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'नीतीश-लालू को जबरन EBC का नेता बना दिया गया...', PK ने जातीय राजनीति पर जमकर घेरा

चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने जातीय राजनीति को लेकर नीतीश कुमार और लालू यादव को जमकर घेरा. आजतक से खास बातचीत में पीके ने कहा कि नीतीश कुमार और लालू यादव को जबरन ईबीसी का नेता बना दिया गया.

 प्रशांत किशोर बिहार में जन सुराज अभियान चला रहे हैं (फाइल फोटो) प्रशांत किशोर बिहार में जन सुराज अभियान चला रहे हैं (फाइल फोटो)
अंजना ओम कश्यप
  • पटना,
  • 03 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 1:57 PM IST

चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बने जन सुराज पार्टी से सूत्रधार प्रशांत किशोर ने आजतक से बात करते हुए बिहार की राजनीति में जातियों से लेकर नीतीश कुमार और लालू यादव के रोल तक, हर पहलू पर बात की. पीके ने कहा कि नीतीश कुमार और लालू यादव ईबीसी (अति पिछड़ा वर्ग) के नेता नहीं हैं. नीतीश कुमार की जाति ईबीसी में नहीं आती, लालू यादव की जाति ईबीसी में नहीं आती.

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उन्होंने नीतीश कुमार की अगुवाई वाली जनता दल (यूनाइटेड) और लालू यादव की राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को जातीय राजनीति पर जमकर घेरा. पीके ने कहा कि नीतीश कुमार और लालू यादव को जबरन ईबीसी का नेता बना दिया गया. उन्होंने जातीय राजनीति को लेकर सवाल पर कर्नाटक से लेकर गुजरात तक के उदाहरण गिनाते हुए कहा कि राजनीति में जातियों की भूमिका कहां नहीं है. क्या कर्नाटक में वोक्कालिगा और लिंगायत की बात नहीं होती या फिर गुजरात में पटेल और क्षत्रिय की लड़ाई नहीं है?

पीके ने कहा कि हां, यह सही है कि जाति समाज की बड़ी सच्चाई है. लेकिन जाति ही राजनीति के लिए एकमात्र सच्चाई नहीं. उन्होंने कहा कि साल 2014 के बाद बीजेपी और मोदी के नाम पर बिहार के लोग बहुत बड़ी संख्या में लोग वोट देते हैं. मोदीजी की जाति का कोई बिहार में रहता ही नहीं है. पीके ने कहा कि लालू यादव का उदाहरण ही देखिए, आरजेडी का समीकरण है समीकरण है मुस्लिम और यादव. यादव के बाद मुसलमान उनको सबसे अधिक वोट देते हैं.

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उन्होंने कहा कि यादव तो समझ आता है कि चलो लालू जी की जाति के हैं लेकिन मुसलमान तो उनकी जाति के नहीं. कर्नाटक, गुजरात कहां जाति नहीं है. पीके ने कहा कि जब ये राज्य सुधर सकते हैं तो बिहार क्यों नहीं. उन्होंने कहा कि हम हर समाज को संख्या के अनुपात में हिस्सेदारी देंगे लेकिन आधार काबिलियत होगा.

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पीके ने कहा कि हर समाज के काबिल लोगों को हम आगे लाएंगे. दलित समाज के जिस व्यक्ति को अध्यक्ष चुना गया है, उस आदमी की काबिलियत देखिए. उन्होंने कहा कि वह आदमी संयुक्त बिहार के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी स्कूल में पढ़ा. आईएफएस अधिकारी रहा, कई राजदूत रहा. पीके ने कहा कि वो किसी भी जाति के हों, काबिल तो हैं ही.

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पीके ने दावा किया कि मनोज भारती दलित हैं, इसलिए जन सुराज के अध्यक्ष नहीं चुने गए. उन्होंने कहा कि वे इसलिए चुने गए क्योंकि वे काबिल हैं. पूर्वाग्रह बना दिया गया है कि जाति से ही राजनीति होगी. जाति सर्वे और भागीदारी के अनुपात में हिस्सेदारी के सवाल पर पीके ने कहा कि नीतीश जी की जाति के दो फीसदी लोग रहते हैं, लालू जी की जाति के 14 फीसदी. जब ये अन्य समाज को जोड़ सकते हैं तो हम भी कर सकते हैं.

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