
पारले-जी (Parle-G) के नाम से सभी परिचित होंगे. बच्चे हों, बूढ़े हों या फिर जवान, अगर बात बिस्कुट चलती है, तो फिर जुबां पर सबसे पहले जो नाम आता है और वो 'Parle-G' ही है. इस बिस्कुट का इतिहास आजादी के पहले का है और ये आज भी जोरदार मुनाफा कमा रही है. FY24 में इसका प्रॉफिट बढ़कर डबल 1,606.95 करोड़ रुपये हो गया है. अगर आप भी ये बिस्किट खाते हैं, तो इसके कवर पर लिखे नाम को देखकर कभी न कभी तो ये सवाल जरूर उठा होगा, कि आखिर पारले-जी में 'G' का क्या मतलब होता है? इसके जवाब में ज्यादातर लोग कहेंगे जीनियस (Genius) जो सही नहीं है. आइए जानते हैं इसका ...
FY24 में पारले-जी का दबदबा
सबसे पहले बात कर लेते हैं Parle-G बिस्कुट को वित्त वर्ष 2023-24 में हुए प्रॉफिट के बारे में, तो पीटीआई के मुताबिक, FY24 में इसका मुनाफा दोगुना होकर 1,606.95 करोड़ रुपये रहा है, जो कि FY23 में 743.66 करोड़ रुपये रहा था. इसके बीते वित्त वर्ष में पारले बिस्कुल की ऑपरेशनल इनकम दो फीसदी के इजाफे के साथ बढ़कर 14,349.4 करोड़ रुपये हो गई है. अगर रेवेन्यू की बात करें, तो ये 5.31 फीसदी उछलकर 15,085.76 करोड़ रुपये रहा है. ये आंकड़े दर्शाते हैं कि Parle Biscuit की डिमांड अभी भी जोरदार बनी हुई है.
समय बदला, लेकिन स्वाद-डिमांड नहीं
पारले-जी (Parle-G) बिस्किट का स्वाद आज भी लोगों की जुबां पर बरकार है और इसे केवल एक बिस्किट ब्रांड समझना सही नहीं, क्योंकि इसके साथ लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं. जब भी पारले-जी बिस्किट का जिक्र होता है, तो उम्रदराज लोग भी अपने बचपन में लौट जाते हैं. समय के साथ पारले-जी बिस्किट के साइज में कई बदलाव देखने को मिले हैं, लेकिन इसका स्वाद और मार्केट में इसकी डिमांग नहीं बदली और कंपनी के मुनाफे के आंकड़े इसका उदाहरण हैं. गौरतलब है कि द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) के दौरान भारतीय और ब्रिटिश दोनों ही सैनिकों का यह सबसे पंसदीदा बिस्कुट हुआ करता था.
पारले की शुरुआत की अगर बात करें , तो ये देश को आजादी मिलने से पहले साल 1929 में हुई थी. 90 के दशक के बच्चों को तो अपना वह दौर भी याद होगा, जब चाय के साथ पारले-जी का कॉम्बिनेशन सबसे ज्यादा फेमस हुआ करता था. रिपोर्ट्स की मानें तो ऐसा कहा जाता है कि कंपनी ने पारले नाम मुंबई के विले-पार्ले इलाके से लिया है.
पारले के आगे ऐसे लगा 'G'
पारले ने पहली बार 1938 में पारले-ग्लूको (Parle-Gluco) नाम से बिस्कुट का प्रोडक्शन शुरू किया था. आजादी से पहले पारले-जी (Parle-G) का नाम ग्लूको बिस्किट (Gluco Biscuit) ही हुआ करता था. लेकिन, आजादी के बाद ग्लूको बिस्किट का प्रोडक्शन बंद कर दिया गया था. देश में उस समय अन्न संकट इसकी बड़ी वजह थी, क्योंकि इस बिस्कुट को बनाने के लिए गेंहू का इस्तेमाल किया जाता था. जब ये बड़ा संकट कम हुआ, तो कंपनी ने इसका प्रोडक्शन फिर शुरू कर दिया, लेकिन तब तक इस सेक्टर में कॉम्पिटीशन काफी बढ़ गया था और तमाम कंपनियों की मार्केट में एंट्री हो चुकी थी. खासकर ब्रिटानिया ने ग्लूकोज-डी (Glucose-D) बिस्किट से अपनी धमक जमा ली थी.
कॉम्पिटीशन के दौर में पारले ने ग्लूको बिस्किट को दोबारा लॉन्च तो किया, लेकिन इसे नए नाम 'Parle-Gluco' के साथ, फिर 1980 के बाद पारले ग्लूको बिस्किट के नाम को शॉर्ट कर पारले-जी किया गया था. हालांकि, साल 2000 में 'G' का मतलब 'Genius' प्रमोट जरूर किया गया था. लेकिन, असल मायने में Parle-G में दिए 'G' का मतलब 'ग्लूकोज' (Glucose) से ही था. जिसे सिर्फ उस समय मार्केट में ग्लूकोज बिस्किट के बढ़ते कारोबार में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए यूज किया गया था और ये इतना फेमस हुआ कि अब तक जलवा कायम है.