
बिहार के आरा का एक युवक नौकरी की तलाश में उत्तरखंड के हल्द्वानी गया था. बीते दिनों यहां हुई हिंसा में गोली लगने से उसकी मौत हो गई. नौकरी की सूचना मिलने से पहले उत्तराखंड पुलिस की ओर से परिवार को मिली मौत की सूचना से मातम पसर गया. इसके बाद परिजन और रिश्तेदार नैनीताल पहुंचे. उनका कहना है कि बेटे का शव बनभूलपुरा रेलवे स्टेशन के ट्रैक पर मिला. उसके सिर पर कई गोलियां लगने के निशान उन्होंने देखे हैं.
दरअसल, आरा के सिन्हा ओपी क्षेत्र के छीनेगांव निवासी श्यामदेव सिंह का बेटा प्रकाश कुमार (24 साल) नौकरी की तलाश में उत्तराखंड गया था. इसी दौरान हल्द्वानी में अतिक्रमण पर बुलडोजर एक्शन के बाद हिंसा भड़क उठी. इसमें बनभूलपुरा रेलवे स्टेशन के ट्रैक पर उसे गोली लगी और मौत हो गई. उसकी मौत की खबर सुनकर परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा.
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मृतक की बहन दीप्ति सिंह और नरगिस सिंह ने बताया कि छोटे भाई प्रकाश पर ही घर की सारी जिम्मेदारी थी. बिहार में वो पांच साल से नौकरी की तलाश कर रहा था. इसी बीच किसी ने बताया कि नैनीताल में नौकरी मिल जाएगी. ये सुनकर वो 6 फरवरी को नैनीताल गया. फोन पर सभी से उसकी बात हो रही थी. 8 फरवरी की रात करीब 8 बजे आखिरी बार उसकी छोटे भाई आकाश उर्फ अभिराज से बात हुई.
'उसके सिर के पीछे कई गोलियां लगने के निशान थे'
इसके बाद उसका फोन लगना बंद हो गया. 10 फरवरी की दोपहर हल्द्वानी पुलिस ने परिजनों को फोन कर जानकारी दी कि आपके घर के लड़के के साथ दुर्घटना हुई है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. आप लोग जल्दी आ जाइए. इसके बाद प्रकाश के बहनोई दिल्ली से नैनीताल गए तो देखा कि वो सुशीला तिवारी मेडकिल कॉलेज नैनीताल में मृत पड़ा था. उसके सिर के पीछे कई गोलियां लगने के निशान थे.
'सरकार मदद करे और हत्या की जांच सही तरीके से कराए'
मृतक की बड़ी बहन दीप्ति ने उत्तराखंड, बिहार और केंद्र सरकार से भाई की मौत की जांच की मांग की है. उसने कहा, मेरा भाई कोई आतंकवादी नहीं था. उसे गोली मार दी गई. अगर मेरे भाई को यहीं पर नौकरी मिल जाती तो वो कमाने के लिए दूसरे प्रदेश नहीं जाता और न ही उसकी हिंसा में मौत होती है. बीजेपी सरकार से हम लोग मांग करते हैं कि परिवार की मदद करे और हत्या की जांच सही तरीके से कराए.
'उसने कहा था कि सबके लिए महंगे गिफ्ट खरीदेगा'
मृतक की मां ने कहा, पांच बेटियां होने पर काफी मन्नतों के बाद प्रकाश का जन्म हुआ था. परिवार ही नहीं पूरे गांव के लोग उसको बहुत मानते थे. बीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद से ही वो नौकरी की तैयारी करता था. छोटा-मोटा काम करके घर चलाता था. पांचों बहनों से उसको खास लगाव था. जब वो नौकरी ढूंढने जा रहा था तो बहनों से वादा करके गया था कि सबके लिए महंगे गिफ्ट खरीदेगा. मगर, होनी को कुछ और ही मंजूर था. नौकरी की सूचना मिलने के पहले उसकी मौत की सूचना मिली.
'बिहार में नौकरी नहीं मिली तो वो मजबूरी में नैनीताल गया'
प्रकाश के पिता श्यामदेव सिंह ने कहा, मेरा बेटा घर का एकलौता कमाने वाला चिराग था. कई सालों से बिहार में ही नौकरी की तैयारी करता रहा था. नौकरी नहीं लगी तो वो मजबूरी में नैनीताल गया, जहां उसकी हिंसा में हत्या हुई है. बेटे की मौत की जांच कराई जाए. हमें जीने के लिए नौकरी का सहारा दिया जाए. ताकि परिवार को जिंदा रख सकें.
बता दें कि गुरुवार को बनभूलपुरा में मलिक के बगीचे में अवैध मदरसा और नमाज स्थल को हटाने के दौरान बवाल हुआ था. सैकड़ों उपद्रवियों ने पुलिस, नगर निगम और प्रशासन की टीम पर पथराव के बाद क्षेत्र में आगजनी कर दी थी. 100 से अधिक वाहनों और बनभूलपुरा थाने को फूंका गया था. गोलियां भी बरसाई गई थीं. इसी बीच अगले दिन बनभूलपुरा के पास रेलवे पटरी पर युवक का शव बरामद किया गया, उसके सिर पर तीन गोलियों लगने के निशान थे.