केंद्र सरकार ने संकटग्रस्त लक्ष्मी विलास बैंक को DBS इंडिया में विलय को मंजूरी दे दी है. बुधवार को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद सिंगापुर के सबसे बड़े बैंक DBS Bank की भारतीय इकाई में लक्ष्मी विलास बैंक का विलय हो जाएगा. RBI ने लक्ष्मी विलास बैंक को बचाने के लिए DBS इंडिया में विलय का रास्ता चुना है.
पहली बार विदेशी बैंक में विलय का फैसला
यह पहली बार है जब किसी भारतीय बैंक को डूबने से बचाने के लिए किसी विदेशी बैंक में विलय किया जा रहा है. सरकार के इस फैसले से बैंक के 20 लाख डिपॉजिटर और 4000 कर्मचारियों को राहत मिलेगी. सरकार के इस फैसले लक्ष्मी विलाय बैंक के शेयर तेजी देखने को मिली है. शेयर करीब 5 फीसदी चढ़कर 7.65 रुपये पर बंद हुआ.
25 हजार से ज्यादा निकाल पाएंगे ग्राहक
इसके साथ ही लक्ष्मी विलास बैंक के खातों से अधिकतम 25,000 रुपये की रकम निकालने की जो सीमा थी, उसे भी हटा लिया गया है. लक्ष्मी विलास बैंक इस साल का दूसरा बैंक है, जिसे RBI ने डूबने से बचाया है. इससे पहले मार्च में RBI ने यस बैंक को डूबने से बचाया था.
94 साल पुराने लक्ष्मी विलास बैंक का नाम खत्म हो जाएगा और साथ ही इसकी इक्विटी भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी. अब इस बैंक का पूरा डिपॉजिट DBS India के पास चला जाएगा. पिछले 6 सेंशन में लक्ष्मी विलास बैंक के शेयरों में करीब 53 फीसदी की गिरावट आई थी.
इससे पहले RBI ने लक्ष्मी विलास बैंक पर 16 दिसंबर तक मोरेटोरियम लागू कर दिया था. इसके तहत ग्राहक 16 दिसंबर तक ग्राहक अपने बैंक खाते से 25,000 रुपये से अधिक की राशि नहीं सकते थे. लेकिन कैबिनेट की बैठक के बाद विलय के ऐलान के साथ ही यह सीमा खत्म कर दी गई है. यानी अब ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा निकाल सकते हैं.
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने लक्ष्मी विलास बैंक लिमिटेड (एलवीबी) के डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड (डीबीआईएल) में विलय की योजना को मंजूरी दे दी. इससे पहले 17 नवंबर को केंद्र सरकार ने लक्ष्मी विलास बैंक पर एक महीने के लिए मोरेटोरियम लगा दिया था.
डीबीएस एशिया का एक प्रमुख वित्तीय सेवा ग्रुप है जिसकी 18 बाजारों में उपस्थिति है और जिसका मुख्यालय सिंगापुर में है. वह सिंगापुर के शेयर बाजार में लिस्टेड भी है. विलय के बाद भी डीबीआईएल का संयुक्त बैलेंस शीट सुदृढ़ रहेगा और इसकी शाखाओं की संख्या बढ़कर 600 हो जाएगी.