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नीतीश कुमार का 'पावर बैलेंस' या संजय झा को संदेश? JDU में मनीष वर्मा की एंट्री के मायने क्या

पूर्व आईएएस अधिकारी मनीष वर्मा ने जेडीयू में शामिल होकर सियासी सफर का आगाज कर दिया है. मनीष सीएम नीतीश के गृह जनपद नालंदा से ही आते हैं, उन्हीं की जाति के हैं और उनके नाम की चर्चा सीएम के उत्तराधिकारी के रूप में भी होती रही है. जेडीयू में मनीष की एंट्री के मायने क्या हैं?

जेडीयू में शामिल हुए मनीष वर्मा जेडीयू में शामिल हुए मनीष वर्मा
बिकेश तिवारी
  • नई दिल्ली,
  • 10 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 3:21 PM IST

बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार की अगुवाई कर रही नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में पूर्व आईएएस अधिकारी मनीष वर्मा शामिल हो चुके हैं. सीएम नीतीश के सचिव रह चुके मनीष वर्मा ने जेडीयू जॉइन करने के बाद कहा कि पहले नीतीश जी के दिल में था और अब मैं उनके दल में आ गया हूं. यहां मौजूद सभी नेताओं से कुछ न कुछ सीखने का मौका मिला है. मनीष वर्मा ने बतौर आईएएस अपने करियर, प्रतिनियुक्ति पर बिहार आने और फिर सीएम नीतीश के साथ बतौर सचिव पांच साल के सफर की भी चर्चा की. मनीष ने जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की.

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संजय झा को अभी कुछ ही दिन पहले नई दिल्ली में हुई जेडीयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया था. नीतीश कुमार की अगुवाई वाली पार्टी में बतौर कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की ताजपोशी के साथ ही सियासी गलियारों में उन्हें पार्टी प्रमुख का उत्तराधिकारी तक बताया जाने लगा था. नीतीश के उत्तराधिकारी के रूप में उन्हीं की जाति और जनपद से आने वाले मनीष वर्मा के नाम की चर्चा भी होती रही है. जेडीयू कार्यकारिणी की बैठक से पहले भी ये कयास लगाए जा रहे थे कि मनीष को जेडीयू अध्यक्ष बनाया जा सकता है.

हालांकि, तब ये कयास अफवाह ही साबित हुए लेकिन अब पार्टी में मनीष की एंट्री ने चर्चा की धारा बदल दी है. मनीष की एंट्री को कोई संजय झा के लिए संदेश बता रहा है तो कोई इसे अपनी जाति को साधे रखने, आरसीपी सिंह चैप्टर से अपनी ही जाति में डेंट की संभावनाएं कमजोर करने के लिए सीएम नीतीश की सोची-समझी चाल. जेडीयू में मनीष का शामिल होना संजय झा के लिए संदेश है या सीएम नीतीश का 'पावर बैलेंस'? इसके सियासी मायने क्या हैं?

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जेडीयू में मनीष की एंट्री के मायने क्या?

बिहार के पिछले चुनाव में अंतिम चरण के मतदान से पहले चुनाव प्रचार के अंतिम दिन सीएम नीतीश कुमार ने इमोशनल कार्ड चला था. सीएम नीतीश ने ऐलान किया था कि ये मेरा अंतिम चुनाव है, फिर भी जेडीयू सीटों के लिहाज से आरजेडी और बीजेपी के बाद तीसरे नंबर की पार्टी रही थी. अब बिहार में चुनाव करीब आ गए हैं, जेडीयू नीतीश की अगुवाई में ही चुनाव मैदान में उतरने की बात कह रही है. सीएम नीतीश कुर्मी जाति से आते हैं और उनके उत्तराधिकारी के रूप में संजय झा के नाम की चर्चा से जेडीयू नेताओं को कुर्मी वोट में भी विपक्ष के सेंध लगाने का डर लगने लगा था. यह डर इसलिए भी, क्योंकि आरजेडी हाल के लोकसभा चुनाव में कुशवाहा वोटबैंक में सेंध लगाने में सफल रही थी.

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बिहार के वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क ने कहा कि नीतीश कुमार सियासत के वह माहिर खिलाड़ी हैं जो कब कौन सी चाल चलेंगे, कई बार उनके आसपास रहने वाले लोगों को भी नहीं पता होता. वह जनता की नब्ज पकड़कर उसके हिसाब से स्थिति का आकलन करते हुए चलते हैं और शायद यही वजह है कि जब भी उन्हें चुका हुआ कहा जाने लगता है, वह मजबूत वापसी करते हैं. नीतीश ने संजय झा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया तो इसमें सवर्णों को साधने के साथ सहयोगी बीजेपी को लंबे साथ का संदेश देने की कवायद थी. लेकिन चर्चा उत्तराधिकारी पर आ गई. नीतीश को अपनी पार्टी में यह बर्दाश्त नहीं कि किसी नेता का कद बहुत बड़ा हो जाए. नीतीश की एनडीए में वापसी के बाद से ही संजय झा का कद निरंतर मजबूत होता चला गया. अब नीतीश ने अपने गृह जिले और जाति से आने वाले मनीष वर्मा की एंट्री कराकर पावर बैलेंस कर दिया है.

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नीतीश के उत्तराधिकारी के रूप में रही है चर्चा

मनीष वर्मा 2000 बैच के ओडिशा कैडर के आईएएस अधिकारी हैं. 2012 में प्रतिनियुक्ति पर अपने गृह राज्य बिहार आए मनीष फिर यहीं रह गए और अपने मूल कैडर में लौटकर नहीं गए. प्रतिनियुक्ति की अवधि में पूर्णिया और पटना का डीएम रहने के साथ ही मनीष मनीष सीएम नीतीश के सचिव भी रहे. 2021 में मनीष वर्मा ने वीआरएस ले लिया और किसी न किसी रूप में सीएम नीतीश के साथ जुड़े रहे. नीतीश ने मनीष वर्मा के लिए ही अतिरिक्त परामर्शी का पद सृजित किया था. वह लोकसभा चुनाव में काफी सक्रिय नजर आए लेकिन सियासत में सीधी एंट्री से परहेज किया. मनीष के नालंदा सीट से जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ने की चर्चा थी, जेडीयू कार्यकारिणी से पहले भी कयास थे कि पार्टी में उनको कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. लेकिन तब ये सारे कयास अफवाह साबित हुए थे. अब सियासत में मनीष की औपचारिक एंट्री के बाद नजरें इस पर हैं कि उन्हें पार्टी में क्या जिम्मेदारी दी जाती है.

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