
बिहार में इस बार लोकसभा चुनाव में कई दिलचस्प मुकाबले हुए. इसमें शिवहर सीट भी शामिल है. लवली आनंद की जीत सिर्फ सियासी जंग नहीं बल्कि इससे एक कदम आगे बढ़कर है. इसे आनंद मोहन की फैमिली की उसके पुराने गढ़ में वापसी के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, शिवहर से आरजेडी की टिकट पर चेतन आनंद विधानसभा चुनाव जीत चुके थे, लेकिन संसदीय क्षेत्र पर इस परिवार के किसी सदस्य ने करीब 26 साल बाद वापसी की.
लवली आनंद की पहचान बिहार के बाहुबली नेता और बाहुबली आनंद मोहन की पत्नी के रूप में है. लवली आनंद इससे पहले 1994 में वैशाली से सांसद बनीं थी. इस बार शिवहर सीट से जेडीयू ने लवली आनंद पर विश्वास जताते हुए उन्हें टिकट दिया और वह उस पर खरी उतरीं. इससे पहले वह और उनके बेटे दोनों आरजेडी में थे. ऐसे में आरजेडी छोड़ने के तुरंत बाद उन्हें जेडीयू से शिवहर के लिए टिकट मिल गया. शिवहर को आनंद मोहन का गढ़ माना जाता है. ऐसे में एनडीए ने जेडीयू कोटे से लवली आनंद को तीन बार की बीजेपी की सीटिंग सांसद रमा देवी का टिकट काटकर उम्मीदवार बनाया और उन पर भरोसा जताया
26 साल बाद पुराने गढ़ में वापसी
शिवहर सीट से खुद आनंद मोहन दो बार सांसद रह चुके हैं. अंतिम बार 1998 में आनंद मोहन वहां से एमपी बने थे. इसके बाद से अब तक उनके परिवार का कोई भी सदस्य शिवहर सीट से लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज नहीं कर पाया था. लोकसभा चुनाव के पहले आनंद मोहन का जेल से बाहर आना और करीब 26 साल बाद लवली आनंद का लोकसभा चुनाव में जीत करने को, एक तरह से अपने पुराने गढ़ में वापसी के तौर पर देखा जा रहा है.
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पहली बार पूर्व सीएम की पत्नी को हराकर एमपी बनी थीं लवली
लवली आनंद पूर्व सांसद और बाहुबली नेता आनंद मोहन की पत्नी हैं. 57 वर्षीय लवली आनंद पूर्व सांसद होने के साथ ही दो बार विधायक भी रह चुकी हैं.उन्होंने 1994 में वैशाली लोकसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा की पत्नी किशोरी सिन्हा को हरा कर अपने सियासी जीवन की शुरुआत की थी. अपने पति आनंद मोहन की मदद से बिहार पिपुल्स पार्टी की टिकट पर वैशाली से चुनाव लड़ा था.
आरजेडी की ऋतु जायसवाल को दी कड़ी शिकस्त
शिवहर से जहां जेडीयू ने लवली आनंद पर भरोसा जताया था. वहीं आरजेडी ने लवली आंनद के खिलाफ उम्मीदवार के रूप में ऋतु जायसवाल को उतारा था. वह खुद पूर्व आईएएस की पत्नी हैं. ऋतु जायसवाल ने एक मुखिया के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी और अपने काम के कारण एक तेज-तर्रार और पढ़ी लिखी महिला के तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई थी. इसके बावजूद आनंद मोहन के गढ़ में उनकी पत्नी के सामने ऋतु की एक नहीं चली.