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चुनाव हारने के 7 दिन बाद ही सिंगापुर चली गईं रोहिणी आचार्य, बताया आखिर क्यों जा रही हैं बिहार छोड़कर

Bihar News: रोहिणी आचार्य चुनाव हारने के सप्ताह भर के बाद ही सिंगापुर वापस चली गई हैं. जाते समय उन्होंने बताया कि सारण की जनता की सेवा के लिए वो 10-15 दिनों में ही वापस लौट आएंगी. इस दौरान उन्होेंने सिंगापुर जाने की वजह भी बताई.

चुनाव हारने के बाद सिंगापुर लौटीं रोहिणी आचार्य चुनाव हारने के बाद सिंगापुर लौटीं रोहिणी आचार्य
aajtak.in
  • पटना,
  • 13 जून 2024,
  • अपडेटेड 2:20 PM IST

Bihar News: बिहार की सारण सीट से चुनाव हारने के बाद आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव की छोटी बेटी रोहिणी आचार्य सिंगापुर के लिए रवाना हो गई हैं. हालांकि उन्होंने बताया है कि वो 10-15 दिनों में ही सिंगापुर से वापस आ जाएंगी और सारण की जनता की सेवा के लिए मौजूद रहेंगी. इस दौरान उन्होंने बताया कि वह सिंगापुर क्यों जा रही हैं. 

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रोहिणी आचार्य ने सिंगापुर जाते समय एयरपोर्ट पर ही मीडिया से बात करते हुए कहा कि वो अपने बच्चों से मिलने के लिए सिंगापुर जा रही हैं. उन्होंने कहा कि हम 10-15 दिन में वापस आ जाएंगे सारण की जनता की सेवा के लिए. अपने कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देने के लिए. 

मोदी सरकार में बिहार को बड़े मंत्रालय नहीं मिलने पर कहा, "सच्चाई सामने आ गई है. विपक्ष तो यही बोलता था, जनता अब डिसाइड करे. जनता से इतने झूठे वादे किए. ठनठनगोपाल बना दिया है बिहार की जनता को. बिहार की जनता भी कह रही है कि हमें झुनझुना पकड़ा दिया गया है." 

नीतीश को लेकर क्या बोलीं रोहिणी? 

नीतीश जी को अपने साथ कब ला रहे हैं, इस सवाल के जवाब में लालू की बेटी ने कहा, "हम उन्हें क्यों लेकर आएंगे. वो बड़े हैं, हम उनसे आशीर्वाद ले रहे हैं. अब वो कब आएंगे, ये तो वही बताएंगे. हम लोग तो उनके बाल-बच्चे हैं, उनसे आशीर्वाद मांग रहे हैं."
इतना ही नहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के शपथग्रहण में नीतीश के नहीं जाने को लेकर जब रोहिणी से पूछा गया तो उन्होंने कहा, "तबीयत खराब होगा उनका, उन्हें आराम करने दीजिए."  

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13 हजार वोटों से चुनाव हारीं रोहिणी आचार्य 

बता दें कि सारण सीट से पहली बार चुनाव में उतरीं रोहिणी आचार्य बीजेपी प्रत्याशी राजीव प्रताप रूड़ी से हार गईं. जहां रूड़ी को चार लाख 71 हजार 752 वोट मिले थे, वहीं रोहिणी आचार्य को चार लाख 58 हजार 91 वोट मिले. रोहिणी आचार्य 13 हजार 661 वोटों से चुनाव हार गई थीं.

 

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