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बैंक फर्जीवाड़े पर लगाम नहीं, RBI ने कहा- सरकारी बैंक सबसे ज्यादा शिकार

aajtak.in
  • 25 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 11:51 PM IST
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तमाम कोशिशों के बावजूद भी बैंक फ्रॉड के मामले नहीं रुक रहे हैं. मंगलवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट में आरबीआई ने बताया कि वित्त वर्ष 2019-20 में पिछले साल के मुकाबले बैंक फ्रॉड के मामलों में 28 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

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दरअसल 2018-19 के मुकाबले 2019-20 में दोगुने से भी ज्यादा रकम के बैंक फर्जीवाड़े सामने आए हैं. वित्त वर्ष 2019-20 में करीब 1.85 लाख करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में 71,500 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा हुआ था.

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साल 2018-19 में बैंक फर्जीवाड़े के 6799 मामले सामने आए थे, जो 2019-20 में बढ़कर 8707 हो गए. फर्जीवाड़े में 80 फीसदी हिस्सेदारी सरकारी बैंकों की है. जबकि प्राइवेट सेक्टर में यह आंकड़ा 18 फीसदी तक रहा. मोरेटोरियम की वजह से बैंकों को हो रहीं दिक्कतों पर रिपोर्ट में चिंता जताई गई है. (Photo: File)
 

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हालांकि रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2020-21 की जून तिमाही में पिछले साल की जून तिमाही के मुकाबले फ्रॉड के मामलों में कमी आई है. आरबीआई के मुताबिक, अप्रैल-जून 2020 में बैंक फ्रॉड की रकम 28,843 करोड़ रही, वहीं अप्रैल-जून 2019 में यह आंकड़ा 42,228 करोड़ रुपये का था.

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आरबीआई की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2019-20 में बैंक फ्रॉड के जो मामले सामने आए हैं, उनमें लोन को लेकर सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा हुआ है. इस रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 में कुल बैंक फ्रॉड मामले में जितनी राशि का फर्जीवाड़ा हुआ, उसमें 76 फीसदी लोन से संबंधित थे. 

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इसके अलावा वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि 200 और 500 रुपये के नोट का चलन देश में तेजी से बढ़ रहा है. वर्ष 2018 में 37,053 करोड़ रुपये मूल्य के 18,526 लाख 200 रुपये के नोट सर्कुलेशन में थे, जो 2019 में बढ़कर 80,010 करोड़ रुपये मूल्य के हो गए. साल 2019 में 200 रुपये के 40,005 लाख नोट सर्कुलेशन में थे.

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