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अमेरिका ने कहा- भारत में व्यापार करना अब भी कठिन, CAA और आर्टिकल 370 का जिक्र

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 22 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 8:43 PM IST
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अमेरिकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत व्यापार करने के लिए 'चुनौतीपूर्ण जगह' बना हुआ है. विदेश मंत्रालय ने बुधवार को जारी एक रिपोर्ट '2021 इन्वेस्टमेंट क्लाइमेट स्टेटमेंट्स: इंडिया' में कहा कि भारत सरकार को निवेश में आ रही बाधाओं को कम करने के कदम उठाने चाहिए. (Photo: File)

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रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर से विशेष संवैधानिक स्थिति को हटाने और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पारित किए जाने का भी उल्लेख किया गया. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की इस रिपोर्ट में अपील की गई है कि भारत सरकार को निवेश में आ रही बाधाओं को कम करने के कदम उठाने चाहिए. 

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पीटीआई के मुताबिक अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेश के लिए नौकरशाही संबंधी बाधाओं को कम करके एक आकर्षक और विश्वसनीय निवेश माहौल को बढ़ावा देने की जरूरत है. वैश्विक सप्लाई चेन से उत्पादकों को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है. द्विपक्षीय व्यापार में विस्तार को प्रतिबंधित कर दिया है. इसके साथ ही विशिष्ट भारतीय मानक, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ मेल नहीं खाते हैं, उसने द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि को बाधित किया है. (Photo: File)

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विदेश विभाग ने अपनी रिपोर्ट में भाजपा गठबंधन (NDA) सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिन में लिए गए 2 'विवादित' फैसलों का उल्लेख किया है. इसमें जम्मू-कश्मीर से विशेष संवैधानिक दर्जा हटाना और CAA को पास करने का जिक्र है. हालांकि इस बारे में भारत का साफ कहना है कि CAA उसका 'आंतरिक मामला' है और किसी भी विदेशी पक्ष को भारत की संप्रभुता से संबंधित मुद्दों पर टीका-टिप्पणी का कोई अधिकार नहीं है. (Photo: File)
 

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यही नहीं, भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्पष्ट रूप से कहा है कि अनुच्छेद 370 को खत्म करना उसका आंतरिक मामला है. कोविड का प्रबंधन, आर्थिक गतिविधियों में गिरावट सहित कई मुद्दे साल 2020 में प्रमुख रहे. दिसंबर 2020 तक आर्थिक गतिविधियों में सकारात्मक विकास के लक्षण दिखने शुरू हो गए. 

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अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि कोविड-19 महामारी की रोकथाम के उपायों के चलते आर्थिक गतिविधियों में गिरावट आई, लेकिन दिसंबर 2020 तक आर्थिक गतिविधियों में सकारात्मक बढ़ोतरी के संकेत दिखाई देने लगे.
 

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कोरोना की दूसरी लहर से आलोचना
यही नहीं, रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अचानक मामलों में बढ़ोतरी के कारण कुछ आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है. विदेश विभाग ने कहा कि महामारी और लॉकडाउन से उपजी आर्थिक चुनौतियों के जवाब में भारत ने व्यापक सामाजिक कल्याण और आर्थिक प्रोत्साहन के कई कार्यक्रम बनाए. हालांकि भारत ने इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्च में बढ़ोतरी की है. (Photo: File)

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सरकार ने फार्मास्युटिकल्स, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से जुड़े इंसेंटिव को भी अपनाया. इन उपायों से भारत को अप्रैल 2020 और मार्च 2021 के बीच सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 8% की गिरावट से उबरने में मदद मिली और जनवरी 2021 से पॉजिटिव ग्रोथ भी लौट रही है. (Photo: File)

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रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार ने बीमा क्षेत्र को और उदार बनाया है. जिससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा 49% से बढ़कर 74% हो गई. हालांकि इसमें अभी भी डायरेक्टर और टॉप मैनेजमेंट में भारतीय नागरिकों को ही नियुक्त करने की शर्त रखी गई है.

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