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Budget 2021: कोरोना संकट से उद्योग जगत भी परेशान, अब वित्त मंत्री से लगाई राहत की आस 

कोरोना संकट से इंडस्ट्री जगत भी परेशान हुआ है. इंडस्ट्री जगत के लोगों को अब उम्मीद है कि वित्त मंत्री उनके राहत के लिए कई कदम उठाएंगी. सेक्टरवार राहत के अलावा समूचे इंडस्ट्री सेक्टर को राहत पहुंचाने वाले ऐलान की उम्मीद है.

बजट से कॉरपोरेट जगत को राहत की उम्मीद बजट से कॉरपोरेट जगत को राहत की उम्मीद
aajtak.in
  • नई दिल्ली ,
  • 25 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 7:21 PM IST
  • बजट से इंडस्ट्री जगत को भी उम्मीद
  • इकोनॉमी पस्त होने से सबको नुकसान
  • जीएसटी को तर्कसंगत बनाने की मांग

कोरोना से पस्त हो चुकी भारतीय अर्थव्यवस्था को अब बजट से काफी उम्मीदें हैं. कोरोना संकट से भारतीय कॉरपोरेट जगत के कई सेक्टर को भारी नुकसान हुआ है. इसलिए अब कॉरपोरेट-इंडस्ट्री जगत पूरी उम्मीद कर रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार राहत के लिए कई कदम उठाएंगी.

सेक्टरवार उपायों के अलावा समूची इंडस्ट्री को राहत पहुंचाने वाले ऐलान की उम्मीद है. 

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जीएसटी में बदलाव 

इंडस्ट्री चैम्बर्स का कहना है कि सरकार को जीएसटी को तर्कसंगत बनाना चाहिए. वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाते हुए सिर्फ तीन मानक रेट होने चाहिए और इसके रजिस्ट्रेशन को आसान बनाना चाहिए. 

बैंकों का निजीकरण

इंडस्ट्री चैंबर सीआईआई और फिक्की पब्लिक सेक्टर बैंकों के निजीकरण की जमकर वकालत कर रहे हैं. सीआईआई का कहना है कि कुछ बड़े बैंकों को छोड़कर बाकी सभी पब्लिक सेक्टर के बैंकों में सरकार को अपनी हिस्सेदारी घटाकर 50 फीसदी से नीचे लानी चाहिए. 

हेल्थ पर बढ़े खर्च 

इंडस्ट्री चैंबर्स ने यह भी मांग की है कि कोरोना को देखते हुए सरकार इस साल अपने हेल्थ बजट में अच्छी बढ़ोतरी करे. फिक्की का कहना है कि सरकार को अगले पांच साल में हेल्थ पर जीडीपी के कम से कम आधा फीसदी का अतिरिक्त खर्च करना चाहिए. अभी सरकार हेल्थ पर जीडीपी का करीब 1.5 फीसदी खर्च करती है. 

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रोजगार सृजन को बढ़ावा 

इंडस्ट्री चैम्बर की यह मांग है कि रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बजट में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए. इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाना चाहिए और इनकम टैक्स छूट की सीमा भी बढ़ानी चाहिए. 

कॉरपोरेट टैक्स रेट 

कॉरपोरेट टैक्स रेट में सरकार पिछले साल ही भारी कटौती कर चुकी है. इसलिए इसमें तो अब और कटौती की गुंजाइश नहीं है. जीडीपी में भारी गिरावट और इनकम टैक्स संग्रह न बढ़ने की वजह से ऐसा करना संभव ही नहीं है. 

राजकोषीय घाटा भी बढ़ता जा रहा है ऐसे में सरकार के सामने कठिन चुनौती है कि किस तरह से राजकोष को भी मजबूत किया जाए और कॉरपोरेट को भी राहत मिले. 

राहत के और क्या हो सकते हैं रास्ते 

इंडस्ट्री चैम्बर्स का कहना है कि पिछले साल सरकार ने डिविडेंट टैक्स देने की जिम्मेदारी भी कंपनी से हटाकर शेयरधारकों पर कर दी थी. इसके साथ ही धारा 80 एम फिर से लाई जाए ताकि डिविडेंट टैक्स का कैस्केडिंग इफेक्ट कम हो. लेकिन नुकसान उठाने वाली कंपनियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. इसलिए इसमें संशोधन की मांग की जा रही है. 

इसी तरह टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स (TCS) के प्रावधानों में कई बदलाव किये गये हैं, लेकिन इसके कुछ प्रावधानों को लेकर स्पष्टता का अभाव है. इसको भी इस बजट में दूर करने की मांग की जा रही है. 

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कॉरपोरेट-इंडस्ट्री जगत की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं-

  • आयात कर को प्रतिस्पर्धी बनाया जाए
  • लोगों के व्यक्तिगत आयकर सीमा में और कटौती की जाए ताकि मांग बढ़े
  •  कॉरपोरेट को बैंकिंग लाइसेंस दिया जाए
  •  मिनिमम अल्टरनेट टैक्स को खत्म किया जाए
  •  सरकारी बैंकों में सरकार अपनी हिस्सेदारी घटाए
  • सार्वजनिक कंपनियों का विनिवेश तेज किया जाए 
  • हेल्थ इंश्योरेंस को बढ़ावा दिया जाए
  • स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाए
  • मेडि‍कल वैल्यू टूरिज्म को प्रोत्साहन के लिए कदम उठाए जाएं
  • शहरी गरीबों के लिए मनरेगा जैसी योजना लाई जाए
  • हाउसिंग लोन पर मिलने वाली ब्याज सब्स‍िडी 3 से 4 साल तक देनी चाहिए 

 

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