
सरकारी एयरलाइन Air India के लिए सबसे ज्यादा बोली लगाकर Tata Group के फिर से इसे अपने नाम करने की खबरें मीडिया में सूत्रों के मुताबिक चल रही हैं. हालांकि सरकार का कहना है कि अभी इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है. सरकार के विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा रही एअर इंडिया का नियंत्रण हासिल करने के साथ ही नए मालिक के हाथ एअर इंडिया की विशाल संपत्ति, हवाई जहाज का बेड़ा आएगा.
एअर इंडिया का ‘जहाजी बेड़ा’
एअर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन में सरकार उसकी सब्सिडियरी कंपनी Air India Express की 100% हिस्सेदारी और ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी AI-SATS में अपनी 50% हिस्सेदारी भी बेच रही है.
नागर विमानन मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक इस तरह प्राइवेटाइजेशन के बाद एअर इंडिया के नए मालिक को दोनों एयरलाइंस के एयरक्राफ्ट का बेड़ा हासिल होगा. मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक एअर इंडिया के नए मालिक को दोनों एयरलाइंस के 144 विमानों का बेड़ा मिलेगा. इसमें लीज और कंपनी के मालिकाना हक वाले विमान शामिल हैं. विमानों की संख्या के मामले में सिर्फ Indigo ही एयर इंडिया से आगे है.
एअर इंडिया के अंतरराष्ट्रीय स्लॉट
विदेशों के लिए उड़ान भरने वाली एअर इंडिया देश की सबसे बड़ी कंपनी है. भारत से सिंगापुर, खाड़ी देशों, हांगकांग, लंदन, ढाका, काठमांडू जैसे सबसे ज्यादा पॉपुलर उड़ान मार्गों पर सेवाएं देने के साथ-साथ वह अमेरिका, यूरोप के कई देशों के लिए सीधी उड़ानों का संचालन करती है. इसके अलावा स्टार अलायंस का हिस्सा होने से उसकी पहुंच और भी बढ़ती है.
पीटीआई की खबर के मुताबिक एअर इंडिया घरेलू हवाई अड्डों पर 4,480 और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2,738 लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट रखती है. साथ ही विदेशी हवाई अड्डों पर पार्किंंग के कंपनी के पास करीब 900 स्लॉट हैं. ये स्लॉट कंपनी की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच और उड़ानों के बारे में बताते हैं. जबकि एअर इंडिया की सब्सिडियरी Air India Express हर हफ्ते 665 उड़ानों का संचालन करती है.
एअर इंडिया का मार्केट शेयर
भले एअर इंडिया लंबे समय से नुकसान में हो, लेकिन उसका मार्केट शेयर अच्छा खासा है. एअर इंडिया और लो-कॉस्ट एयरलाइंस एअर इंडिया एक्सप्रेस का अगस्त तक डोमेस्टिक मार्केट शेयर 13.20% रहा. जबकि इंटरनेशनल मार्केट में दोनों कंपनियों की हिस्सेदारी कुल 18.8% है जो देश में किसी भी एयरलाइंस की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है.
एअर इंडिया का कुल कर्ज
नागर विमानन मंत्रालय के हिसाब से एअर इंडिया पर मौजूदा समय में 43,000 करोड़ रुपये का कर्ज है. सरकार के इस कर्ज को एक नई एसपीवी एअर इंडिया एसेट होल्डिंग लिमिटेड (AIAHL) को सौंपने की खबर हैं. सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में एअर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन की डील को आकर्षक बनाने के लिए कर्ज के क्लॉज को आसान बना दिया था.
हालांकि, जब सरकार ने Air India के प्राइवेटाइजेशन के लिए रुचि पत्र जारी किए थे, तब कहा था कि एयरलाइन के नए मालिक को 23,286.5 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ उठाना होगा. वहीं मंत्रालय के सूत्रों ने खबर दी है कि टाटा ग्रुप Air India के कुल कर्ज का करीब 15% वहन कर सकता है.
एअर इंडिया का स्टाफ
किसी भी नई कंपनी के लिए एअर इंडिया की सबसे बड़ी एसेट में एक होगा, प्रशिक्षित स्टाफ. एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के पायलट, क्रू और बाकी स्टाफ की संख्या मिलाकर करीब 15000 है. ये पूरी तरह से ट्रेन्ड स्टाफ है.
एअर इंडिया की संपत्ति
एअर इंडिया के पास बड़ी मात्रा में अचल संपत्ति है. इसमें मुंबई और दिल्ली के हवाईअड्डों के पास भूखंड और सिमुलेटर्स इत्यादि हैं. इसमें से भूखंड को नई एसपीवी AIAHL को ट्रांसफर किया जाना है. जबकि सिमुलेटर और कंपनी के ऑफिस का उपयोग इसका नया मालिक कर सकेगा. हालांकि इसके लिए अलग से डील होगी क्योंकि इन दोनों ही शहरों में परिचालन की लागत काफी महंगी है.
इसके अलावा AI-SATS के पास बेंगलुरू में लीज की जमीन पर अपनी खुद की बिल्डिंग है. ये भी कंपनी के नए मालिक के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट होगी.
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