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गहराया विवाद, मिस्त्री परिवार के प्रस्ताव को टाटा ग्रुप ने बताया 'नॉनसेंस'

aajtak.in
  • 10 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 10:26 PM IST
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टाटा ग्रुप और साइरस मिस्त्री के बीच पिछले करीब 4 साल से कानूनी लड़ाई चल रही है. गुरुवार को भी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर जोरदार बहस हुई. टाटा संस से अलग होने के लिए शापूरजी पलोनजी (एसपी) समूह ने जो प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में रखा था, उसे टाटा ग्रुप ने मानने से इनकार कर दिया है. (Photo: File)

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दरअसल, मिस्त्री परिवार के नियंत्रण वाले शापूरजी पलोनजी (एसपी) ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया है कि टाटा संस में उनके 18.4 फीसदी हिस्सेदारी की वैल्यू करीब 1.75 लाख करोड़ है, जिसे टाटा ग्रुप ने खारिज कर दिया है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान टाटा ग्रुप का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने 'नॉनसेंस' प्रस्ताव करार दिया है. उन्होंने कहा कि इस तरह से राहत नहीं दी जा सकती है, टाटा ग्रुप इसका विरोध करता है. (Photo: File)

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सीनियर वकील हरीश साल्वे ने कहा कि टाटा संस में शापूरजी पालोनजी ग्रुप की 18.4 फीसदी हिस्सेदारी की वैल्यू 80,000 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं है. साल्वे इस मामले में टाटा ग्रुप की तरफ से पैरवी कर रहे हैं. इससे पहले टाटा संस में शापूरजी पालोनजी की हिस्सेदारी की वैल्यू को लेकर 8 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी. (Photo: File)

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दरअसल, पिछले दिनों शापोरजी पालोनजी ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी बेचकर निकलने को तैयार है. इसके लिए मिस्त्री परिवार का दावा है कि टाटा संस में उनके 18.4 फीसदी हिस्सेदारी की वैल्यू 1.75 लाख करोड़ है. (Photo: File)

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मिस्त्री परिवार के स्वामित्व वाले शापूरजी पलोनजी (एसपी) समूह ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि हिस्सेदारी का मूल्यांकन सभी सूचीबद्ध शेयरों, गैर-सूचीबद्ध शेयरों, ब्रांड, नकदी और अचल संपत्तियों के हिसाब से निकाला गया है. टाटा संस में शापूरजी पालोनजी समूह की 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी का मूल्य उसके हिसाब से 1,75,000 करोड़ रुपये बैठता है. (Photo: File)
 

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गौरतलब है कि शापोरजी पालोनजी ग्रुप की अपनी दो सब्सिडियरी कंपनियों-साइरस इन्वेस्टमेंट और स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट के जरिए टाटा संस में कुल 18.4 फीसदी हिस्सेदारी है. इस साल 29 अक्टूबर को शापूरजी ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में टाटा ग्रुप से अलग होने का एक प्लान जमा किया था. (Photo: File)

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गौरतलब है कि मिस्त्री परिवार के सबसे अहम सदस्य साइरस मिस्त्री को साल 2012 में टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था, लेकिन 2016 में उन्हें इस पद से हटा दिया गया. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लंबी कानूनी लड़ाई छिड़ी गई, जो अभी तक जारी है. शापूरजी पालोनजी (SP) समूह और टाटा का संबंध करीब सात दशक पुराना है. (Photo: File)

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इससे पहले 18 नवंबर 2019 को NCLAT ने साइरस मिस्त्री को दोबारा चेयरमैन पद देने का फैसला सुनाया था. इस फैसले को टाटा संस ने चुनौती दी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी 2020 को NCLAT के फैसले पर रोक लगा दी थी. (Photo: File)

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