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क्या से क्या हो गया? पहले BYJU के ऑफिस पर लटका ताला और अब उठाना पड़ा ये कदम

पैसों की बचत करने के लिए कंपनी को पहले अपने सभी रीजनल ऑफिस बंद (BYJU Shut Office) करने पड़े थे और अब उसने अपने ट्यूशन सेंटर (BYJU Tuition Center) बंद करना शुरू कर दिया है.

बायजू पर गहरा संकट बायजू पर गहरा संकट
aajtak.in
  • नई दिल्‍ली ,
  • 24 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 9:00 AM IST

एडटेक कंपनी BYJU से संकट हटने का नाम नहीं ले रहा है. पिछले कुछ समय से आर्थिक संकट से जूझ रही ये कंपनी अपनी हालत सुधारने के लिए लगातार कोशिश कर रही है, लेकिन अपनी स्थिति नहीं बदल पा रही है. बायजू कभी देश का सबसे वैल्यूएबल स्टार्टअप और तेजी से बना यूनिकॉर्न था, लेकिन अब हालात ये हैं कि उसे पाई-पाई के लिए मोहताज होना पड़ रहा है.

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आलम ये है कि पैसों की बचत करने के लिए कंपनी को पहले अपने सभी रीजनल ऑफिस बंद (BYJU Shut Office) करने पड़े थे और अब उसने अपने ट्यूशन सेंटर (BYJU Tuition Center) बंद करना शुरू कर दिया है. लागत में कटौती करने के लिए BYJU ने 30 सेंटर बंद कर दिया है. कंपनी ने कहा कि उसके 262 हाइब्रिड मॉडल पर चलेंगे. साथ ही अपने संचालन के तीसरे साल में अधिकांश सेंटर्स को लाभदायक बनाने का टारगेट रखा है. 

हॉ‍इब्रिड मॉडल पर काम करेंगे सेंटर 
BYJU'S ने अपने एक बयान में कहा कि उसे अपने टीचर्स के समर्पण और अपने छात्रों के प्रदर्शन पर बेहद गर्व है. BYJU'S ने दक्षता के साथ गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने से इसके अधिकांश सेंटर्स को लाभ में लाने में मदद मिल रही है. कंपनी ने कहा कि उसके 90 फीसदी ट्यूशन सेंटर आने वाले साल में नए टेक्‍नोलॉजी के साथ हाइब्रिड मॉडल पर काम करेंगे.  

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पहले ही बंद हो गए थे रीजनल ऑफिस 
लागत में कटौती के लिए कंपनी ने पहले ही अपने सभी रीजनल ऑफिस को बंद कर दिया था, जिस कारण इसमें काम करने वाले करीब 15000 कर्मचारियों को अनिश्चित समय के लिए वर्क फ्रॉम होम भी दे दिया था. अब बायजू का सिर्फ एक कॉरपोरेट ऑफिस है, जो बेंगलुरु के नॉलेज पार्क में आईबीसी हेडक्‍वार्टर पर है. बता दें बायजू ने 20 से ज्‍यादा रीजनल ऑफिस खोले थे. ये ऑफिस दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई और अन्य शहरों थे. 

गौरतलब है कि बायजू के पास पैसों की भारी कमी है. कंपनी कर्मचारियों को सैलरी भी समय पर नहीं दे पा रही है. इस कंपनी के फाउंडर और सीईओ रविंद्रन को बीते दिनों अपने घर तक को गिरवी रखना पड़ा था, ताकि वे कर्मचारियों को सैलरी दे पाएं. 

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