
बगहा के वाल्मीकिनगर स्थित टीना शेड कॉलोनी में बीती रात कुछ ऐसा हुआ जिसने सभी को चौंका दिया. कॉलोनी के बाहर एक 15 फीट लंबा मगरमच्छ आराम से सोया मिला. रात के अंधेरे में पहले इसे लकड़ी का टुकड़ा समझा गया, लेकिन जब उसने हरकत की तो लोग दहशत में अपने-अपने घरों की तरफ भागने लगे.
मौके पर मौजूद एक शख्स राकेश सिंह ने बताया कि पहले तो मुझे लगा कि कोई लकड़ी का टुकड़ा पड़ा है, लेकिन जैसे ही उसके शरीर में हलचल देखी तो डर कर भाग खड़े हुए.
15 फीट लंबे मगरमच्छ का रेस्क्यू
वन विभाग के लिए यह रेस्क्यू ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण रहा. मगरमच्छ को काबू करने के लिए 10 सदस्यीय टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी. रस्सियों और डंडों के सहारे उसे धीरे-धीरे काबू में किया गया. अंत में 13 वन कर्मियों की मदद से इस विशाल मगरमच्छ को गंडक नदी में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया.
वन क्षेत्र के रेंजर शिव कुमार ने बताया कि गंडक और उसकी सहायक नदियों में मगरमच्छों की संख्या बढ़ी है. गंडक नदी मगरमच्छों के लिए एक बेहतर सुरक्षित साबित हो रही है. आमतौर पर भोजन की तलाश में मगरमच्छ नहर और नदियों से निकलकर रिहायशी इलाके में आ जाते हैं. मगरमच्छों के सूंघने की शक्ति काफी ज्यादा होती है लिहाजा मांसाहारी भोजन की खुशबू से भी वो ज्यादा आकर्षित होते हैं.
स्थानीय लोगों ने मगरमच्छ को 'गंडक का राजा' नाम दिया
स्थानीय लोगों ने इस विशाल मगरमच्छ को गंडक का राजा नाम दिया है. उनका मानना है कि यह मगरमच्छ नदी का प्रतीक बन चुका है. रेस्क्यू के बाद वन विभाग के रेंजर शिवकुमार राम ने कहा कि हमने यह अभियान बेहद सावधानी से पूरा किया, ताकि मगरमच्छ को कोई नुकसान न हो. उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कोई जंगली जानवर दिखाई दे, तो तुरंत वन विभाग को सूचना दें.