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18-20 साल चलेगी इलेक्ट्रिक कार की बैटरी! TATA के एक्सपर्ट से समझें EV चलाने की पूरी गणित

Electric Car Details: टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर आनंद कुलकर्णी ने आजतक से ख़ास बातचीत की. उन्होनें इलेक्ट्रिक कारों के बैटरी लाइफ, रिप्लेसमेंट और मेंटनेंस सहित कई बहम सवालों के जवाब दिएं. तो यदि आप भी एक इलेक्ट्रिक कार खरीदने की सोच रहे हैं तो इस लेख को जरूर पढ़ें.

टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर आनंद कुलकर्णी टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर आनंद कुलकर्णी
अश्विन सत्यदेव
  • नई दिल्ली,
  • 13 मई 2024,
  • अपडेटेड 11:39 AM IST

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. लेकिन अभी भी ग्राहकों का एक बड़ा वर्ग है जिनके जेहन में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर तमाम सवाल आते हैं. हमने इससे पहले अपने एक लेख इलेक्ट्रिक कारों से जुड़े तमाम सवालों के जवाब लेकर आए थे. अब हमने देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर आनंद कुलकर्णी (Anand Kulkarni) से विस्तार से बात की. आनंद ने इलेक्ट्रिक कार के बैटरी लाइफ, रेंज एंजायटी और रिप्लेसमेंट कॉस्ट सहित कई सवालों का जवाब दिया. पेश है इस बातचीत के कुछ प्रमुख अंश-

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सवाल: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य कैसा है?

जवाब: आनंद कुलकर्णी कहते हैं कि, "इलेक्ट्रिक का फ्यूचर इलेक्ट्रिफाइड है. पिछले तीन चार सालों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ा है. पहले तकरीबन इंडस्ट्री में जहां 15-17 हजार इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री होती थी, वहीं अब ये आंकड़ा 1 लाख वाहनों तक पहुंच चुका है. इस लिहाज से ग्रोथ रेट तकरीबन 40-50% तक पहुंच गया है, जो कि आगे भी जारी रहेगी. देश में ज्यादा से ज्यादा लोग इलेक्ट्रिक वाहनों के फायदे को समझने लगे हैं." 

"हमने जब तकरीबन 5 साल पहले अपनी जर्नी (इलेक्ट्रिक वाहनों की) शुरू की थी, तब हमने कहा था कि हम 10 मॉडलों को पेश करेंगे. Nexon EV हमारी पहली कार थी, जिसे 2020 में पेश किया गया. इसके बाद बहुत ही कम समय में हम Tigor EV सेडान को बाजार में लेकर आएं. फिर हमने नेक्सॉन इलेक्ट्रिक की सफलता के बाद इसके एक्सटेंडेड रेंज के तौर पर Nexon Max को पेश किया. हाल ही में हमने Tiago EV और Punch EV को भी बाजार में उतारा है. हमारा इलेक्ट्रिक व्हीकल पोर्टफोलियो लगातार बढ़ रहा है."

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वो आगे कहते हैं कि, "2025 तक हमारा जो लक्ष्य 10 इलेक्ट्रिक कारों को पेश करने का था, उसमें से तकरीबन आधी गाड़ियां बाजार में आ चुकी हैं. अब हम कुछ और इलेक्ट्रिक मॉडलों पर काम कर रहे हैं, जिन्हें आने वाले समय में पेश किया जाएगा. आप ये भी देख सकते हैं कि, हमारी पहली इलेक्ट्रिक कार नेक्सॉन से लेकर लेटेस्ट मॉडल पंच ईवी तक हमने अपने मॉडलों को तकनीकी रूप से काफी एडवांस किया है." 

सवाल: टाटा मोटर्स इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए रेंज एंजायटी से निपटने के लिए किस तरह काम कर रहा है?

जवाब: "रेंज एंजायटी एक बड़ा सवाल है. इसके लिए इंटर्नल और एक्सटर्नल दो तरह के प्रॉस्पेक्टिव हैं. इंटनर्लन व्यू से हमारा मतलब कार की मैन्युफैक्चरिंग से है और एक्सर्नल व्यू चार्जिंग इंफ्रा का है, जिसके बारे में मैं आपको आगे बताउंगा. इंटर्नल की बात करें तो हम कार के निर्माण के दौरान कुछ ख़ास प्वाइंट्स पर काम कर इसके रेंज को बेहतर कर सकते हैं. जब कार हवा को चीरते हुए आगे बढ़ती है तो इसे एयरोडायनमिक लॉसेस कहते हैं, इसे इंप्रूव किया जा सकता है." 

"इसके अलावा रीजेनरेशन का अमाउंट बढ़ाकर भी इसे बेहतर किया जा सकता है. हर इलेक्ट्रिक कार में रीजेनरेशन के चलते तकरीबन 25-30 फीसदी एनर्जी को वापस रीगेन कर सकते हैं. इसके अलावा हम कार के वजन, मैटेरियल, रोलिंग लॉसेस इत्यादि पर भी काम करते हैं. वो ग्राहक जिन्होनें ICE (पेट्रोल-डीजल) व्हीकल के बाद EV पर स्विच किया है, उन्हें भी इलेक्ट्रिक वाहनों का सही ढंग से इस्तेमाल करने के लिए जागरूक किया जाता है."

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सवाल: चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर आपका क्या कहना है?

जवाब: आनंद कहते हैं कि, "रेंज एंजायटी को लेकर हमारा दूसरा यानी एक्सटर्नल व्यू चार्जिंग इंफ्रा ही है. ये बेहद ही महत्वपूर्ण है. लेकिन इसे समझने के लिए एक रोचक फैक्ट को भी जानना जरूरी है. तकरीबन 93-95% लोग अपने इलेक्ट्रिक वाहनों को घर पर ही चार्ज करते हैं, यानी कि स्लो चार्जिंग के तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. वहीं केवल 5% लोग या फिर यूं कहें कि 5 परसेंट टाइम ही लोगों को फास्ट चार्जर की जरूरत होती है. जब वो लंबी दूरी की यात्राएं करते हैं." 

"इसके लिए एक बेहतर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए हम अपने ग्रुप कंपनी टाटा पावर (Tata Power) के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. अब तक हमने टाटा पावर के माध्यम से देश भर में तकरीबन 5,000 फास्ट चार्जर इंस्टॉल कर चुके हैं. लेकिन ये काफी नहीं और इसे और बढ़ाने के लिए हमने कुछ चार्ज प्वाइंट्स ऑपरेटर्स (CPO) से भी अनुबंध किया है."

डाटा कर रहा है तगड़ी मदद:

आनंद बताते हैं कि, "इस समय देश भर में हमारी तकरीबन सवा लाख इलेक्ट्रिक कारें चल रही हैं. इन सभी वाहनों का पूरा डाटा हमारे पास है. हम इन वाहनों के चार्जिंग और अन्य बिहैवियर पर नज़र रखकर इस नतीजे पर पहुंचते हैं कि, किस जगह पर चार्जिंग प्वाइंट्स लगाने पर सबसे ज्यादा फायदा होगा. यह डाटा हम चार्जिंग प्वाइंट्स ऑपरेटर्स के साथ शेयर करते हैं ताकि वो एक बेहतर प्वाइंट्स को डेवलप कर सकें. ये एक ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म है हमारा डाटा CPO की मदद करता है और उनके प्वाइंट्स हमें चार्जिंग फेसिलिटी उपलब्ध करा कर मदद करते हैं."

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सवाल: रेज़िडेंशियल सोसाइटीज़ में चार्जिंग इंफ्रा को लेकर क्या प्लान है?

जवाब: आनंद कहते हैं कि, "रेज़िडेंशियल सोसाइटीज में चार्जिंग इंफ्रा को डेवलप करना एक बड़ी चुनौती है. लेकिन हम इस मामले में काम कर रहे हैं, दिल्ली-मुंबई जैसे कई महानगरों में सोसाइटी वेलफेयर से बातचीत चल रही है. ताकि वो अपने परिसर में इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग प्वाइंट्स लगवाने में हमारा सहयोग करें, जिससे आम लोगों को अपने इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज करने में कोई समस्या न हो. कुछ जगहों पर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है." 

"इस तरह से इंटर्नल, एक्सटर्नल, वाहनों की मैन्युफैक्चरिंग से लेकर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, रेज़डेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) से बातचीत जैसे कई मुद्दों पर काम कर हम EV के लिए लोगों के बीच उठें रेंज एंजायटी को कम करने का प्रयास कर रहे हैं."

सवाल: टाटा मोटर्स के चार्जिंग प्वाइंट्स कहां हैं, और किस तरह से काम करते हैं?

जवाब: "देश भर में फैले 5,000 चार्जिंग प्वाइंट्स के बारें बताते हुए आनंद कहते हैं कि, हमने रिसर्च में यह पाया है कि, आमतौर पर लोग लंबी दूरी की यात्रायों में तकरीबन 150 से 200 किलोमीटर के बीच एक हॉल्ट (रेस्ट, स्नैक्स ब्रेक) लेते हैं. इस ब्रेक के दौरान लोग सामान्यत: 35 मिनट से लेकर 50 मिनट के लिए रूकते हैं. इसी मौके को हमने कार को फिर से चार्ज करने के लिए इस्तेमाल करने के लिए सोचा." 

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"इसी शोध के आधार पर हमने चार्जिंग प्वाइंट्स के लिए कॉरिडोर बनाए हैं. जिसमें बड़े और हाई मोबिलिटी एरिया या जोन को कनेक्ट करने की कोशिश की गई है. ये देश भर में फैले हुए हैं, जैसे दिल्ली-चंड़ीगढ़, मुंबई-अहमदाबाद, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई, विशाखापट्टनम और कोलकाता इत्यादि. ये सभी कोर एरिया हैं जहां सबसे ज्यादा मोबिलिटी होती है. इसके अलावा अन्य एरिया में भी चार्जिंग इंफ्रा डेवलप किया जा रहा है." 

सवाल: इन फास्ट चार्जिंग प्वाइंट्स पर इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग को लेकर कितना खर्च आता है?

जवाब: फास्ट चार्जर द्वारा EV को चार्ज करने पर होने वाले खर्च के बारे में आनंद बताते हैं कि, "फास्ट चार्जर्स के इक्यूपमेंट एक पूरे सेट-अप के साथ आते हैं जो कि अलग-अलग लोकेशन के अनुसार भिन्न हो सकते हैं. उदाहरण के तौर पर यदि 50kWh का फास्ट चार्जिंग प्वाइंट है तो यहां पर प्रतिकिलोवॉट यूनिट की कॉस्ट तकरीबन 20 रुपये से लेकर 25 रुपये के आसपास होगी."

सवाल: इलेक्ट्रिक वाहनों के मेंटनेंस पर कितना खर्च आता है?

जवाब: "सबसे पहली बात तो ये है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में एक पारंपरिक ICE इंजन (पेट्रोल-डीजल) की तुलना में कम कल-पुर्जे होते हैं. जिससे कंपोनेंट्स में वियर एंड टीयर कम होता है. हर रोटेटिंग पार्ट्स में मूवमेंट कम होने से मेंटनेंस भी कम होता है. उदाहरण के तौर पर, इलेक्ट्रिक वाहन में सिंगल स्पीड गियरबॉक्स होता है. वहीं ICE व्हीकल में 5-स्पीड या 6-स्पीड ट्रांसमिशन होता है. ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों में इंजन ऑयल की खपत भी कम होती है साथ ही इसको बदलने की फ्रिक्वेंसी भी ICE व्हीकल की तुलना में कम होती है."

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"चूंकि इलेक्ट्रिक वाहनों में कई तरह के रिजेनरेशन होते हैं, इसलिए आपको बार-बार लगातार ब्रेक अप्लाई करने की जरूरत नहीं होती है. इसका बड़ा फायदा यह होता है कि कार के ब्रेक पैड्स कम से कम घिसते हैं. दूसरी ओर इसमें क्लच भी नहीं होता है तो क्लच प्लेट्स के मेंटनेंस का भी खर्च बच जाता है. ऐसे ही इलेक्ट्रिक कारों में बहुत से कम पार्ट्स होते हैं जो कि इसके मेंटनेंस को कम करते हैं." 

सवाल: इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी की कॉस्टिंग कितनी होती है?

जवाब: आनंद कहते हैं कि, "सबसे पहले तो मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि, पिछले 10 सालों में बैटरी की कीमत साल दर साल लगातार कम होती जा रही है. साल 2010 में जिन बैटरियों की कीमत तकरीबन 1,000 डॉलर kWh थी उनकी कीमत घट कर उस समय की कीमत की तुलना में अब केवल 10-12% रह गई है. इस बात को समझाते हुए आनंद कहते हैं कि, "आपको याद होगा कि जब हम मोबाइल फोन इस्तेमाल करना शुरू किए थें, उस वक्त बैटरियां मिली एम्पीयर आवर (mAh) में आती थीं. उस समय प्रति मिली एम्पीयर आवर बैटरी की कीमत तकरीबन 10 रुपये के आसपास थी, जो कि अब घटकर केवल 10 पैसे या 30 पैसे पर आ गई है."

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आनंद अपने पुराने अनुभव को याद करते हुए बताते हैं कि, "मुझे याद है जब मैनें पहली बार 2000 mAh का पावर बैंक खरीदा था, उस वक्त इसकी कॉस्ट तकरीबन 7,000 रुपये थी. लेकिन अब आप इतने पैसे में ही 20,000 mAh का पावर बैंक खरीद सकते हैं. कुल मिलाकर कहने का अर्थ यही है कि, समय के साथ बैटरियों की कीमत कम हो रही है. जिसका असर ओरिजनल प्रोडक्ट्स की कीमत पर भी पड़ेगा जिनमें ये बैटरियां इस्तेमाल हो रही हैं."

वो आगे कहते हैं कि, "ऐसा ही इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों के साथ भी हुआ है. जो कि भविष्य में और भी कम होने की उम्मीद है. सामान्यत: किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन की कुल कीमत में तकरीबन 30% से लेकर 40% तक बैटरी की कॉस्टिंग होती है. जाहिर है कि जैसे-जैसे बैटरियों की कीमत कम होगी वैसे ही इलेक्ट्रिक वाहन भी सस्ते होंगे."

सवाल: EV की बैटरी की लाइफ और रिप्लेसमेंट के बारे में क्या कहेंगे?

जवाब: "बैटरी एक तरह के जटिल मैकेनिकल और केमिकल एनर्जी से भरा हुआ पीस होता है. इनकी लाइफ को चार्जिंग साइकिल से मापा जाता है. सामान्यत: आज के समय की बैटरियों को इस तरह से बनाया जाता है कि वो तकरीबन 1500 से 2000 चार्जिंग साइकिल कम्पलीट करती हैं. नई बैटरी की स्टेट ऑफ हेल्थ 100% रहती है और जब ये डेड होती हैं उस वक्त ये हेल्थ लेवल घटकर 80% पर आ जाता है. ये पूरी तरह से जीरो (0) पर नहीं जाता है, आपके स्मार्टफोन की बैटरी भी ऐसे ही काम करती है."

अब यहां पर Nexon EV का उदाहरण लेते हुए आनंद समझाते हैं कि, "टाटा नेक्सॉन इलेक्ट्रिक सामान्यत: 300 से 325 किमी की रेंज देती है. अगर औसतन 300 किमी की रेंज के हिसाब से कैल्कुलेट किया जाए तो 1500 चार्जिंग साइकिल के लिहाज से इस कार की बैटरी तकरीबन 1500x300= 4,50,000 किमी तक चल सकेगी. इसके अलावा औसतन एक यूजर साल भर में तकरीबन 20,000 किमी की ड्राइव करता है. इस हिसाब से 20 हजार किमी का आंकड़ा छूने के लिए यूजर को रोजाना 70 किमी की ड्राइव करनी होगी. अब अगर नेक्सॉन की बात करें तो 4,50,000 किमी तक का सफर करने में तकरीबन 18 से 20 साल तक का समय लग सकता है. ऐसे में यूजर्स को आइडियली कार की बैटरी के बारे में चिंतित होने की जरूरत नहीं है. हम अपने ग्राहकों को इलेक्ट्रिक कार की बैटरी पर 8 साल तक की वारंटी दे रहे हैं." 

सवाल: Tata Acti.ev का क्या मतलब है और पिछली Ziptron तकनीक से ये किस तरह से अलग है?

जवाब: आनदं बताते हैं कि, "Acti.ev का एक फुल फॉर्म है. इसमें 'A' का अर्थ एडवांस, 'C' का मतलब कनेक्टेड, 'TI' का अर्थ टेक-इंटेलिजेंट और आखिर में 'EV' का मतलब इलेक्ट्रिक व्हीकल है. ये एक नया प्लेटफॉर्म है. जब Ziptron टेक्नोलॉजी डेवलप किया गया था उस वक्त एक सामान्य धारणा थी कि, या तो आप कार के चारों तरफ बैटरी फिक्स कर सकते हैं या फिर किसी बैटरी के चारों तरफ व्हीकल फिट कर सकते हैं." 

वो आगे कहते हैं कि, "हमारा जो पहला प्रयास था वो वाहन के अनुसार बैटरी बनाने का था. यानी हमने कार में ज्यादा छेड़छाड़ नहीं किया, Nexon जैसी थी उसे वैसा ही रखा गया. इसके बाद अब हमने दूसरा प्रयास बैटरी के चारों तरफ व्हीकल डेवलप करने का किया है. इसके कुल चार लेयर हैं. सबसे पहला लेयर पावरट्रेन का है. दूसरा चेचिस का लेयर है, जैसे सस्पेंश और फ्लोर इत्यादि. तीसरा लेयर कनेक्टिविटी और चौथ लेयर क्लाउड का है. इन चारों लेयर को मिलाकर ये Acti.ev प्लेटफॉर्म डेवलप किया गया है." 

"Acti.ev प्लेटफॉर्म के कई बड़े फायदे हैं. इस तकनीक की मदद से हम अलग-अलग ड्राइविंग मोड्स जैसे फ्रंट व्हील ड्राइव या रियर व्हील ड्राइव किसी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा स्टैंडर्ड बैटरी का इस्तेमाल किया जा सकता है. आज जो टेक्नोलॉजी है यदि भविष्य में वो बदल जाती है तो हम अपने वाहनों को उसके अनुसार भी डेवलप कर सकते हैं. चूंकि इस प्लेटफॉर्म में मूविंग पार्ट्स बहुत कम होते हैं तो इसका असर वाहन की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट और वजन पर भी पड़ता है. भविष्य में आने वाली हमारी सभी कारें Acti.ev प्लेटफॉर्म पर ही बेस्ड होंगी."

सवाल: इलेक्ट्रिक वाहन कितने सुरक्षित होते है और Tata किस तरह से सेफ्टी पर काम करता है?

जवाब: आनंद कहते हैं कि, "इसके बारे में बताने से पहले मैं आपसे एक ग्लोबल डाटा शेयर करना चाहुंगा. इस डाटा के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहन किसी भी पारंपरिक ICE व्हीकल की तुलना में बहुत सुरक्षित हैं. इसके दो-तीन कारण है. किसी भी पेट्रोल-डीजल वाहन में तीन चीजें होती हैं जिसकी वहज से रिस्क हो सकता है. पहला कि, हर गाड़ी में इलेक्ट्रिकल पार्ट्स होते हैं, दूसरा फ्यूल और तीसरा इग्निशन या हीट होता. अब जिस किसी भी कार में ये तीनों बातें होती हैं तो रिस्क बढ़ जाता है.

लेकिन इलेक्ट्रिक वाहन में इन सभी बातों का एक साथ आना थोड़ा मुश्किल है. क्योंकि EV में पूरी डिजिटल फ्रेमवर्क होता है. इसमें सीरीज ऑफ कंट्रोल्स होते हैं. जैसे कि इलेक्ट्रिक वाहन यदि कोई छोटी सी भी गलती होती है तो हम तत्काल कार को रोक सकते हैं, क्योंकि इसका सॉफ्टवेयर बहुत इंटेलिजेंट होता है और इसमें बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) की भी सुविधा मिलती है. इसके अलावा पूरी कार में व्हीकल इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फिगरेशन यूनिट (VECU) होता है. ये तकनीक किसी भी तरह के आपात स्थिति में वाहन को बंद करने का काम करते हैं." 

सवाल: इलेक्ट्रिक वाहन से बेस्ट रिजल्ट पाने और बैटरी हेल्थ के लिए क्या करें?

जवाब: आनंद कुलकर्णी का कहना है कि, हमेशा बेहतर स्पीड में कार चलाएं और टायरों में प्रेशर का ख़ास ख्याल रखें. इसके अलावा बैटरी को कम्लीट डिस्चार्ज न होने दें. बेहतर बैटरी हेल्थ के लिए स्लो चार्जिंग सिस्टम का इस्तेमाल करें क्योंकि स्लो चार्जिंग बैटरी को ठीक ढंग से बैलेंस करता है. तो यदि आप इन टिप्स को फॉलो करते हैं तो आपको बेहतर रिजल्ट मिलेंगे.

सवाल: घर पर या बाहर फास्ट चार्जर, EV को कहां चार्ज करना बेहतर होता है?

जवाब: आनंद कहते हैं कि, "मेरे पास Tata Nexon Max EV है और अब तक मैनें तकरीबन 42,000 किमी तक इस कार को ड्राइव किया है. मैं ज्यादातर अपनी कार को घर पर ही चार्ज करता हूं. लेकिन कभी-कभी कार को घर पर चार्ज करना मुश्किलें पैदा कर देता है. क्योंकि घरेलू इलेक्ट्रिसिटी में यूनिट्स की संख्या बढ़ने के कारण इसका असर बिजली के बिल पर पड़ता है. लेकिन बहुत से ऐसे राज्य हैं जिनके इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट ख़ास तौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ग्रीन मीटर प्रोवाइड कराते हैं. इससे कनेक्ट कर EV को चार्ज करने का खर्च तकरीबन 7 से 8 रुपये प्रति यूनिट तक आता है. कुल मिलाकर EV को घर पर चार्ज करना सबसे बेहतर विकल्प है." 

सवाल: किस तरह के ग्राहकों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना चाहिए?

जवाब: सबसे आखिरी सवाल के जवाब में आनंद कहते हैं कि, "जो लोग टेक फॉरवर्ड हैं, पर्यावरण के प्रति सचेत हैं और एक बेहतर अपग्रेड करना चाहते हैं उन सभी के लिए इलेक्ट्रिक वाहन का चुनाव करना एक समझदारी वाला फैसला है. मेरा मानना है कि, हर कोई इलेक्ट्रिक वाहन खरीद सकता है और ये किसी भी ICE व्हीकल की तुलना में ज्यादा किफायती और बेहतर है." 

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