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चांद से महज 25km दूर है अपना चंद्रयान-3, भेजने में 615 करोड़ रुपये खर्च, दुनिया की टिकी नजर

चंद्रयान-3 को मूल रूप से 2021 में लॉन्च किया जाना था. लेकिन इसे दो साल की देरी से 2023 में लॉन्च किया गया. दिसंबर 2019 में इसरो ने कथित तौर पर मिशन के लिए 75 करोड़ रुपये के प्रारंभिक वित्तीय फंड की मांग की थी.

चंद्रयान-3 का कितना है बजट? चंद्रयान-3 का कितना है बजट?
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 22 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 6:38 PM IST

पूरा देश 23 अगस्त का इंतजार कर रहा है...क्योंकि इसी दिन चंद्रयान- 3 (Chandrayaan-3) को चांद की सतह पर उतरना है. चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर प्रज्ञान रोवर के साथ 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा. इस ऐतिहासिक दिन का सभी को इंतजार है. इस बीच हर रोज इसरो (ISRO) चंद्रयान-3 द्वारा ली जा रही तस्वीरों को जारी कर रहा है. पहले के मून मिशन के मुकाबले चंद्रयान-3 को सबसे अधिक कॉस्ट इफेक्टिव बताया गया है. यानी अब तक के दो चंद्रयान मिशन के मुकाबले चंद्रयान-3 के लिए सबसे कम पैसा खर्च किया गया है.

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देर से लॉन्च हुआ मिशन

चंद्रयान-3 के मिशन का वित्तीय बजट (Chandrayaan-3 Budget) 615 करोड़ रुपये या 75 मिलियन डॉलर है. साल 2019 में चंद्रयान-2 मिशन के असफल होने के बाद चंद्रयान-3 मिशन की शुरुआत हुई थी. इसे 2021 में ही लॉन्च करने का प्लान था. लेकिन कोविड महामारी की वजह से इसमें देरी हुई और आखिर में 14 जुलाई, 2023 को लॉन्च का बटन दबा. इसके बाद से ही पूरा भारत चंद्रयान-3 का चांद की सतह पर लैंड करने का इंतजार कर रहा है. 

कितना है चंद्रयान-3 का बजट?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व चेयरमैन के. सिवन के अनुसार, चंद्रयान-3 के लिए लगभग 615 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया है. जनवरी 2020 की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसरो के पूर्व चेयरमैन के सिवन ने अनुमान लगाया कि अंतरिक्ष यान के लैंडर, रोवर और प्रोपल्शन मॉड्यूल की लागत लगभग 250 करोड़ रुपये होगी और लॉन्च सर्विस पर अतिरिक्त 365 करोड़ रुपये की लागत आएगी.

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भले ही चंद्रयान-3 अन्य अंतरिक्ष मिशन और यहां तक कि कुछ हॉलीवुड फिल्मों के बजट की तुलना में अधिक किफायती है. लेकिन ये अनुमान है कि आखिरी तक इसका कुल खर्च 615 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है. पूर्व इसरो प्रमुख के सिवन द्वारा लगाया गया अनुमान महामारी आने से पहले और मिशन से पहले लगाया गया था. 

साल 2009 में रिलीज हुई हॉलीवुड फिल्म अवतार का बजट आज से हिसाब से करीब 1970 करोड़ रुपये था. जबकि चंद्रयान-3 का कुल बजट करीब 615 रुपये है. यानी अवतार फिल्म के मुकाबले केवल एक तिहाई लागत में भारत ने चंद्रयान-3 को भेजने में सफल रहा है. 
 

शुरुआत में मांगे गए थे 75 करोड़

अब अनुमान है कि मिशन का बजट बढ़ गया है. क्योंकि चंद्रयान-3 को मूल रूप से 2021 में लॉन्च किया जाना था, लेकिन इसे दो साल की देरी से 2023 में लॉन्च किया गया. दिसंबर 2019 में इसरो ने कथित तौर पर मिशन के लिए 75 करोड़ रुपये की प्रारंभिक वित्तीय फंड की मांग की थी. इसमें से 60 करोड़ रुपये का इस्तेमाल उपकरण, मशीनरी और अन्य पूंजीगत खर्चों को कवर करने के लिए किया जाना था. बाकी के 15 करोड़ रुपये रेवेन्यू एक्सपेंडिचर के लिए मांगे गए थे.

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कितना था चंद्रयान-2 का बजट?

अगर चंद्रयान-2 मिशन के वित्तीय बजट की बात करें, तो इस प्रोजक्ट पर 978 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. इसमें से 603 करोड़ रुपये ऑर्बिटर, लैंडर, रोवर, नेविगेशन और ग्राउंड सपोर्ट नेटवर्क पर और 375 करोड़ रुपये जियो स्टेशनरी सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल पर खर्च किए गए थे. 

सबसे मुश्किल काम 

चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर ने 17 अगस्त 2023 को प्रोपल्शन मॉड्यूल को छोड़ दिया था. खुद आगे चल रहा था. दूसरा रास्ता पकड़ लिया था. इसी रास्ते से वह चांद के और नजदीक पहुंच गया है. 18 अगस्त की दोपहर से पहले विक्रम लैंडर और प्रोपल्शन मॉड्यूल 153 km x 163 km की ऑर्बिट थे. लेकिन करीब 4 बजे दोनों के रास्ते बदल गए थे.

वैज्ञानिकों के लिए सबसे मुश्किल चुनौति विक्रम लैंडर  की सॉफ्ट लैंडिंग है. विक्रम लैंडर चांद के एकदम नजदीक पहुंच चुका है. अब उसे सही जगह खोजना है और सही गति में चांद की सतह पर लैंड करना है. पौने चार लाख किलोमीटर दूर से. यह सारा काम वैज्ञानिकों के लिए ये बेहद कठिन होने वाला है.  

 

 

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