पर फोकस करने की रणनीति अपनाई थी, जो सफल नहीं हो पाई.