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'आदिवासियों के योगदान को मिटाने की कोशिश की गई', बिहार के जमुई में बोले PM मोदी

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा,'कोशिश ये कि गई की आजादी की लड़ाई का ये श्रेय सिर्फ एक ही दल (कांग्रेस) और एक ही परिवार को दिया जाए. आजादी की लड़ाई में आदिवासियों ने जो भूमिका निभाई थी, उसको कौन भुला सकता है?'

जमुई में लोगों को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. जमुई में लोगों को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.
रोहित कुमार सिंह
  • जमुई,
  • 15 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 1:18 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'जनजातीय गौरव दिवस' पर बिहार के जमुई पहुंचे. यहां आदिवासी समाज के पारंपरिक डांस के साथ उनका स्वागत किया गया. पीएम मोदी ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर फूल अर्पित किए. प्रधानमंत्री ने यहां आदिवासी नृत्य का लत्फ उठाया और नगाड़ा भी बजाया.

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा,'आज बहुत ही पवित्र दिन है. आज कार्तिक पूर्णिमा है. देव दीपावली है. आज गुरु नानक देव जी का 555वां प्रकाश पर्व भी है. मैं सभी देशवासियों को इन पर्वों की बधाई देता हूं. आजादी के बाद आदिवासियों के योगदान को मिटाने की कोशिश की गई. इसके पीछे स्वार्थभरी राजनीति थी.'

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पहले की सरकारों को नहीं थी परवाह

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा,'कोशिश ये कि गई की आजादी की लड़ाई का ये श्रेय सिर्फ एक ही दल (कांग्रेस) और एक ही परिवार को दिया जाए. आजादी की लड़ाई में आदिवासियों ने जो भूमिका निभाई थी, उसको कौन भुला सकता है? बीजेपी और एनडीए का सौभाग्य है कि आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू देश की राष्ट्रपति हैं. नीतीश कुमार ने भी राष्ट्रपति के लिए द्रौपदी मुर्मू का समर्थन किया था. पहले की सरकारों ने आदिवासियों की कोई परवाह नहीं की थी.'

पिछले साल किया था झारखंड का दौरा

बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर पीएम मोदी ने पिछले साल झारखंड का दौरा किया था. बता दें कि झारखंड, बिहार और ओडिशा के एक बड़े हिस्से में इन्हें भगवान बिरसा कहा जाता है. ये अकेले आदिवासी नेता हैं, जिनका चित्र भारतीय संसद में प्रदर्शित है. ये मुंडा जाति ही नहीं, आदिवासी या अनुसूचित जनजातीय गौरव के सबसे बड़े प्रतीक हैं. इनका जन्म झारखंड राज्य के खूंटी जिले के उलिहातू में हुआ था. 15 नवंबर 1875 को बिरसा मुंडा का जन्म हुआ. 9 जून 1900 में रांची के कारागार में मृत्यु हुई. करीब 19वर्ष की आयु में उन्होंने बिरसा सेना का गठन किया. 600 से ज्यादा पारंपरिक लड़ाके उनके साथ थे.

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