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दो साल में सस्ती हो जाएंगी इलेक्ट्रिक गाड़ियां, पेट्रोल कार के बराबर होंगी कीमतें!

पेट्रोल-डीजल महंगे होने के बावजूद लोग चाहकर भी इलेक्ट्रिक कारें नहीं खरीद पा रहे हैं. इसकी एक बड़ी वजह है कि पेट्रोल के मुकाबले इलेक्ट्रिक गाड़ी की कीमत बहुत ज्यादा है. लेकिन अगले 2 साल में स्थिति बदलने वाली है, इसका भरोसा केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिया है. 

दो साल में सस्ती हो जाएंगी इलेक्ट्रिक दो साल में सस्ती हो जाएंगी इलेक्ट्रिक
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 08 नवंबर 2021,
  • अपडेटेड 6:58 PM IST
  • दो साल में सस्ती हो जाएंगी इलेक्ट्रिक कारें: नितिन गडकरी
  • पेट्रोल कार के बराबर होंगी इलेक्ट्रिक कार कीमतें

पेट्रोल-डीजल महंगे होने के बावजूद लोग चाहकर भी इलेक्ट्रिक कारें नहीं खरीद पा रहे हैं. इसकी एक बड़ी वजह है कि पेट्रोल के मुकाबले इलेक्ट्रिक गाड़ी की कीमत बहुत ज्यादा है. लेकिन अगले 2 साल में स्थिति बदलने वाली है, इसका भरोसा केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिया है. 
 
नितिन गडकरी की मानें तो अगले दो साल में पेट्रोल कार और इलेक्ट्रिक कार की कीमतें एक समान हो जाएंगी. उन्होंने दावा किया कि दो साल बाद के पेट्रोल और इलेक्ट्रिक गाड़ियां एक ही कीमत पर बिकनी शुरू हो जाएंगी. फिलहाल दोनों गाड़ियों की कीमतों में बहुत अंतर है. 

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सस्टेनेबिलिटी फाउंडेशन नाम की संस्था द्वारा आयोजित वेबिनार में नितिन गडकरी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों पर GST महज 5 फीसदी है, जबकि पेट्रोल वाहनों पर यह काफी ज्यादा है.  

कीमत ज्यादा होने के पीछे बैटरी महंगी

गडकरी ने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों की ज्यादा कीमत होने के पीछे लीथियम बैटरी है. लीथियम बैटरी की कीमत कम करने की दिशा में काम हो रहा है. लीथियम बैटरी की कीमत घटते ही इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतें घट जाएंगी, और फिर पेट्रोल वाहनों के बराबर रेट पर ही इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी मिल सकेंगी. 

उन्होंने कहा कि लीथियम बैटरी की कुल जरूरत का 81 फीसदी उत्पादन स्थानीय स्तर पर हो रहा है. उन्होंने कहा कि कैसे सस्ती बैटरी उपलब्ध हो, इस पर भी रिसर्च जारी है. साथ ही उन्होंने कहा कि लोग अब धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहन अपना रहे हैं. 

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यही नहीं, ऑटोमोबाइल्स कंपनियां भी इलेक्ट्रिक सेगमेंट पर फोकस कर रही हैं. जिससे इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्रीज को बढ़ावा मिल रहा है. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि 2030 तक 30 फीसदी प्राइवेट कार, 70 फीसदी तक कमर्शियल कार और 40 फीसदी बसें इलेक्ट्रिक हों. 


 

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