
नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच ने भारतीय स्टेट बैंक का (SBI) के कर्ज के एक मामले में अनिल अंबानी के खिलाफ दिवालिया की कार्यवाही आगे बढ़ाने की इजाजत दे दी है. अब क्या करेंगे अनिल अंबानी? उनके पास क्या हैं रास्ते?आइए जानते हैं.
अनिल अंबानी के खिलाफ NCLT का आया है आदेश
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का 1200 करोड़ रुपये का कर्ज न चुका पाने की वजह से उनके खिलाफ गुरुवार को यह आदेश आया है. भारतीय स्टेट बैंक ने साल 2016 में अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनियों रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) और रिलायंस इंफ्राटेल (RITL) को यह कर्ज दिए थे. रिलायंस कम्युनिकेशंस का 565 करोड़ रुपये और रिलायंस इन्फ्राटेल का 635 करोड़ रुपये का बकाया है.
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अनिल अंबानी ने इन कर्जों के लिए 1200 करोड़ रुपये की पर्सनल गारंटी दी थी. अब दोनों कंपनियां बंद हो गई हैं. इसकी वजह से SBI को मुंबई NCLT में अपील करनी पड़ी. बैंक ने मांग की कि दिवालिया कानून के मुताबिक अनिल अंबानी से यह रकम वसूली की इजाजत दी जाए क्योंकि उन्होंने इस लोन की पर्सनल गारंटी दी है.
अब क्या कर सकते हैं अनिल अंबानी
अनिल अंबानी के पास अभी इस आदेश के खिलाफ NCLT से भी उंची अथॉरिटी नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) में इस आदेश को चुनौती देने का विकल्प मौजूद है, जिसका वह सहारा भी शायद लेंगे.
अनिल अंबानी के एक प्रवक्ता ने बताया कि NCLAT के आदेश से रिलायंस एडीएजी समूह की अन्य कंपनियों जैसे रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस पावर, रिलायंस कैपिटल आदि के कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
प्रवक्ता ने कहा, 'अनिल अंबानी नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) के मुंबई बेंच के 20 अगस्त के आदेश का अध्ययन कर रहे हैं और इस बारे में वह सलाह ले रहे हैं कि किसी रेजोल्यूशन प्रोफेशनल की नियुक्ति के खिलाफ किस तरह से नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल में अपील की जाए.'
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हो गई है प्रोफेशनल की नियुक्ति
गौरतलब है कि NCLT ने गुरुवार के अपने आदेश में अनिल अंबानी के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन यानी दिवालिया की प्रक्रिया शुरू करने के लिए एक प्रोफेशनल जितेंद्र कोठारी की नियुक्ति भी कर दी है.
NCLT मुंबई ने अपनी टिप्पणी में कहा, 'RCOM और RITL दोनों ने जनवरी 2017 में लोन के भुगतान में डिफॉल्ट किया है. उनके एकाउंट को 26 अगस्त 2016 से ही नॉन परफॉर्मिंग एसेट घोषित कर दिया गया था.'
(www.businesstoday.in के इनपुट पर आधारित)