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चीन के सरकारी बैंक ने HDFC और ICICI बैंक के बाद अब किया बजाज फाइनेंस में निवेश 

पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने एचडीएफसी और ICICI बैंक के बाद अब बजाज फाइनेंस में निवेश किया है. इस साल मार्च में पीपल्स बैंक ने एचडीएफसी लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 1 फीसदी से ज्यादा कर ली थी.

बजाज फाइनेंस में चीनी बैंक का निवेश बजाज फाइनेंस में चीनी बैंक का निवेश
aajtak.in
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  • 21 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 3:30 PM IST
  • पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने किया निवेश
  • बजाज फाइनेंस में हुआ चीनी बैंक का निवेश
  • एक फीसदी से भी कम है चीनी बैंक का निवेश

चीन के सरकारी पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने एचडीएफसी और ICICI बैंक के बाद अब बजाज फाइनेंस में निवेश किया है. बजाज फाइनेंस में चीन के बैंक ने 1 फीसदी से कम हिस्सेदारी ली है. 

बहुत कम है हिस्सेदारी 

बैंक की हिस्सेदारी 1 फीसदी से कम होने की वजह से स्टॉक एक्सचेंज पर इसका खुलासा नहीं किया गया है. जानकारों का कहना है कि इन तीनों संस्थाओं में चीनी बैंक का निवेश इतना कम है कि उससे किसी तरह का खतरा नहीं हो सकता.

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भारत में तीसरा निवेश 
यह चीन के सरकारी बैंक का भारत में तीसरा निवेश है. इसके पहले इस साल मार्च में पीपल्स बैंक ने एचडीएफसी लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 1 फीसदी से ज्यादा कर ली थी. जिस पर काफी विवाद और चर्चा हुई थी. 

चीनी निवेश पर सख्ती 
गौरतलब है कि भारत में चीनी कंपनियों के निवेश पर कोई रोक नहीं है, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव की वजह से इस तरह के निवेश पर सवाल उठाए जाने लगे हैं. इसके बाद सरकार ने पड़ोसी देशों से आने वाले एफडीआई और फॉरेन पोर्टफोलियो निवेश के नियम सख्त कर दिये हैं.  

जानकारों का कहना है कि चीनी बैंक के पास काफी फंड है और वह भारत जैसे देशों की वित्तीय संस्थाओं में निवेश कर अपने पोर्टफोलियो को विविधता दे रहा है. 

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बजाज समूह की कंपनी 

बजाज फाइनेंस भारत की सबसे बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में से एक है. यह राहुल बजाज के नेतृत्व वाली बजाज फाइनेंशियल सर्विसेज की एक शाखा है. पिछले महीने पीपल्स बैंक ने देश में निजी क्षेत्र के दिग्गज आईसीआईसीआई बैंक में निवेश किया था. चीनी बैंक ने यह निवेश कब किया इसकी जानकारी सामने नहीं आई है. कोरोना संकट के बीच बजाज फाइनेंस के शेयर मार्च के 4,800 रुपये से घटकर अब करीब 2,200 रुपये पर पहुंच गये हैं. 

बैंकिंग सेक्टर में कोई भी एक निवेशक किसी बैंक में 15 फीसदी से ज्यादा वोटिंग राइट नहीं ले सकता और 5 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी लेने के लिए रिजर्व बैंक की इजाजत लेनी होती है. 

 

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